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बिहार में सोमवार 22 अगस्त को सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थियों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं. ये प्रदर्शनकारी वे उम्मीदवार हैं जिन्होंने प्राइमरी शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य CTET और BTET परीक्षा क्वालिफाई तो कर ली है, मगर सरकार 3 साल से नौकरी नहीं दे रही. इस घटना से एक दिन पहले ही बिहार के शिक्षामंत्री ने शिक्षा विभाग में साढ़े 3 लाख भर्तियों का ऐलान किया था, मगर आधिकारिक नोटिफिकेशन की मांग कर रहे उम्मीदवारों को पुलिस की बर्बर लाठियों का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दीपांकर गौरव ने AajTak को बताया, ''उम्मीदवार 3 साल से प्राइमरी शिक्षक भर्ती के लिए नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं. कैंडिडेट्स CTET और BTET परीक्षाएं क्वालिफाई कर चुके हैं, 2019 से अभी तक 7वें चरण की शिक्षक भर्ती का नोटिस जारी नहीं किया गया है. हम 22 दिन से गर्दनी बाग में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. गांधी मूर्ति से आगे जाते हुए डाक बंगला पर हमें रोक लिया गया और लाठीचार्ज कर दिया गया.''
उन्होंने आगे कहा, ''हम 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी थे. बैरिकेटिंग तोड़कर भी आगे बढ़ सकते थे लेकिन हमारा प्रदर्शन पूरी तरह शंतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारियों ने अपनी तरफ से कोई हिंसा नहीं की. ADG ने जिस प्रकार तिरंगा थामे हमारे साथी को लाठियों से मारा, उसे देश जनरल डायर की याद आ गई. उनकी जगह कोई और होता तो हत्या के प्रयास का मुकदमा होता, मगर वह ADG हैं तो कोई कार्रवाई नहीं हुई.''
क्या है शिक्षक भर्ती का मामला
साल 2006 से बिहार में शिक्षक भर्ती जारी हैं जिन्हें पहले, दूसरे, तीसरे... चरण की शिक्षक भर्ती कहा गया. आखिरी भर्ती 2019 में 6ठें चरण में हुई थी जिसमें 94 हजार भर्तियां निकाली गई थीं. इसमें से 42 हजार पदों पर ही नियुक्ति हो पाई और 50 हजार से ज्यादा पद खाली रह गए. इसके बाद 3 साल से अगली भर्ती का नोटिफिकेशन नहीं जारी किया गया है. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी खाली बची सीटों को जल्द से जल्द भरने की मांग करते हुए नई भर्ती, यानी 7वें चरण की भर्ती लाने की मांग कर रहे हैं.
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं उम्मीदवार
बीते 3 वर्षो से अगले चरण की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. विभाग में 2 लाख से अधिक शिक्षक के पद खाली हैं जिन्हें भरने के लिए सरकारी वादे तो किए जा रहे हैं लेकिन नोटिफिकेशन जारी नहीं हो रहा. लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे प्रदर्शनकारियों ने जुलाई 2022 में राहत की सांस ली जब शिक्षा विभाग ने अगले चरण की नियुक्तियों के लिए विधिवत नोटिस जारी कर दिया था. इसके तहत जुलाई के अंत तक नोटिफिकेशन जारी करने का वादा किया गया और उम्मीदवारों से धरना खत्म करने का अनुरोध किया गया.
उम्मीदवार इस नोटिस को पाकर 7वें चरण की नियुक्तियों का इंतजार करने लगे. वहीं जुलाई बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई. ऐसे में उम्मीदवार दोबारा सड़कों पर उतर आए और जल्द प्रक्रिया शुरू करने की मांग करने लगे. इसी बीच 15 अगस्त को मुख्यमंत्री नितीश कुमार और 21 अगस्त को शिक्षामंत्री के जल्द नौकरियां देने के ऐलान के बाद इन उम्मीदवारों ने सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास किया जिसके जवाब में उन्हें पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ा.
अभ्यर्थी दीपांकर ने कहा कि पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे. सरकार से प्राइमरी शिक्षक भर्ती के नोटिफिकेशन की मांग पर वह कायम रहेंगे और संतोषजनक जवाब मिलने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे.