
प्रयागराज महाकुम्भ में श्रद्धालु संगम के साफ और स्वच्छ जल में डुबकी लगा सकें, इसके लिए हर रोज त्रिवेणी से कई टन कचरा निकाला जा रहा है. संगम से गंदगी साफ करने के लिए ट्रैश स्कीमर मशीनें लगाई गईं हैं. ये मशीनें हर दिन 10 से 15 टन कचरा नदी से निकाल कर इसके पानी को निर्मल बना रही है.
ट्रैश स्कीमर मशीन से नदी की सफाई का वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि कैसे मिनटों में कई स्क्वायर मीटर में नदी से सारे कचरे और खर-पतवार को छानकर मशीन किनारे पर लाकर फेंक दे रही है. इसके बाद नदी का पानी एकदम से साफ दिखाई देने लगता है, जिसमें आराम से कोई भी डुबकी लगा सकता है.
क्या है ट्रैश स्कीमर मशीन?
ट्रैश स्कीमर की मदद से पानी की सतह पर तैर रहे कचरे को इकट्ठा किया जाता है. इस मशीन का इस्तेमाल नदियों, बंदरगाहों, और समुद्रों में कचरा साफ करने के लिए होता है. यह मशीन प्लास्टिक, बोतलें, पूजा-पाठ के बाद बचे अवशेष , कपड़े, धातु की वस्तुएं,मृत पशु और पक्षी आदि को एकत्र करती है. यह पानी से खरपतवार (जलकुंभी) को हटाने में भी सहायक है.
किस तरह काम करती है ट्रैश स्कीमर?
मशीन के दोनों ओर गेट होते हैं, इनके अंदर कन्वेयर बेल्ट लगी होती है. गेट से गंदगी और कचरे फंसाने के बाद इसे हाइड्रोलिक की मदद से बंद कर दिया जाता है. फिर कचरे को एकत्र करने के बाद इसे कन्वेयर बेल्ट पर ट्रांसफर किया जाता है. इसके बाद वहां से कचरे को किनारे पर जाकर डंप कर दिया जाता है.
महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है. इसलिए इसकी तैयारी करीब 4 साल पहले ही शुरू कर दी गई थी. संगम में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को साफ और स्वच्छ जल मिले, इसके लिए एक ट्रैश स्कीमर मशीन लगाई गई थी. तब यह मशीन 50-60 क्विंटल कचरा हर दिन निकालती थी.
मशीन की क्षमता 13 क्यूबिक मीटर
दोनों नदियों में सफाई कर रही मशीन की क्षमता 13 क्यूबिक मीटर है. ये मशीनें चार किमी का एरिया नदी में कवर करती हैं. यानी संगम क्षेत्र से लेकर बोट क्लब सहित अन्य दूरी तक सफाई करती हैं. इन मशीनों की मदद से गंगा के साथ ही यमुना को भी साफ किया जा रहा है. महाकुम्भ शुरू होने के बाद मशीन से कचरा एकत्र करने में 20 गुना तक बढ़ोतरी हुई है. ये मशीन सतह पर तैरने वाले फूल-माला, दोना-पत्तल, अगरबत्ती- धूपबत्ती के रैपर, प्लास्टिक, नारियल, कपड़े आदि को निकाल लेती है.
अभी इतने श्रद्धालुओं के नदी में डुबकी लगाने से नदी का पानी को तेजी से और ज्यादा से ज्यादा साफ करने की जरूरत पड़ी तो ज्यादा मशीनों को साफ-सफाई के लिए लगाया गया. अब दो मशीनों से संगम की सफाई हो रही है. इसके बाद नदियों की सफाई की रफ्तार भी दोगुनी हो गई.