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13 अक्टूबर: जब अमेरिका की सबसे शक्तिशाली इमारत की पड़ी थी नींव, जानें कैसे बना व्हाइट हाउस

अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है. इस शक्ति का केंद्र राजधानी वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस है, जो यहां के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास है. व्हाइट हाउस वाशिंगटन डीसी में 1600 पेंसिल्वेनिया एवेन्यू पर स्थित है, जो शायद देश का सबसे प्रसिद्ध पता है. आज की कहानी इसी व्हाइट हाउस से जुड़ी है.

व्हाइट हाउस के बनने की कहानी व्हाइट हाउस के बनने की कहानी
सिद्धार्थ भदौरिया
  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 6:35 AM IST

आज 13 अक्टूबर है. आज के दिन ही अमेरिका की ताकत का केंद्र माने जाने वाले व्हाइट हाउस की नींव पड़ी थी. 13 अक्टूबर, 1792 को व्हाइट हाउस की आधारशिला रखी, जिसके तुरंत बाद 18 अगस्त 1793 को कैपिटल की आधारशिला रखी गई. 1790 के निवास अधिनियम द्वारा राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने 10 वर्ग मील की राजधानी के लिए एक स्थान चुना, जो पोटोमैक नदी के पूर्वी तट पर और कैपिटल बिल्डिंग के पास है. 

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वाशिंगटन डीसी जो अमेरिका की नव-नामित राजधानी थी. वहां 13 अक्टूबर, 1792 को  राष्ट्रपति निवास के लिए आधारशिला रखी गई है. 1800 में राष्ट्रपति जॉन एडम्स इस हवेली में रहने वाले पहले राष्ट्रपति बने, जिसे जल्द ही "व्हाइट हाउस" के रूप में जाना जाने लगा. क्योंकि इसका सफेद-ग्रे वर्जीनिया फ्रीस्टोन आस-पास की इमारतों की लाल ईंट के साथ आश्चर्यजनक रूप से अलग था.

फिलाडेल्फिया की जगह वाशिंगटन बनी राजधानी
वाशिंगटन शहर को फिलाडेल्फिया की जगह देश की राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया था.  क्योंकि यह भौगोलिक रूप से  मौजूदा नए गणराज्य के केंद्र में स्थिति में था. मैरीलैंड और वर्जीनिया राज्यों ने कोलंबिया जिले के निर्माण के लिए पोटोमैक नदी के आसपास की भूमि को छोड़ दिया और 1791 में वाशिंगटन पर काम शुरू हुआ.

जॉर्ज वाशिंगटन ने खुद किया था साइट का चयन
फ्रांसीसी वास्तुकार पियरे चार्ल्स एल'एनफैंट ने दर्जनों सर्किल, क्रॉसक्रॉस एवेन्यू और भरपूर पार्कों से भरे क्षेत्र का लेआउट को डिजाइन किया. 1792 में, गुलाम और मुक्त अफ्रीकी अमेरिकियों और यूरोपीय प्रवासियों से बनी निर्माण टीम ने 1600 पेंसिल्वेनिया एवेन्यू में व्हाइट हाउस की इमारत पर काम शुरू किया. आयरिश अमेरिकी वास्तुकार जेम्स होबन ने डिजाइन की देखरेख की और राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने साइट का चयन किया.

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व्हाइट हाउस में रहने वाले पहले राष्ट्रपति थे जॉन एडम्स 
व्हाइट हाउस बनकर तैयार हो जाने के बाद  1 नवंबर 1800 को राष्ट्रपति जॉन एडम्स का कार्यकारी भवन में स्वागत किया गया. उनकी पत्नी, अबीगैल ने अपने नए घर के बारे में लिखा- "मैं स्वर्ग से प्रार्थना करती हूं कि वह इस घर पर और इसके बाद इसमें रहने वाले सभी लोगों पर सबसे अच्छा आशीर्वाद बरसाए. इस छत के नीचे केवल बुद्धिमान लोग ही शासन करें."

जब व्हाइट हाउस में लगा दी गई आग
1812 के युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों द्वारा कनाडा में सरकारी इमारतों को जला दिया गया था. इसी  के प्रतिशोध में 1814 में ब्रिटिश सैनिकों ने यूएस कैपिटल के साथ व्हाइट हाउस को भी आग लगा दी थी. जली हुई इमारत को बाद में जेम्स होबन के निर्देशन में फिर से बनाया गया और बड़ा किया गया. इन्होंने मुख्य इमारत में पूर्व और पश्चिम की छतों के साथ-साथ एक अर्धवृत्ताकार दक्षिण पोर्टिको और एक स्तंभयुक्त उत्तरी पोर्टिको भी जोड़ा.धुएं से सने पत्थर की दीवारों को सफ़ेद रंग से रंगा गया था. व्हाइट हाउस पर काम 1820 के दशक में पूरा हुआ था.

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राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के प्रशासन के दौरान प्रमुख जीर्णोद्धार हुआ . ट्रूमैन कई वर्षों तक ब्लेयर हाउस में सड़क के उस पार रहे. 1995 से व्हाइट हाउस और लाफायेट स्क्वायर के बीच पेंसिल्वेनिया एवेन्यू को सुरक्षा कारणों से वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है. आज हर साल एक मिलियन से अधिक पर्यटक व्हाइट हाउस देखने आते हैं. यह देश की राजधानी में सबसे पुरानी संघीय इमारत है.

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आज की प्रमुख घटनाएं
13 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1989 में की थी. 
13 अक्टूबर, 1987 को बॉलीवुड के मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार का निधन हो गया था. 
13 अक्टूबर, 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने थे. 
13 अक्टूबर, 1792 को व्हाइट हाउस की नींव रखी गई थी. 
13 अक्टूबर, 1911 को स्वामी विवेकानंद की शिष्या मार्गेरेट एलिज़ाबेथ नोबेल का निधन हो गया था. 
13 अक्टूबर, 1914 को गैरेट मोर्गन ने गैस मास्क की खोज की और उसका पेंटेट कराया. 
13 अक्टूबर, 1948 को सूफ़ी भक्ति संगीत और कव्वाली के प्रसिद्ध गायक नुसरत फ़तेह अली ख़ां का जन्म हुआ था. 
13 अक्टूबर, 1975 को भारतीय अभिनेत्री पल्लवी प्रधान का जन्म हुआ था.

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