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बकरीद पर कुछ बकरे 5-10 लाख के बिकते हैं... क्या है वो वजह, जिससे लाखों में पहुंच जाते हैं रेट!

Bakrid 2024: बकरीद के मौके पर कुर्बानी के लिए लाखों रुपये के बकरे भी खरीदे-बेचे जाते हैं. क्या आप जानते हैं कि आखिर कुछ बकरों की रेट इतनी ज्यादा क्यों होती है और इसका क्या कारण है?

बकरीद पर कुछ बकरे लाखों रुपये में बिके हैं. बकरीद पर कुछ बकरे लाखों रुपये में बिके हैं.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2024,
  • अपडेटेड 1:11 PM IST

देशभर में ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्योहार माना जा रहा है. जब भी बकरीद आती है तो ये खबरें जरुर आती हैं कि बाजार में 5 लाख, 10 लाख, 15 लाख रुपये तक के बकरे बिक रहे हैं. वैसे आम तौर पर बकरे 10 हजार से 50 हजार के बीच बिकते हैं, लेकिन अधिकतर मंडियों में कुछ बकरें ऐसे बिकने को आते हैं, जिनके रेट लाखों में होते हैं. कई बार तो ये कीमत करोड़ में भी पहुंच जाती है. वैसे उसी तरह के बकरे कम रेट में भी मिलते हैं. ऐसे में कभी आपने सोचा है कि आखिर कुछ बकरों में ऐसा क्या होता है कि उनके रेट 10 लाख तक या फिर करोड़ तक पहुंच जाते हैं. तो जानते हैं आखिर ये क्यों होता है... 

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इस बार कितने के बिके बकरे?

अगर इस साल की बात करें तो इस साल बकरों की रेट में तेजी है और महंगाई की वजह से काफी ज्यादा रेट पर बकरे बिक रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, बाजार में कुर्बानी वाला छोटा बकरा भी इस बार 10 हजार रुपये तक बिक रहा है, जबकि बड़े बकरे की कीमत 30 हजार रुपये के करीब है. इसके अलावा कुछ खास नस्ल के बकरे एक लाख से ज्यादा बिक रहे हैं. जैसे आगरा में एक बकरा 1.5 लाख रुपये, मुजफ्फरनगर में 2.10, भोपाल में 7.5 लाख रुपये तक का बकरा बिका है. 

क्यों कुछ के रेट होते हैं इतने महंगे?

आप भी सोचते होंगे कि कुछ बकरों के रेट इतने ज्यादा क्यों होते हैं और उनके ज्यादा रेट की पीछे क्या वजह है? दरअसल, किसी भी बकरे के महंगे भाव में बिकने के पीछे कई कारण होते हैं.

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  • किसी भी बकरे के ज्यादा रेट होने की वजह है, उसकी नस्ल. सबसे पहले नस्ल के आधार पर किसी भी बकरे के रेट तय होते हैं. जैसे बाजार में मालवा, तोतपरी, बीटल जैसी नस्ल के बकरों की काफी डिमांड होती है. दुनिया में अंगोरा नस्ल के बकरे की रेट सबसे ज्यादा है. दरअसल, अच्छी नस्ल के बकरों की कद-काठी काफी मजबूत होती है और इस कारण उनके रेट काफी ज्यादा होती है. 
  • नस्ल के बाद महंगे बकरे बिकने की वजह होती है उसका शरीर. बकरे का शरीर, उसकी बनावट, उसका वजन, उसकी उम्र आदि से भी एक बकरे की रेट तय होती है. अक्सर दो-ढाई साल के बकरे काफी अच्छी कद-काठी के होते हैं और उनका वजन एक क्विंटल से दो क्विंटल तक होता है. इसके तरह के बकरे एक रुपये से ज्यादा में बेचे जाते हैं. कोई भी खरीददार उसके शरीर को देखता है और उसके बाद भाव तय किए जाते हैं. जैसे बाजार में लंबे कान वाले बकरों की डिमांड ज्यादा होती है और ये बकरे आमतौर पर महंगे बिकते हैं. 
  • शरीर पर बनी कुछ आकृति भी बकरे के महंगे बिकने की वजह होती है. अक्सर बाजार में वो बकरे ज्यादा रेट में बिकते हैं, जिन पर कुछ आकृति बनी होती है. कुछ बकरा मालिकों का दावा होता है कि उनके बकरे पर बालों से अल्लाह लिखा हुआ है या फिर कोई धार्मिक शब्द लिखा हुआ है, जिस वजह से उसके रेट काफी ज्यादा हो जाते हैं. जैसे अगर बाल या रंग चांद की शेप में है तो उसकी रेट काफी ज्यादा होगी. बालों पर इस तरह की डिजाइन होने की वजह से रेट करोड़ों में पहुंच जाते हैं. साथ ही बालों का रंग भी बकरे के रेट में अहम रोल निभाते हैं.
  • दांत भी है वजह- वैसे जब भी बकरे खरीदे जाते हैं तो उनके दांत पर भी खास ध्यान दिया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से जिन बकरे के दो, चार या फिर छह दांत होते हैं, उन्हीं बकरों की कुर्बानी दी जाती है. ऐसे में अगर किसी बकरे के दांत नहीं हैं या फिर दो, चार या फिर 6 से अलग संख्या है तो उसकी कुर्बानी नहीं दी जाती.

दुनिया में सबसे महंगा बकरा कितने का बिका है?

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वहीं, दुनिया के सबसे महंगे बकरे की बात करें तो एक बार ब्रिटेन में अंगोरा नस्ल का बकरा 82,600 यूएस डॉलर में बिका था, जिसकी कीमत लगभग 70 लाख रुपये थी. ये बात साल 1985 की है और उस वक्त ये बकरा इतने में बिका था, जो आज के हिसाब से काफी ज्यादा रेट है. हालांकि, वैसे भारत में भी कई लोग अपने बकरों की रेट 1 करोड़ से ज्यादा लगा चुके हैं. 

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