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एजुकेशन न्यूज़

महाराष्ट्र: ऊंची पहाड़ियों पर सांप-तेंदुए के खतरे के बीच बच्चे कर रहे ऑनलाइन स्टडी, Photos

पंकज खेळकर
  • 09 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST
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प्राचीन काल में ऋषि-मुनि पहाड़ों पर जाकर तपस्या किया करते थे. ऐसी ही तपस्या इन दिनों महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को करनी पड़ रही है. वजह है कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई की बाध्यता और उनके इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की पकड़ न होना. मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से राज्य के आधे से अधिक छात्र मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में. कोरोना वायरस की दस्तक के बाद मार्च के मध्य में देश भर में स्कूल बंद हुए और ऑनलाइन पढ़ाई का सिलसिला शुरू हुआ. महाराष्ट्र में भी शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अप्रैल 2020 में नोटिफिकेशन जारी हुआ था. 

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शहरी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क मजबूत होने की वजह से छात्रों को अधिक दिक्कत पेश नहीं आई. लेकिन कोंकण जैसे क्षेत्रों में मोबाइल रेंज नहीं होने की वजह से छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए पहाड़ियों पर जाना पड़ रहा है. छात्र-छात्राओं को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, आइए आपको इसके लिए कोंकण इलाके के रत्नागिरी जिले की एक तस्वीर दिखाते हैं. यहां दापोली तहसील में पांच छोटी नदियां बहती हैं. इसी पर यहां एक गांव का नाम पंचनदी गांव है. पंचनदी गांव में यशवंत रामचंद्र कूटरेकर माध्यमिक प्राइवेट स्कूल में 38 छात्र-छात्राएं दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं. कोर्स पूरा करने के लिए सभी के साथ ऑनलाइन क्लासरूम से जुड़ कर पढ़ाई करना मजबूरी है. धीरज पाटे, साहिल पाटे और अंकिता कुटरेकर भी इन विद्यार्थियों में शामिल हैं. इस साल 7 अप्रैल से इनके लिए एक सिलसिला शुरू हुआ, वो है सुबह पौने आठ बजे घरों से निकलना और पहाड़ी की चोटी पर पहुंचना जहां, मोबाइल की रंज मिलती है.  

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पंचनदी गांव जिस रत्नागिरी जिले में है वहां सहयाद्री पहाड़ियां हैं. यहां घने जंगल भी स्थित हैं. लॉकडाउन के दौरान मुंबई में आईटी सेक्टर में नौकरी करने वाले कुछ स्थानीय लोग वापस लौटे तो उन्हें मोबाइल नेटवर्क की जरूरत महसूस हुई. नेटवर्क ढूंढते ढूंढते ये एक पहाड़ी पर पहुंचे. लॉकडाउन में इन लोगों को काफी दिन तक वहीं रुकना था तो इन्होंने पहाड़ी पर धूप बरसात से बचने के लिए एक टिन शेड डाल लिया, जिससे वहां मोबाइल नेटवर्क से इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सके. अब उसी टिन शेड का इस्तेमाल धीरज पाटे, साहिल पाटे और अंकिता कुटरेकर अपनी ऑनलाइन क्लासरूम की पढ़ाई के लिए दोपहर 12 बजे तक करते हैं. धीरज पाटे ने आजतक को बताया कि ‘’इस टिन शेड में पढ़ाई करने के अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं है. मुश्किलें बहुत हैं, जिस टिन शेड में पढ़ते हैं, वहां दो बार जहरीला सांप देखा गया. एक बार तो सांप शेड की छत से स्कूल बैग पर ही आ गिरा. गनीमत है कि सांप ने किसी बच्चे को डसा नहीं.’’ 

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कोंकण इलाके में इस साल बहुत ज्यादा बारिश हुई. एक बार मूसलाधार बारिश से पानी का तेज बहाव टिन शेड में भी आ गया. उस दिन इन तीनों विद्यार्थियों को खड़े रह कर ही अपना कोर्स पूरा करना पड़ा. धीरज ने ये भी बताया कि टिन शेड से कुछ दूरी पर जंगल में एक बार तेंदुआ भी देखा गया जो सौभाग्य से वन विभाग के लगाए जंगले में फंस गया. जब बच्चे पहाड़ी पर पढ़ने जाते हैं तो उनके परिवार वालों को भी हर दम उनकी फिक्र सताती रहती है. यही हाल इलाके में दसवीं में पढ़ने वाले बाकी छात्र-छात्राओं का भी है. ये तीन या चार बच्चों के ग्रुप बनाकर इसी तरह अपने घरों के आसपास की पहाड़ियों, ऊंची छतों या पेड़ों पर मोबाइल रेंज ढूंढ ढूंढ कर पढ़ाई में लगे हैं. ऐसी ही एक छात्रा है- अवंतिका वायंगणकर जो घर की खिड़की से रेंज पकड़कर कोर्स पूरा कर रही है.

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कोंकण इलाके में इस साल बहुत ज्यादा बारिश हुई. एक बार मूसलाधार बारिश से पानी का तेज बहाव टिन शेड में भी आ गया. उस दिन इन तीनों विद्यार्थियों को खड़े रह कर ही अपना कोर्स पूरा करना पड़ा. धीरज ने ये भी बताया कि टिन शेड से कुछ दूरी पर जंगल में एक बार तेंदुआ भी देखा गया जो सौभाग्य से वन विभाग के लगाए जंगले में फंस गया. जब बच्चे पहाड़ी पर पढ़ने जाते हैं तो उनके परिवार वालों को भी हर दम उनकी फिक्र सताती रहती है. यही हाल इलाके में दसवीं में पढ़ने वाले बाकी छात्र-छात्राओं का भी है. ये तीन या चार बच्चों के ग्रुप बनाकर इसी तरह अपने घरों के आसपास की पहाड़ियों, ऊंची छतों या पेड़ों पर मोबाइल रेंज ढूंढ ढूंढ कर पढ़ाई में लगे हैं. ऐसी ही एक छात्रा है- अवंतिका वायंगणकर जो घर की खिड़की से रेंज पकड़ कर कोर्स पूरा कर रही है.

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यहीं दिक्कतें कम नहीं थीं कि जून महीने में कुदरत ने भी अपना रौद्र रूप दिखाया. जून में निसर्ग चक्रवात से हुए नुक्सान की वजह से कोंकण की कुछ तहसीलों में 15 दिन तक बिजली की सप्लाई ठप रही. में कुछ तहसील में पंद्रह दिन तक बिजली नहीं थी. ऐसे में  मोबाइल नेटवर्क बद से बदतर हो गया.  पंचनदी गांव की कुल आबादी 1500 के आसपास है. यहां से कुछ ही दूरी पर दाभोल स्थित है जहां रत्नागिरी पावर स्टेशन स्थित है. इसे अब एनरॉन पावर के नाम से जाता है.

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इस स्टेशन से 1927 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है जो वेस्टर्न ग्रिड को सप्लाई होती है. कोंकण में ये स्टेशन तरक्की की पहचान माना जाता है, लेकिन इसी इलाके में मोबाइल नेटवर्क के मजबूत न होने की वजह से बच्चों को पढ़ाई में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है.  महाराष्ट्र में तक़रीबन 35000 माध्यमिक स्कूल हैं जिनमें 18 लाख छात्र सिर्फ दसवीं कक्षा में पढाई कर रहे है. जूनियर KG से दसवीं तक छात्रों की संख्या लगभग दो करोड़ 83 लाख है. इसके अलावा 11वीं और 12वीं में 12 लाख विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं. माध्यमिक स्कूलों से इतर बात की जाए तो महाराष्ट्र में कुल ढाई लाख स्कूल हैं जिनमें 65 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थी ग्रामीण इलाकों से हैं.

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पंचनदी गांव के यशवंत रामचंद्र कूटरेकर माध्यमिक प्राइवेट स्कूल को राज्य सरकार के शिक्षा विभाग से अनुदान मिलता है. स्कूल के टीचर सुनील देसाई ने आजतक को बताया कि “शिक्षा विभाग के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है. लेकिन मोबाइल नेटवर्क ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में कमजोर होने के कारण छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कते आ रही है. छात्रों के परिजनों की आर्थिक हालत भी खस्ता है जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीद कर देना उनके लिए नामुमकिन है. ऐसे में पुणे शहर के कुछ उदार लोगों ने इस स्कूल के छात्रों के लिए 20 एंड्राइड मोबाइल दान दिए. कुछ ने मोबाइल रिचार्ज करवाने के लिए आर्थिक मदद की.” 

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आज तक ने छात्रों की परेशानियों पर महाराष्ट्र में शिक्षा क्षेत्र में चार दशकों से काम कर रहे समाज सेवी प्रदीप आगाशे से बात की. उन्होंने राज्य में फ्रेंडली एजुकेशन लाखों छात्रों तक पहुंचाने में मदद की. आगाशे के मुताबिक ऑनलाइन शिक्षा मौजूदा स्थिति में मुश्किल दौर से गुजर रही है. दिक्कतें सिर्फ मोबाइल रेंज की ही नहीं है. इनके अलावा हैंडसेट नहीं होने की समस्या भी है. अभिभावकों की ये चिंता भी है कि इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई के अलावा गैर जरूरी चीजों के लिए भी हो सकता है. छात्रों और टीचर के बीच, समन्वय का अभाव भी एक बड़ी समस्या है. फिर भी इस दिशा में सरकार की ओर से किए गए प्रयासों की तारीफ की जानी चाहिए, जिससे बच्चों की पढ़ाई जारी रह सकी.” महाराष्ट्र सरकार ने 23 नवंबर से स्कूलों के आंशिक तौर पर खुलने का एलान किया है. लेकिन सिर्फ गणित, विज्ञान और इंग्लिश की ही कक्षा लगेंगी. वो भी आल्टरनेट दिनों पर होंगी यानि एक दिन छोड़कर.   

(डपोली से मुजम्मिल जेटापकर के इनपुट्स के साथ) 

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