Advertisement

भेड़ियों को पकड़ने के लिए क्यों छोड़े जा रहे पटाखे? ऐसे पकड़ में आते हैं 'आदमखोर'

Bahraich Wolf tranculize Operation: उत्तर प्रदेश के बहराइच में भेड़ियों का आंतक है. अभी तक ये खूंखार भेड़िए 9 लोगों का शिकार कर चुके हैं.

बहराइच में चार भेड़ियों को पकड़ लिया गया है. (फोटो- Pixabay) बहराइच में चार भेड़ियों को पकड़ लिया गया है. (फोटो- Pixabay)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

उत्तर प्रदेश के बहराइच में कई भेड़ियों ने आतंक मचा रखा है. अभी तक ये खूंखार भेड़िए 9 लोगों का शिकार बना चुके हैं. बताया जा रहा था कि करीब 6 भेड़िए थे, जिन्होंने आतंक मचाया था, जिसमें से चार को पकड़ लिया गया है. अब दो भेड़िए को पकड़ने के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है और अलग अलग तरीकों से इन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है. भेड़ियों को पकड़ने के इस ऑपरेशन में वन विभाग की टीम पटाखे भी छोड़ रही है और इन्हें पकड़ने के लिए अलग अलग तरीके अपना रही है. ऐसे में सवाल है कि आखिर भेड़ियों को पकड़ने के लिए पटाखे क्यों छोड़े जा रहे हैं और किस तरह भेड़ियों को पकड़ा जा रहा है. 

Advertisement

कैसे पकड़ा जा रहा है?

बहराइच के कछार इलाके में भेड़िए का सर्च ऑपरेशन जारी है. भेड़ियों को पकड़ने के लिए हरीबक्स पुरवा गांव के इलाके में चार पिंजरे, आठ थर्मोसेंसर कैमरे लगाए गए हैं. वहीं, थर्मल ड्रोन से निगरानी शुरू की गई है और पूरे इलाके में नजर रखी जा रही है. इसके लिए 18 टीमें रात-दिन गश्त कर रही हैं. फिलहाल 50 से ज्यादा कर्मी पिंजड़े और जाल लगाने का काम कर रहे हैं. डॉक्टर्स के टीम भी मौजूद है, जो ट्रेंकुलाइजर के जरिए भेड़िए को पकड़ने की कवायद में है. 

अब पूरे इलाके की कांबिंग के जरिए भेड़िए के मूवमेंट को ट्रैक किया का रहा है. बहराइच के औराही गांव में लोग भी रात में पहरा देकर भेड़िए पर नजर रख रहे हैं. पुलिस की टीम पटाखों के जरिए ऑपरेशन में जुगाड़ कर रही है. वन विभाग रात भर गांव में अपनी गाड़ियां दौड़ा रही है और लोगों को घरों के भीतर रहने बच्चों को घरों से न निकलने देने दरवाजा बंद कर सोने जैसी कई हिदायतें स्पीकर के जरिए दी जा रही है. 

Advertisement

किन तरीकों से पकड़े जाते हैं आदमखोर?

आपको बता दें कि जब कोई बाघ ज्यादा खतरनाक हो जाता है या आदमखोर हो जाता है तो वन विभाग की टीम पहले उसे जिंदा पकड़ने की कोशिश करती है. लेकिन, अगर वो पकड़ ना आए और लगे कि वो लोगों के खतरनाक साबित हो सकता है तो फिर गोली मारने के आदेश दिए जाते हैं. पहले पिंजरों, जाल आदि के जरिए पकड़ने की कोशिश की जाती है. पूरी कोशिश नाकाम होने पर मारने का आदेश दिया जाता है.

आदमखोर को पकड़ने के लिए पहले जानवर को ट्रैक किया जाता है और अब इसके लिए ड्रोन आदि का इस्तेमाल होता है. इसके बाद एक प्लान के जरिए पिंजरे लगाए जाते हैं और जाल बिछाए जाते हैं. इसके साथ ही  ट्रेंकुलाइजर के जरिए उसे बेहोश किया जाता है. इसके लिए वन विभाग और ऑपरेशन में लोग अलग अलग जगहों पर छिपकर इंतजार करते हैं या फिर जानवर को एक प्लान के लिए मूव करवाया जाता है. वहां पहले से ट्रेंकुलाइजर आदि की व्यवस्था होती है और उसे पकड़ा जाता है. 

इसके साथ ही ऑपरेशन में जाने से पहले जानवर के हिसाब से कैमिकल आदि की व्यवस्था की जाती है कि किस तरह के जानवर को कितनी डोज किस कैमिकल की देनी है. इसके साथ ही उनके हिसाब से ही सीरिंज, डार्टिंग पाइप, राइफल, पिंजरा, नेट आदि का इंतजाम किया जाता है. फिर ऑपरेशन किया जाता है. कई स्थितियों में पिंजरे की जगह Snares का यूज किया जाता है, जिसमें जानवर लंबे समय तक रह सकता है और इसमें पिंजरे का गेट भी अलग तरीके से खोला जाता है. 

Advertisement

पटाखे क्यों छोड़े जा रहे?

जानवरों को पकड़ने में पटाखों के जरिए एक जुगाड़ किया जाता है. इससे रिहायशी इलाकों में लगातार पटाखे छोड़े जाते हैं ताकि जानवर रिहायशी इलाकों से दूर रहे. दरअसल, जानवर आग, पटाखों की आवाज से डरता है, इससे वो इन सब स्थितियों से भागता है. ऐसे में रिहायशी इलाकों से जानवर को दूर रखने या फिर छुपे हुए जानवर का मूवमेंट करवाने के लिए इन सभी तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. 
 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement