
All You Need to Know about Patwari or Lekhpal: मध्य प्रदेश में हुई पटवारी भर्ती परीक्षा में धांधली इन दिनों काफी चर्चा में है. हाल ही में पटवारी भर्ती परीक्षा के परिणाम की घोषणा के बाद आरोप लगाया जा रहा है है कि इस परीक्षा में ज्यादातर वो टॉपर हैं, जिन्होंने ग्वालियर के एक एग्जाम सेंटर पर परीक्षा दी थी. एमपी पटवारी भर्ती में घोटाले का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने बीजेपी सरकार को घेरा है, वार-पलटवार का सिलसिला जारी है. राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ ने इसपर कहा कि प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. इस बीच परीक्षा की छठी रैंक पाने वाली टॉपर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें एक लड़की खुद को मधुलता बताते हुए कह रही है कि उन्होंने और उनके परिवार ने सेलेक्शन के लिए 15 लाख रुपये दिए थे.
वहीं वीडियो वायरल होने के बाद अब यह लड़की कह रही है कि उसने यह वीडियो दोस्तों के साथ हंसी-मजाक में बनाया था. लड़की ने कहा कि उसका नाम मधुलता नहीं है और उसकी उम्र भी बहुत कम है. लड़की ने वायरल हुए अपने उस वीडियो को वायरल नहीं करने का भी अनुरोध किया. आइए जानते हैं जिस पटवारी पद के लिए कही गई थी '15 लाख की रिश्वत' की बात क्या है उसकी ताकत और जिम्मेदारियां?
पटवारी कौन होता है?
पटवारी (Patwari) सरकार में एक प्रशासनिक पद हैं, जो भारत में भूमि और राजस्व के प्रशासन और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. आसान शब्दों में कहा जाए तो एक पटवारी एक गांव का अकाउंटेंट होता है जो एक गांव या गांवों के समूह में भूलेख (Land Record) यानी जमीन का रिकॉर्ड बनाने और अपडेट करने के लिए जिम्मेदार होता है. उत्तर प्रदेश में पटवारी को 'लेखपाल' के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में पटवारी को 'तलती' भी कहा जाता है. बॉम्बे प्रेसीडेंसी, 1882 के गजेटियर के अनुसार, तलती पर आठ से दस गांवों की जिम्मेदारी होती है.
कब और कैसे शुरू हुई पटवारी व्यवस्था?
भारत में पटवारी व्यवस्था मुगलकाल से चली आ रही है. मुगल बादशाह शेर शाह सूरी ने इसकी शुरुआत की थी, जिसे बाद में अकबर के शासन में इसे आगे बढ़ाया गया. इसके बाद ब्रिटिश राज में भी इस व्यवस्था को कंटिन्यू किया गया. 1814 में सरकार ने पटवारियों की नियुक्ति का कानून पारित किया. गांव की जमीन का रिकॉर्ड रखने, रखरखाव और निगरानी के लिए तहसीलों में सरकारी कर्मचारी के रूप में पटवारी पदों पर भर्ती की जाने लगी.
पटवारी का क्या काम होता है?
एक पटवारी गांवों के भू-राजस्व के संग्रह करना, भूमि अभिलेखों के रखरखाव और उन्हें नियमित रूप से अपडेट करने के लिए जिम्मेदार होता है. इसके अलावा वे जमीन के विवाद भी सुलझाते हैं, जमीन मापते हैं और फसल की पैदावार का रिकॉर्ड रखते हैं. वे संबंधित क्षेत्रों के जमीन के नक्शों को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं कि सभी भूमि लेनदेन सही ढंग से दर्ज किए गए हैं. लैंड रिकॉर्ड तैयार करने और अपडेट करने के साथ-साथ भूमि संबंधी दस्तावेज जारी करने और भूस्वामियों से राजस्व एकत्र करने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. वे ग्राम-स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के प्रशासन में भी भूमिका निभाते हैं.
पटवारी कैसे बन सकते हैं?
आमतौर पर पटवारी पद पर सरकारी नौकरी पाने के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (10+2) होना जरूरी है, लेकिन कुछ राज्यों में शैक्षणिक योग्यता बैचलर डिग्री कर दी गई है. हालांकि कुछ राज्यों में 10वीं पास भी इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं. वहीं आवेदकों की आयु सीमा 18 से 40 वर्ष तक मांगी जाती है. इसके अलावा आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा छूट भी दी जाती है. इसके अलावा, कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान और हिंदी टाइपिंग के साथ कंप्यूटर प्रवीणता प्रमाणन परीक्षा (CPCT) का स्कोरकार्ड भी मांगा जाता है. योग्य आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है. परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है और इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होता है.
पटवारी को कितनी मिलती है सैलरी?
पटवारी पद नियुक्ति होने के बाद शुरुआत में 7वें वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मूल वेतन 5,200- 20,200 रुपये और ग्रेड-पे 2100 रुपये होता है. इन हैंड सैलरी 20800 रुपये प्रति माह मिलती है. हालांकि पटवारी का वेतन राज्य में अलग-अलग हो सकता है. सैलरी के साथ एक पटवारी को कई सरकारी भत्तों जैसे महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, शिक्षा भत्ता, मेडिकल भत्ता, यात्रा भत्ता और अवकाश यात्रा भत्ता का लाभ भी मिलता है.