
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने ब्रिटेन दौरे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भारत में डेमोक्रेटिक कॉम्पटिशन का तरीका पूरी तरह से बदल गया है. इसका कारण RSS नामक एक संगठन है. राहुल गांधी ने आरएसएस को कट्टरपंथी और फासीवादी संगठन बताते हुए इसकी तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की. आइए जानते हैं कि आखिर सुन्नी इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है. क्यों मुस्लिम ब्रदरहुड को कई देश आतंकी संगठन भी मानते हैं.
मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे पुराना और सबसे बड़ा इस्लामी संगठन है. इसे इख्वान अल- मुस्लमीन के नाम से भी जाना जाता है. इसकी स्थापना 1928 में हसन अल-बन्ना ने की थी. मुस्लिम ब्रदरहुड का एक मुख्य मकसद है कि देश का शासन इस्लामी कानून यानी शरिया के आधार पर चलाना है. अरब देशों में सक्रिय इस संगठन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगता रहा है.
यही नहीं अल कायदा को मुस्लिम ब्रदरहुड का आतंकी चेहरा माना जाता रहा है. समय समय पर दोनों के लिंक सामने आते रहे हैं. आतंकी संगठन अल कायदा के पूर्व प्रमुख और 9/11 अमेरिकी हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन भी पहले मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य हुआ करता था.
राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को बेदखल करने में महत्वपूर्ण भूमिका
आपको बता दें कि स्थापना के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन ने कई देशों में में इस्लामी आंदोलनों को काफी प्रभावित किया और मध्य पूर्व के कई देशों में इसके सदस्य रहे हैं. शुरुआती दौर में इस आंदोलन का मकसद इस्लाम के नैतिक मूल्यों और अच्छे कामों का प्रचार प्रसार करना था, लेकिन जल्द ही मुस्लिम ब्रदरहुड राजनीति में शामिल हो गया
मिस्र में इस संगठन को अवैध करार दिया जा चुका है. मुस्लिम ब्रदरहुड को सबसे बड़ी सफलता भी इसी देश में मिली. संगठन ने कई दशक तक सत्ता पर काबिज रहे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को बेदखल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जनांदोलनों की वजह से फरवरी 2011 में होस्नी मुबारक को सत्ता से हटना पड़ा था. उस आंदोलन में मुस्लिम ब्रदरहुड की ओर मोहम्मद मुरसी विरोध का चेहरा बने थे.
इस्लाम ही समाधान है, चर्चित नारा
साल 1940 में ही इस संगठन की संख्या 20 लाख तक पहुंच गई थी. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार यही वजह है कि संगठन के संस्थापक बन्ना ने एक हथियार बंद दस्ते का भी गठन किया जिसका मकसद ब्रिटिश शासन के खिलाफ बमबारी और हत्याओं को अंजाम देना था. मुस्लिम ब्रदरहुड का सबसे चर्चित नारा है, "Islam is the Solution" (“इस्लाम ही समाधान है”)
1954 में मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासर की हत्या के असफल प्रयास के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित कर दिया गया. इसके बाद संगठन के सदस्यों को अंडरग्राउंड होना पड़ा. मुस्लिम ब्रदरहुड ने मिस्र की राजनीति में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है. 1980 में इस संगठन ने राजनीति में वापसी की कोशिश की. कई बार दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन किया, वहीं 2000 में 17 सीट जीतकर वह मिस्र की प्रमुख विपक्षी पार्टी बन गई. इसके बाद उस समय के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने मुस्लिम ब्रदरहुड को खत्म करने की काफी कोशिश की. हालांकि उनका यह दांव उल्टा पड़ गया और आखिरकार आंदोलन के बाद 2011 में उन्हें 30 साल की सत्ता से हटना पड़ा.
मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के सर्वोच्च नेता मोहम्मद बदी को आरोपों के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी. वहीं होस्नी मुबारक के हटने पर मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मुर्सी राष्ट्रपति चुने गए लेकिन 2013 में मिस्र की सेना ने बगावत कर दी और मुर्सी को सत्ता से बेदखल करके जेल में डाल दिया. इसके बाद मुस्लिम ब्रदरहुड पर कई पाबंदियां लगाई गई.
मुस्लिम ब्रदरहुड का इस्लामी देशों में भी है प्रभाव
मिस्र के अलावा दूसरे इस्लामी देशों में भी मुस्लिम ब्रदरहुड का काफी प्रभाव है. 2011 के अंत में ट्यूनीशिया के एननाहादा पार्टी (मुस्लिम ब्रदरहुड द्वारा प्रेरित एक इस्लामी पार्टी) ने राष्ट्रपति ज़ैनुल अबिदीन बिन अली को उखाड़ फेंकने के बाद देश में होने वाले पहले संसदीय चुनाव जीता था.
बहरीन, मिस्र, रूस, सऊदी अरब, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन मानते हैं. इसके बावजूद कई इस्लामी देशों में मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी पार्टिया राजनीति में हैं. वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका भी मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित कर सकता है. जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी इस्लामिक ऐक्शन फ्रंट (आईएएफ) के नाम से मौजूद थी लेकिन 2013 में (आईएएफ) ने एमबी से अपना नाता तोड़ लिया.