
विंटर वॉर (शीतकालीन युद्ध) इतिहास में महत्वपूर्ण सैन्य संघर्ष है, जो 30 नवंबर 1939 से 13 मार्च 1940 तक फिनलैंड और सोवियत संघ के बीच लड़ा गया. इस युद्ध ने छोटे और संसाधन-सीमित राष्ट्रों के धैर्य और कुशल रणनीति की अनोखी मिसाल पेश की. यह युद्ध 105 दिनों तक चला था. फिनलैंड जैसा छोटा देश रूस के सामने मजबूती से टिका रहा.
इस युद्ध की जड़ें सोवियत संघ की विस्तारवादी नीतियों से जुड़ी थीं. सोवियत संघ ने फिनलैंड से अपनी सीमा के पास के क्षेत्रों की मांग की थी, जिससे वह लेनिनग्राद (आज का सेंट पीटर्सबर्ग) को सुरक्षित रख सके. स्टालिन ने मांग की कि फिनलैंड की रूस के साथ सीमा को करेलियन इस्थमस के साथ 16 मील पीछे ले जाया जाए, ताकि लेनिनग्राद शहर के चारों ओर एक बफर जोन बनाया जा सके.
सोवियत रूस ने फिनलैंड से मांगा था बफर जोन
वह यह भी चाहते थे कि फिनलैंड फिनलैंड की खाड़ी में कई द्वीपों को सौंप दे और नौसैनिक अड्डे के निर्माण के लिए हान्को प्रायद्वीप पर सोवियत क्षेत्र को पट्टे पर दे दे. सोवियत संघ ने सौदे के तहत रूस के बड़े भूभाग की पेशकश की, लेकिन फिनलैंड को उनके इरादों पर संदेह था और उन्होंने इसे ठुकरा दिया. 30 नवंबर, 1939 को, कई अल्टीमेटम और असफल वार्ताओं के बाद, सोवियत लाल सेना ने पांच लाख सैनिकों के साथ फिनलैंड पर आक्रमण कर दिया.
मोलोटोव कॉकटेल का नाम आया था सुर्खियों में
यही युद्ध बाद में 'विंटर वॉर' के नाम से जाना गया. इस युद्ध के दौरान फिनिश सैनिकों ने 'मोलोटोव कॉकटेल' (घरेलू बम) का प्रभावी उपयोग किया, जो बाद में प्रसिद्ध हो गया. फिनलैंड ने युद्ध में अपनी सैन्य कमजोरी के बावजूद अपने परिचित भूगोल और गोरिल्ला युद्धनीति का कुशल उपयोग किया.
छोटे से देश ने दिखाई गजब की बहादुरी
फिनलैंड की सेनाओं ने अपने छोटे लेकिन ऊर्जावान सैनिकों और स्की ट्रूप्स की मदद से सोवियत सेना को भारी नुकसान पहुंचाया. फिनलैंड की रक्षात्मक सीमा ने सोवियत सेनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह युद्ध फिनलैंड के साहस और सामरिक कौशल का प्रतीक बन गया. फिनलैंड के संघर्ष ने पश्चिमी देशों, विशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांस, का ध्यान आकर्षित किया.इस युद्ध ने दिखाया कि बड़ी सैन्य शक्ति के सामने छोटी लेकिन संगठित सेना किस तरह टिक सकती है.
ऐसे हुआ युद्ध का अंत
हालांकि 1939-1940 की सर्दियों के दौरान फिन्स ने जोरदार प्रतिरोध किया, लेकिन अंततः उनकी सेना लाल सेना की विशालता के सामने कोई मुकाबला नहीं कर पाई. फरवरी 1940 में, प्रथम विश्व युद्ध के बाद से सबसे बड़ी तोपखाने की बमबारी के बाद, सोवियत ने अपने हमले को फिर से शुरू किया और करेलियन इस्थमस पर फिनिश रक्षा को ध्वस्त कर दिया.अपनी सेना के पास गोला-बारूद की कमी और थकावट के कगार पर होने के कारण, फ़िनलैंड ने अगले महीने शांति शर्तों पर सहमति जताई.
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रूस को सौंपना पड़ा अपना 11% हिस्सा
13 मार्च 1940 को मॉस्को शांति संधि पर हस्ताक्षर के साथ यह युद्ध समाप्त हो गया. फिनलैंड ने अपनी संप्रभुता बचाए रखी, लेकिन कुछ क्षेत्रों को सोवियत संघ को सौंपने पर मजबूर हुआ. इस संधि के तहत, फिनलैंड को अपनी भूमि का लगभग 11% हिस्सा (करेलियन इस्तमस और लाडोगा झील के पास के क्षेत्र) सोवियत संघ को देना पड़ा.
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प्रमुख घटनाएं
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