
इजरायल की ओर से हिज्बुल्लाह पर किए जा रहे लगातार हमलों के बीच अब हूती विद्रोही चर्चा में आ गए हैं. दरअसल, अब यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों पर भी इजरायल ने अटैक कर दिया है और जमकर बमबारी की है. बताया जा रहा है कि हिज्बुल्लाह को बड़ा नुकसान पहुंचाने के बाद इजरायल हूती विद्रोहियों के खात्मे की तैयारी कर रहा है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये हूती विद्रोही कौन हैं, यमन में इनका कितना प्रभाव है और इजरायल की इससे क्या दुश्मनी है?
क्या है अपडेट?
हिज्बुल्लाह पर एक्शन के बाद अब इजरायल ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने यमन के बंदरगाह शहर होदेइदाह में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर दर्जनों हमले किए हैं. बताया जा रहा है कि आईडीएफ ने बिजली संयंत्रों और एक बंदरगाह पर हमला किया, जिसका इस्तेमाल तेल आयात करने के लिए किया जाता है.
कौन हैं हूती विद्रोही?
अब बात करते हैं आखिर ये हैं कौन... ये भी हिज्बुल्लाह की तरह एक हथियारबंद समूह है, जिसे शिया जैदी समुदाय के लोगों का ग्रुप कहा जाता है. इसकी शुरुआत 1990 से मानी जाती है, जब उन्होंने खुद का यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए समूह के रुप में गठन किया था. अगर हूती नाम के बात करें तो ये इस अभियान के संस्थापक हुसैल अल हूती के नाम से है. इन एजेंडा भी इस्लाम को बढ़ावा देना और यहूदियों को खत्म करना है.
हूती विद्रोहियों को यमन में इतना प्रभाव है कि वो कई जगहों पर टैक्स वसूलते हैं और यहां तक कि इसकी अपनी करेंसी भी है. कहा जाता है कि इनके 1 लाख से ज्यादा समर्थक हैं और इनके पास बड़ी संख्या में हथियारबंद लड़ाके हैं और खास ट्रेनिंग लिए हुए लोग भी हैं. हथियार के मामले में काफी बैकअप होने की वजह से ही वे दुनिया के पावरफुल देशों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रे हैं.
आपको याद होगा कि पिछले साल के अंत में हूती विद्रोहियों ने अलग-अलग देशों के करीब 27 मालवाहक जहाजों को ड्रोन और रॉकेट हमलों से निशाना बनाया था, जिसमें भारत भी शामिल था. इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन, यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए थे.
कैसे यमन पर बढ़ा इनका कब्जा?
यमन में 2014 की शुरुआत में हूती राजनीतिक रूप से काफी मजबूत हो गए और सादा प्रांत पर नियंत्रण हासिल कर लिया. साल 2015 की शुरुआत में उन्होंने राजधानी सना पर भी कब्जा कर लिया. धीरे-धीरे हूती विद्रोहियों का यमन के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण हो गया. हिज्बुल्लाह की तरह हूती विद्रोहियों को भी ईरान का ही सपोर्ट है. अली अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ आंदोलन चलाने के साथ ही हूती विद्रोही मजबूत होने लगे थे. उनका प्रभाव इतना बढ़ गया था कि ऐसे में राष्ट्रपति हादी यमन छोड़कर विदेश भाग गए. इससे उनका कई जगहों पर कब्जा हो गया.
क्यों इजरायल ने किया हमला?
वैसे ऐसा पहली बार नहीं है कि इजरायल ने हूती विद्रोहियों पर हमला किया हो. इससे पहले भी ऐसा हो चुका है और इजरायल समेत कई देश भी उस पर अटैक कर चुके हैं. दरअसल, हूती विद्रोही भी उसी भीड़ का हिस्सा है, जिसमें हमास, हिज्बुल्लाह आदि शामिल है. ये भी हमास और हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर इजरायल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान के नेतृत्व वाले गिरोह में शामिल हैं.
साथ ही यहूदी विरोधी होने की वजह से भी इजरायल हमलावर है. साथ ही जब जहाजों पर अटैक हुआ था, उस वक्त इजरायल के जहाज को भी निशाना बनाया गया था.