
दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही आतिशी और उनका परिवार चर्चा में हैं. आतिशी के साथ ही उनके पिता भी अब चर्चा में आ गए हैं और उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने संसद हमले में दोषी अफजल गुरु का समर्थन किया था. राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के ट्वीट के बाद से आतिशी के पिता भी डिबेट का विषय बन गए, क्योंकि स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि आतिशी के परिवार ने आतंकवादी अफजल गुरु को फांसी से बचाने की लंबी लड़ाई लड़ी थी.
आतिशी के पिता पर लगे इन आरोपों के बाद अब सर्च इंजन पर उनके बारे में काफी सर्च किया जा रहा है और लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर आतिशी के पिता कौन हैं और किस आधार पर उनके अफजल गुरु का समर्थन देने की बात कही जा रही है.
कौन हैं आतिशी के पिता?
दिल्ली की भावी सीएम आतिशी के पिता का नाम विजय सिंह हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, विजय सिंह पंजाबी हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे हैं. इसके साथ ही विजय सिंह और आतिशी की मां तृप्ता वाही भी सोशल वर्क से जुड़े काम भी करते रहे हैं. आतिशी के माता-पिता को वामपंथी झुकाव वाला माना जाता है.
यहां तक ये भी कहा जाता है कि कार्ल मार्क्स और व्लादिमीर लेनिन के नामों के अक्षरों को जोड़कर आतिशी को 'मार्लेना' सरनेम दिया गया था. हालांकि, बाद में उन्होंने इसे अपने नाम से हटा दिया था. कुछ रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि आतिशी के पिता मूल रुप से जौनपुर के रहने वाले हैं.
हालांकि, सोशल मीडिया पर आतिशी के माता और पिता के नाम कई उन लोगों से भी जोड़े जा रहे हैं, जिन पर एंटी इंडिया पॉलीटिक्स के आरोप रहे हैं और आतंकियों से संबंध की बात सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, वे Revolutionary Democracy के एडिटर भी रहे हैं, जिस पर आतिशी के भी लेख हैं. उन्होंने The Politics of Hindutva and the NCERT Textbooks के नाम से एक लेख लिखा है.
क्या हैं आरोप?
स्वाति मालीवाल ने आतिशी के नाम के ऐलान के बाद एक्स पर लिखा, 'दिल्ली के लिए आज बहुत दुखद दिन है. आज दिल्ली की मुख्यमंत्री एक ऐसी महिला को बनाया जा रहा है जिनके परिवार ने आतंकवादी अफ़ज़ल गुरु को फांसी से बचाने की लंबी लड़ाई लड़ी. उनके माता पिता ने आतंकी अफ़ज़ल गुरु को बचाने के लिए माननीय राष्ट्रपति को दया याचिकाऐं लिखीं. उनके हिसाब से अफ़ज़ल गुरु निर्दोष था और उसको राजनीतिक साज़िश के तहत फंसाया गया था.'