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मोसाद का वो एजेंट... जो दूसरे देश में घुसा, बसा और बस राष्ट्रपति बनने ही वाला था

Mossad Agent Eli Cohen Story: ये तो सुना होगा कि मोसाद दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियों में से एक है. तो जानते हैं इस बात को सच सही साबित करने वाला एक उदाहरण...

एली कोहेन पर ही फिल्म द स्पाई बनी है. एली कोहेन पर ही फिल्म द स्पाई बनी है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

पेजर अटैक के बाद सबसे ज्यादा जो नाम सुनने को मिल रहा है वो है मोसाद. मोसाद के बारे में आपने सुना होगा कि मोसाद के एजेंट्स जासूसी में काफी माहिर होते हैं. इस बात को काफी हद सच साबित करती है मोसाद के एक जासूस की कहानी. जासूसी के मामले में ये एजेंट इतना शातिर था कि ये एक देश में घुसा, वहां बस गया और अपना इतना रुतबा बना लिया कि एक वक्त बाद उसका नाम राष्ट्रपति पद की रेस में आने लगा. खास बात ये है कि कई सालों में किसी को उस एजेंट पर शक नहीं हुआ. लेकिन,जब इसका सच्चाई सामने आई तो जासूस को काफी खौफनाक सजा भी मिली. 

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तो पढ़ते हैं इस एजेंट की कहानी...

हम जिस जासूस की बात कर रहे हैं, उसका नाम है कि एली कोहेन. एली कोहेन ही वो एजेंट हैं, जिन्हें इजरायल और सीरिया की 1967 की जंग में इजरायल की जीत का श्रेय दिया जाता है. ये लड़ाई सिर्फ 6 दिन चली थी और 6 दिन में ही इजरायल ने सीरिया को हराकर गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया था. ये वो पहाड़ी इलाका था, जहां सीरिया की सेना का कब्जा था. लेकिन, इस जासूस की वजह से इजरायल ने जल्द ही इस जंग को जीत लिया. 

एली कोहेन मिस्र में पैदा हुए थे और यहूदी थे. साल 1957 में वे इजरायल की डिफेंस फोर्स में शामिल हो गए और यहां वे मिलिट्री इंटेलिजेंस में थे. वे यहां से मोसाद में जाना चाहते थे, लेकिन दो बार रिजेक्ट हो गए. लेकिन, लंबे प्रयास के बाद उन्हें मोसाद के साथ काम करने का मौका मिला. फिर कोहेन को सीरिया से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम करने को मिला. वे सीरिया में एक बिजनेसमैन के रुप में एंट्री पाना चाहते थे और इससे पहले वो अर्जेंटीना गए. वहां उन्होंने बिजनेस किया और सीरियाई बिजनेसमैन के रुप में अपनी खास पहचान बना ली. धीरे-धीरे उन्होंने सीरिया के बड़े-बड़े लोगों से अपनी पहचान बना ली.

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राष्ट्रपति पद के लिए भी उछला नाम

उन्होंने अपना इतना प्रभाव बढ़ा लिया कि उनकी दोस्ती अमान अल हाफिज से हुई और वो सीरिया के राष्ट्रपति बने. कहा जाता है कि कोहेन ने हाफिज के साथ इतनी अच्छी दोस्ती बना ली कि उन्होंने कोहेन के लिए रक्षा मंत्री का पद देने की मांग कर दी थी. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सीरिया का राष्ट्रपति बनने के लिए एली कोहेन से बेहतर कोई ऑप्शन ही नहीं है. वे सीरिया के आर्मी से जुड़े मामलों में एक्टिव रहने लगे. उनका सरकार को भी काफी फंड जाता था और वे आलीशन घर में बड़े बिजनेस टाइकून के रुप में वहां पहचान छुपाए काम कर रहे थे. 

गोलन हाइट्स की जंग में किया ये काम

गोलन हाइट्स की लेकर हो रही जंग में सीरिया ये इजरायल को पानी देने से रोकने वाला था. मगर कोहेन को ये बात पहले से पता थी और उन्होंने इजरायल में पहले ही सीरिया का प्लान बता दिया.वे सीरिया की पूरी जानकारी इजरायल पहुंचाते रहे. यहां तक कि उन्होंने अपने अच्छे रिलेशन से वहां तक एंट्री पा ली, जहां सैनिक अपने हथियार रखते थे और कैसे फायरिंग करते थे. ऐसे जंग में इजरायल कामयाब रहा. 

सरेआम दी गई फांसी

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लेकिन, एक वक्त आया जब एली कोहेन को रेडियो ट्रांसमिशन लाइंस का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया. 1965 में जब एली कोहेन पकड़े गए तो उसके बाद उन्हें फांसी की सजा देने का फैसला किया गया. इसके बाद उन्हें  18 मई, 1965 में सरेआम फांसी दे दी गई.
 

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