
9 अक्टूबर, 1967 को गुरिल्ला नेता चे ग्वेरा की 39 साल की उम्र में मौत हो गई थी. इन्हें बोलिवियाई सेना ने मार गिराया था. कहा जाता है कि बोलिवियाई बलों ने 8 अक्टूबर को बोलिविया में गुरिल्ला युद्ध में लड़ते हुए ग्वेरा को पकड़ लिया और अगले दिन उन्हें मार डाला. मौत के सबूत के तौर पर उनके हाथ काट दिए गए और उसके शरीर को एक अज्ञात कब्र में दफना दिया गया. 1997 में ग्वेरा के अवशेष पाए गए और उन्हें वापस क्यूबा भेज दिया गया, जहां उन्हें राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो और हजारों क्यूबावासियों की मौजूदगी में एक समारोह में फिर से दफनाया गया.
अर्नेस्टो राफेल ग्वेरा डे ला सेरना का जन्म 1928 में अर्जेंटीना के एक संपन्न परिवार में हुआ था. ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय में चिकित्सा की पढ़ाई के दौरान, उन्होंने मोटरसाइकिल पर दक्षिण अमेरिका की यात्रा की. इस दौरान उन्होंने गरीबी और उत्पीड़न को देखा. उन्होंने 1953 में मेडिकल की डिग्री हासिल की और वामपंथी संगठनों से जुड़ गए.
क्यूबा संघर्ष में फिदेल कास्त्रो को की थी मदद
1950 के दशक के मध्य में, ग्वेरा की मुलाकात फिदेल कास्त्रो और मैक्सिको में निर्वासित क्रांतिकारियों के उनके समूह से हुई. ग्वेरा ने 1959 में क्यूबा के तानाशाह फुलगेन्सियो बतिस्ता से कास्त्रो की सत्ता छीनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ग्वेरा ने अप्रैल 1965 में क्यूबा सरकार के अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
आखिरी बार बोलिविया में दिखे थे चे ग्वेरा
कहा जाता है कि कुछ समय बाद वह बोलिविया में दिखाई दिये. मार्क्सवादी क्रांतिकारी वहां चे ग्वेरा के नेतृत्व में बोलिवियाई गुरिल्ला बल बोलिवियाई सेना की एक विशेष टुकड़ी के साथ झड़प में पराजित हो गई थी. ग्वेरा घायल हो गए थे और उन्हें पकड़ा लिया गया और अगले दिन उन्हें मार दिया गया था.
यह भी पढ़ें: 8 अक्टूबर: इनकी वजह से भारत का आसमान है सुरक्षित, आज के दिन हुई थी भारतीय वायुसेना की स्थापना
काफी पॉपुलर हुई ग्वेरा की तस्वीर
ग्वेरा ने मौत के बाद साम्राज्यवाद-विरोधी और क्रांति के प्रतीक के रूप में दुनिया भर के लोगों के बीच नायक का दर्जा हासिल किया. ग्वेरा की बेरेट में अल्बर्टो कोर्डा द्वारा ली गई 1960 की एक तस्वीर काफी पॉपुलर हो गई और तब से अनगिनत पोस्टर और टी-शर्ट पर दिखाई दी है. हालांकि, हर कोई ग्वेरा को नायक नहीं मानता.
यह भी पढ़ें: 7 अक्टूबर: आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा एक्शन, जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर किया था हमला
प्रमुख घटनाएं
9 अक्टूबर को हुई कुछ खास घटनाएं और उनके बारे में जानकारीः
9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है. 1874 में स्विट्ज़रलैंड के बर्न में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना हुई थी और 1969 में टोक्यो में इसकी वर्षगांठ को विश्व डाक दिवस के रूप में घोषित किया गया था.
9 अक्टूबर, 1967 को चे ग्वेरा को पकड़कर मार डाला गया था. चे ग्वेरा, क्रांति का संदेश फैलाने के लिए अफ़्रीका और दक्षिणी अमेरिका गए थे.
9 अक्टूबर, 2012 को नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई को तालिबानी चरमपंथियों ने गोली मारी थी. मलाला अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए लगातार आवाज़ उठाती रही थीं.
9 अक्टूबर, 1945 को सरोद वादक अमजद अली खान का जन्म हुआ था. अमजद अली खान, ग्वालियर के संगीत के 'सेनिया बंगश' घराने की छठी पीढ़ी से थे.