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Year Ender 2024: पेपर लीक, बड़े बदलाव और नई पहल... शिक्षा क्षेत्र की 10 बड़ी बातें

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST
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2024 शिक्षा क्षेत्र में बदलाव और चुनौतियों का वर्ष रहा. डिजिटल शिक्षा के प्रसार और नई नीतियों के कार्यान्वयन ने सकारात्मक बदलाव लाए, जबकि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने सिस्टम में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया. आइए, 2024 के प्रमुख शिक्षा संबंधित घटनाक्रमों पर एक नजर डालते हैं.

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1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में तेजी

2024 राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में मील का पत्थर साबित हुआ. शिक्षा को अधिक समावेशी, लचीला, और रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू की गईं. हालांकि, इन बदलावों को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास और सुधार की आवश्यकता है. नई शिक्षा नीति के तहत 5+3+3+4 मॉडल को देश के कई राज्यों में लागू किया गया. हायर एजुकेशन में क्रेडिट बैंकिंग सिस्टम और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट विकल्प को संस्थागत स्तर पर बढ़ावा दिया गया. प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा आधारित शिक्षा को अपनाया गया.

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2. परीक्षाओं में पेपर लीक और विवाद
नीट यूजी, यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल, यूपी समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी, राजस्थान दरोगा भर्ती परीक्षा, JSSC CGL, UGC NET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने व्यापक असंतोष पैदा किया. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में परीक्षा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे. 

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3. लोक परीक्षा कानून (Public Examination Act) 2024
जून 2024 में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा कानून, 2024 यानी पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को फरवरी 2024 में पारित किया गया था. इस कानून में सख्त दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया. पेपर लीक विरोधी कानून में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग करने पर 3 से 5 साल की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. संगठित तरीके से पेपर लीक करने पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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4. CUET और प्रतियोगी परीक्षाओं का विस्तार
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) का दायरा बढ़ाया गया. सीयूईटी एग्जाम देश भर के 200 से ज्यादा यूनिवर्सिटी में एडमिशन का रास्ता है, साथ ही हर साल नई यूनिवर्सिटीज जुड़ने की संभावना होती है. इसी के मुताबिक, एनटीए लगातार सीयूईटी यूनिर्सिटी लिस्ट को अपडेट करता रहता है. SSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल परीक्षा केंद्रों का विस्तार हुआ. भारत के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों ने ड्यूल डिग्री प्रोग्राम और विदेशी संस्थानों के साथ सहयोग शुरू किया.

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5. बोर्ड परीक्षा में सुधार पर चर्चा
कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा को समझ आधारित मूल्यांकन (Competency-Based Assessment) की ओर बदलने पर चर्चा हुई. बोर्ड परीक्षाओं में उद्देश्य आधारित प्रश्न शामिल किए गए, और रट्टा संस्कृति को खत्म करने पर जोर दिया गया. छात्रों को त्रैमासिक, सेमेस्टर आधारित मूल्यांकन के विकल्प देने की बात हुई.

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6. डिजिटल शिक्षा का प्रभाव
डिजिटल शिक्षा और एआई आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग बढ़ा. ग्रामीण क्षेत्रों में PM-eVIDYA और दीक्षा पोर्टल के माध्यम से डिजिटल सामग्री की पहुंच सुनिश्चित की गई. छात्रों और शिक्षकों के लिए विशेष ऑनलाइन कोर्स और वर्चुअल क्लासरूम शुरू किए गए.

7. छात्रवृत्ति और वित्तीय मदद
सरकारी योजनाओं के तहत छात्रों को रिकॉर्ड संख्या में छात्रवृत्तियां वितरित की गईं. राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया गया.

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8. नई पहलों की शुरुआत
स्टार्टअप इंडिया मिशन के तहत स्कूल स्तर पर छात्रों को एंटरप्रेन्योरशिप की शिक्षा दी गई. ऑनलाइन उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों के लिए नालंदा पोर्टल लॉन्च किया गया. शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमराष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण मिशन शुरू हुए.

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9. अंतरराष्ट्रीयकरण और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग
भारत और कई देशों के बीच शिक्षा समझौते हुए, जिसमें अमेरिका, यूके, और जर्मनी शामिल हैं. विदेशी छात्रों के लिए भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश आसान बनाया गया.

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10. विवाद और सुधार
कई राज्य बोर्ड परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण परीक्षा सुधारों की मांग तेज हुई. शिक्षा प्रणाली में परीक्षा केंद्रीकरण और स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों की सिफारिश की गई.

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