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जमात-ए-इस्लामी, सेना या खालिदा जिया... कौन करेगा हिंसा से जूझ रहे बांग्लादेश में शासन?

Bangladesh Political Situation: बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद अब सवाल है कि आखिर अब पड़ोसी देश में किसका राज होगा. क्या सेना बांग्लादेश पर राज करेगी? तो जानते हैं बांग्लादेश में सत्ता के दावेदार कौन-कौन हैं...

क्या होगा बांग्लादेश की सियासत का फ्यूचर? क्या होगा बांग्लादेश की सियासत का फ्यूचर?
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

बांग्लादेश में छात्रों के प्रदर्शन ने पहले हिंसक रूप लिया और बात तख्तापलट तक पहुंच गई. फिर स्थिति इतनी खराब हो गई कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और बांग्लादेश से बच कर निकलना पड़ा. अभी शेख हसीना भारत में हैं और बताया जा रहा है कि यहां से शेख हसीना लंदन या फिनलैंड में शरण ले सकती हैं.

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शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर बांग्लादेश की कमान किसके हाथों में होगी. क्या वहां चुनाव होंगे या फिर सेना अपने अंडर में सबकुछ कर लेगी? ऐसे में जानते हैं कि आखिर बांग्लादेश में शासन के लिए कौन-कौन दावेदार है और बांग्लादेश की सत्ता पर कौन काबिज हो सकता है... 

कौन-कौन हैं दावेदार...

अभी तक बांग्लादेश में सरकार बनने या सत्ता हाथ में लेने को लेकर कोई तस्वीर स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन सत्ता पर काबिज होने के लिए कई दावेदार माने जा रहे हैं. शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद हुई आर्मी चीफ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से अंदाजा लगाया जा रहा था कि अब आर्मी रूल लग सकता है और सेना प्रमुख अपने हाथ में देश की कमान ले सकते हैं.

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लेकिन, तेजी से बदले घटनाक्रम में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा करने का भी आदेश दिया, जो घर में नजरबंद थीं. खालिदा जिया की रिहाई की खबर के बाद चर्चा है कि खालिदा भी देश की पीएम बन सकती हैं. इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी को भी अहम दावेदार माना जा रहा है. तो जानते हैं किसकी दावेदारी ज्यादा मजबूत है?

डॉ. मोहम्मद यूनुस हो सकते हैं सरकार के सलाहकार

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बनाने को लेकर एक अपडेट ये भी है कि छात्र आंदोलन के प्रमुख आयोजकों ने नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में प्रस्तावित किया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में आंदोलन के प्रमुख समन्वयकों में से एक नाहिद इस्लाम ने कहा कि वे पहले ही प्रोफेसर यूनुस से बात कर चुके हैं और उन्होंने अपनी सहमति दे दी है.

आर्मी रूल की है काफी चर्चा

सोमवार को शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद तुरंत बाद सेना के प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार जल्द ही अंतरिम सरकार बनाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा, 'पीएम शेख हसीना के इस्तीफा के बाद अब अब हम शासन करेंगे. अंतरिम सरकार का गठन करके देश चलाएंगे. हमारे देश का नुकसान हो रहा है. संपत्ति का नुकसान हो रहा है. मुझे दायित्व दीजिए, मैं सब संभाल लूंगा.' 

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सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की है और उनसे कहा है कि सेना कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगी. हालांकि, बैठक में हसीना की अवामी लीग पार्टी का कोई नेता नहीं था. आर्मी के दावे के बाद से माना जा रहा है कि आर्मी सरकार बनाने पर काम कर रही है और अगर ऐसा होता है तो जनरल वकार-उज-जमान के हाथ में देश की कमान आ सकती है. 

खालिदा जिया का पलड़ा भी है मजबूत

खालिदा जिया की रिहाई के आदेश के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि अंतरिम सरकार में खालिया जिया का नाम शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही कुछ रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा है कि खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  (BNP) के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान को भी आगे किया जा सकता है.

खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष हैं. बांग्लादेश में ये शेख हसीना की अवामी लीग की धुर विरोधी और मुख्य विपक्षी पार्टी है. खालिदा का झुकाव जमात-ए-इस्लामी की तरफ है. ऐसे में खालिदा जिया को जमात-ए-इस्लामी का साथ भी मिल सकता है. 

खालिदा जिया मार्च 1991 से 1996 तक और उसके बाद जून 2001 से अक्टूबर 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं हैं. हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था. खलिदा जिया की पार्टी में कई कट्टरपंथी नेता है और अगर देश फिर से कट्टरपंथ की तरफ बढ़ता है तो खालिया जिया के पास फिर से कमान आ सकती है. 

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क्या जमात-ए-इस्लामी को मिलेगी कमान

खालिदा जिया और सेना के साथ जमात-ए-इस्लामी को भी सरकार का दावेदार माना जा रहा है. दरअसल, जमात ए इस्लामी को लेकर खबरें हैं कि बांग्लादेश में काफी पहले से तख्तापलट की तैयारियां की जा रही थीं और जमात ए इस्लामी पहले से काफी एक्टिव थीं. वहीं, सेना के भी जमात-ए-इस्लामी के साथ होने की बातें कही जा रही है.

अगर जमात-ए- इस्लामी को सेना का पूरा साथ मिलता है तो फिर जमात-ए-इस्लामी अहम भूमिका में सामने आ सकती है. इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा रहा है कि जब राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक हुई तो जमात-ए-इस्लामी के नेता भी वहां मौजूद थे.

ऐसे में माना जा रहा है कि अंतरिम सरकार पर कोई फैसला होता है तो जमात-ए-इस्लामी को भी अहम भूमिका दी जा सकती है. इसके अलावा ये भी संभव है कि बांग्लादेश एक अंतरिम सरकार हो, जिसमें जमात-ए-इस्लामी और खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को अहम जिम्मेदारी मिले. मगर देखना होगा कि सेना अंतरिम सरकार में किस भूमिका में रहती है, जिसके बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी. 

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