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इतिहास

लालकिला न राजपथ...26 जनवरी 1950 को यहां हुई थी पहली परेड

aajtak.in
  • नई द‍िल्‍ली,
  • 27 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:36 AM IST
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26 जनवरी पर राजपथ पर परेड के अलावा शाम होते होते लालकिले पर किसानों द्वारा झंडारोहण चर्चा में आ गया. क्‍या आपको पता है कि 26 जनवरी पर राजपथ और स्‍वतंत्रता दिवस पर लालकिले पर तिरंगा फहराया गया था. आपको बता दें कि‍ जब 26 जनवरी साल 1950 को हमारा देश औपचारिक रूप से गणतंत्र बना. इसी दिन पहली गणतंत्र दिवस परेड भी निकली थी. लेकिन ये परेड कहीं और से निकली थी. जानें पूरा इतिहास....

(परेड की तस्वीर 1950 की है)

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26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड, राजपथ के बजाय तत्‍कालीन इर्विन स्‍टेडियम में हुई थी ज‍िसे अब नेशनल स्‍टेडियम कहा जाता है. उस वक्‍त इर्विन स्‍टेडियम के चारों तरफ चारदीवारी नहीं थी और उसके पीछे लाल किला साफ नजर आता था.

(परेड की तस्वीर 1957 की है) 

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ये वो दौर था जब डॉ० भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों ने इसे लागू करने की पूरी योजना बनाई थी. संविधान निर्माण में कुल 22 समीतियां थीं, जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) सबसे प्रमुख और महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण 'संविधान लिखना' या 'निर्माण करना' था. 

(परेड की तस्वीर 1965 की है) 

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प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान सुपुर्द किया. 

(परेड की तस्वीर 1961 की है) 

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26 जनवरी को परेड के भव्‍य आयोजन के साथ दिन में 10 बजकर 18 म‍िनट पर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोष‍ित क‍िया गया. इसके बाद पांच साल ये परेड इरविन एंफीथियेटर में हुई. राजपथ पर साल 1955 में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड शुरू हुई और उसके बाद से हर साल राजपथ पर परेड हो रही है. 

(परेड की तस्वीर 1961 की है) 

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1955 के बाद से अब तक आठ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह परेड रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट तक जाती है. इस परेड में देश की शक्‍त‍िशाली सेनाओं के पराक्रम की झलक साफ नजर आती है.

(परेड की तस्वीर 1960 की है) 

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बता दें क‍ि 1950 की पहली परेड में भारतीय वायु सेना के 100 से अधिक विमानों ने परेड के बाद उड़ान भरी थी.  इस परेड में महिलाओं की संख्‍या बहुत कम थी, जो कि तब से लेकर अब तक दोगुने से भी ज्‍यादा नजर आती है. 

(परेड की तस्वीर 1961 की है) 

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