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MP पटवारी परीक्षा की धांधली क्यों नहीं पकड़ पा रही पुलिस? जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST
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MP Patwari Exam Scam: मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा की टॉपर्स लिस्ट जारी होने के बाद हर दिन कथित धांधली के मामले सामने आ रहे हैं. पहले 10 में से 7 टॉपर्स एक ही एग्जाम सेंटर्स से, फिर '15 लाख रुपये की रिश्वत' की बात सामने आई. इसके बाद एक जिले के एक ही समाज के चयनित अभ्यर्थियों की संख्या, ज्यादा दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन और चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों का राज्य की वन रक्षक भर्ती में पूरी तरह फिट पा गए. ग्वालियर से लेकर भोपाल तक इस मामले के तार जुड़े बताए जा रहे हैं. एमपी पटवारी भर्ती में सामने आ रहे खुलासों के बावजूद पुलिस के हाथ खाली नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं अब तक क्या-क्या हुआ.

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परीक्षा से पहले पकड़े गए थे दो अभ्यर्थी
मंगलवार को ग्वालियर से ही एक ऐसा मामला उजागर हुआ है. इसमें बताया गया है कि मध्यप्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच ने परीक्षा होने से पांच दिन पहले कुछ खुफिया सूचनाएं जुटाई थी. इन सूचनाओं के आधार पर एक मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में दो अभ्यर्थियों के नाम शामिल किए गए. ये दोनों अभ्यर्थी पटवारी परीक्षा में शामिल होने वाले थे और दोनों परीक्षा में गड़बड़ी करने की कोशिश कर रहे थे. इसके लिए दोनों अभ्यर्थी ऑफसेट प्रिंटिंग के आधार पर कुछ सबूत जुटा रहे थे. इस पूरे मामले पर क्राइम ब्रांच ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो छात्रों को ग्वालियर के थाटीपुर इलाके से हिरासत में लिया गया. 

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आधार कार्ड से छेड़छाड़ की कोशिश
इस पूरे मामले में जिन दो लोगों से पुलिस ने पूछताछ की, उन्होंने बताया कि पटवारी परीक्षा में वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बिठाने वाले थे. इसके लिए आधार जैसे कागजातों में भी छेड़छाड़ कर रहे थे. हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे आधार कार्ड में दर्ज अंगुली के निशान को वे सॉल्वर के मुताबिक बदलने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस आ गई. थाना अपराध शाखा ग्वालियर में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात शिशिर तिवारी की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि पूरे मामले की जांच के दौरान अभियुक्तगण मनीष शर्मा और वीरभान बंसल के साथ अन्य अभियुक्त रिंकू रावत, कृष्णवीर जाट और संदीप सिंह की अपराध में संलिप्तता पाई गई. इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ की. पूछताछ में और भी कई जानकारी सामने आई.

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जमानत पर रिहा हुए आरोपी, पुलिस जांच पर उठे सवाल
10 अप्रैल को पटवारी परीक्षा हुई जिसमें ये दोनों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए क्योंकि ये पुलिस की हिरासत में थे. इसके बाद मामला हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में पहुंचा और इन दो छात्रों को 10 जून को जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस पूरे मामले में छात्रों की पैरवी करने वाले वकील एमपी सिंह हैं जिन्होंने 'किसान तक' से खास बातचीत में नई जानकारी दी है. 

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वकील कहते हैं कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच शुरू होने के बीच बहुत समय लगा. इसके बाद ग्वालियर में जिस तरह से ये मामला पकड़ में आया है उसे सरकार ने इसको रोक तो लिया, लेकिन बाकी शहरों में भी क्या इस तरह के मामले पकड़ में आने की आशंका नहीं थी? इस सवाल पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा है. न ही पुलिस ने और न ही सरकार ने इस मामले पर अभी कोई प्रतिक्रिया दी है.

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वकील एमपी सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच जारी है और परीक्षा भी हो गई है. जो छात्र परीक्षा में चुने गए हैं उनके ऊपर तमाम तरह की उंगलियां उठाई जा रही हैं. इससे छात्रों को अपना भविष्य अंधकार में दिख रहा है. इंसाफ की मांग में छात्र सड़कों पर उतरे हुए हैं. अभी इस मामले में बहुत कुछ उजागर होना बाकी है.

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