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इतिहास

वियतनाम: जहां बजती है भारत की सरगम, जानिए, इस देश की खास बातें

aajtak.in
  • 27 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST
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दक्षिणपूर्व एशिया का खूबसूरत देश वियतनाम, भारत के साथ अच्छे संबंधों के लिए जाना जाता है. दोनों देशों के कल्चरल और आर्थिक संबंध दूसरी शताब्दी से भी पुराने हैं. आइए जानें वियतनाम से जुड़ी खास बातें. 

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भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत चम्पा राज्य के संगीत ने वियतनाम के संगीत पर अमिट छाप छोड़ी है. वर्तमान समय में भारत और वियतनाम के सम्बन्ध अत्यन्त प्रगाढ़ हैं और आपसी राजनैतिक महत्व के अनेक इलाकों को समेटे हुए हैं.

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बता दें कि चम्पा दक्षिण पूर्व एशिया (192-1832) में) स्थित एक प्राचीन हिन्दू राज्य था. यहां भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार था और इसके राजाओं के संस्कृत नाम थे. चम्पा के लोग और राजा शैव थे. अन्नम प्रांत के मध्य और दक्षिणी भाग में प्राचीन काल में जिस भारतीय राज्य की स्थापना हुई उसका नाम 'चंपा' था. 

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वियतनाम युद्ध के समय भारत ने अमेरिका की भूमिका की कड़े शब्दों में निन्दा की थी. कम्बोडिया-वियतनाम युद्ध के समय वियतनाम की सहायता करने वाले गिने-चुने गैर-साम्यवादी देशों में भारत भी शामिल था. 
 

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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और वियतनाम के जाने-माने नेता हो ची मिन्हं की ओर से रखी गई मजबूत नींव आज भी कायम है. फ्रांसीसी ताकतों के खिलाफ डेन बेन फु संग्राम में वियतनाम की जीत का जश्न मनाने के लिए पंडित नेहरू 1954 में वियतनाम गए थे. इसके बाद 1958 में हो ची मिन्हप भारत के दौरे पर आए थे. 

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भारत और वियतनाम संबंध प्राचीन चाम सभ्यता के समय से चले आ रहे हैं. शुरुआत तब हुई जब उड़ीसा के लोग वियतनाम गए थे. उस वक्त उन्हें वहां रहने योग्य घर मिला था, संस्कृतियों, रीति-रिवाजों, भाषा एवं आस्थाओं का आपस में विलय हुआ था.

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भारत-वियतनाम संबंधों को जो चीज ठोस रूप देती है वह बढ़ती विकास साझेदारी है.  आईटी, शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित है. वियतनाम के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत अनेक परियोजनाओं के लिए तकरीबन 165 मिलियन डालर का कर्ज दिया था. 

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वियतनाम में चावल अनुसंधान संस्थान की स्थापना में भारत की मदद से वियतनाम को दुनिया के अग्रणी चावल निर्यात बनने में मदद की है. 

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वियतनाम की अधिकतर आबादी युवा है जो अपने करियर को लेकर काफी सचेत है. भारत ने भारतीय तकनीकी व आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के तहत हर साल सैकड़ों वियतनामी छात्रों को छात्रवृत्ति की पेशकश की है. हाल के समय में आईटी दोनों देशों के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी के एक महत्विपूर्ण आधार के रूप में उभरा है.

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