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मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रहे छात्रों को लिए बड़ी खबर है. मध्य प्रदेश सरकार ने 6वीं से 12वीं क्लास तक रेगुलर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए MBBS और BDS में पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया है. शासकीय विद्यालयों से 12वीं तक रेगुलर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सीटें रिजर्व जाएंगी.
इसी सत्र से रिजर्व होंगी 5% मेडिकल सीटें
मध्य प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने के आदेश के बाद यह दूसरा बड़ा फैसला है. इससे शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को एमबीबीएस में एडमिशन पाने में मदद मिलेगी. यह व्यवस्था इसी सत्र से लागू होगी. छात्रों को प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के कॉलेजों में पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा.
सीएम शिवराज सिंह ने की थी ये घोषणा
दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 मार्च एमबीबीएस और बीडीएस में 5% आरक्षण देने की घोषणा की थी. बुधवार को इस संबंध में नोटिस भी जारी कर दिया गया है. मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए रियायत देने का मकसद हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को आगे लाना है.
इन छात्रों को मिलेगा लाभ
एमबीबीएस और बीडीएस में 5 प्रतिशत रिजर्व सीटों का फायदा उन छात्रों को मिलेगा, जो छात्र 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई शासकीय विद्यालयों से करेंगे. इसके अलावा जिन छात्रों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत प्राइवेट स्कूल से कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाई करने के बाद 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई शासकीय स्कूल से करेंगे.
मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में
आमतौर पर अंग्रेज़ी में होने वाली एमबीबीएस की पढ़ाई अब हिंदी में भी की सकेगी. मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने हिंदी में भी मेडिकल की पढ़ाई की शुरुआत की है. पिछले साल 16 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में एमबीबीएस की हिंदी किताबों का विमोचन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया था. इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू हुई.