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BNS, BNSS, BSA... नए अपराधिक कानूनों का मतलब जानिए? ये IPC-CrPC से कितना अलग

तीन आपराधिक क़ानून- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता एक जुलाई यानी सोमवार से देश में हो लागू हो गए हैं. ऐसेे में आइए जानते हैं कि इन तीन अपराधिक कानून का मतलब क्या है.

1 जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू होंगे। (फोटो: इंडिया टुडे के लिए वाणी गुप्ता) 1 जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू होंगे। (फोटो: इंडिया टुडे के लिए वाणी गुप्ता)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

देश के अपराधिक कानून में कुछ बदलाव किए गए हैं. क्रिमिनल प्रोसीजर कोड CRPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू की जाएगी. इंडियन पीनल कोड (IPC) 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 लागू हई है. इंडियन एवीडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के मुताबिक फैसले लिए जाएंगे. ऐसे समझते हैं कि यह कानून हैं क्या.

Point 1: किसी ने कोई क्राइम किया है, तो उसे कैसे गिरफ्तार किया जाएगा? पुलिस कैसे उसे हिरासत में रखेगी? अदालत क्या करेगी? आरोपी के क्या अधिकार होंगे? किसी कैदी के क्या अधिकार होंगे? ये सबकुछ सीआरपीसी से तय होता था. अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) से तय होगा.

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Point 2: क्राइम के बाद किसी आरोपी के क्राइम को साबित करने के लिए क्या सबूत पेश किए जाएंगे? केस के तथ्यों को कैसे साबित किया जाएगा? ये सबकुछ इंडियन एविडेंस एक्ट में था. अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में होगा.

Point 3: क्राइम के बाद आरोपी को क्या सजा होगी? उसके कौन-कौन से कृत्य को अपराध माना जाएगा? उस अपराध के लिए क्या सजा होगी? ये सबकुछ आईपीसी में था. अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) में है.

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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 

सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) दंड प्रक्रिया संहिता ने 1973 (CRPC) की जगह ली है. सीआरपीसी में गिरफ्तारी, अभियोजन और जमानत दैसी प्रक्रियाओें के लिए हुआ करता था. अब बीएनएसएस लाकर इस कानून में और भी कई प्रावधान जोड़ दिए गए हैं. BNSS में कुल 531 धाराएं हैं. इसके 177 प्रावधानों में संशोधन किया गया है. जबकि 14 धाराओं को हटा दिया गया है. 9 नई धाराएं और 39 उप धाराएं जोड़ी गई हैं. इसमें CrPC की 14 धाराओं को न्यायिक प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है. पहले केवल 15 दिन की पुलिस रिमांड दी जा सकती थी. लेकिन अब 60 या 90 दिन तक दी जा सकती है.

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भारतीय न्याय संहिता (BNS)

BNS ने IPC को रिप्लेस किया है. IPC में कुल 511 धाराएं थीं BNS में अब 358 हैं. आईपीसी के तमाम प्रावधानों को भारतीय न्याय संहिता में कॉम्पैक्ट कर दिया गया है. आईपीसी के मुकाबले बीएनएस में 21 नए अपराध जोड़े गए हैं. 41 अपराध ऐसे हैं जिसमें जेल का समय बढ़ाया गया है. 82 अपराधों में जुर्माने की रकम बढ़ी है. 25 अपराध ऐसे हैं जिनमें न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है. छह तरह के अपराध पर कम्युनिटी सर्विस करनी होगी. 19 धाराएं हटाई गई है. बीएनएस के अंदर, जाति, भाषा या पर्सनल बिलीफ के आधार पर अगर कोई लोग समूह बनाकर मर्डर करते हैं तो उन्हें सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है. अपराधिक जिम्मेदारी की आयु सात वर्ष ही रखी गई है. आरोपी की परिपक्वता के आधार पर इसे 12 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. BNS में महिलाओं व बच्चों से जुड़े क्राइम, मर्डर, मेंटल हेल्थ, मेरिटल रेप, संगठित अपराध, चुनावी अपराध की धारा शामिल है. 

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (BSA)

भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में 170 धाराए हैं, जिसमें 24 को संशोधित किया गया है. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की 167 धाराओं में से छह को निरस्त कर दिया गया है. इसमें 2 नई धाराएं और 6 उप धाराओं को जोड़ा गया है. इसमें गवाहों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान है. इसमें इलैक्ट्रोनिक सबूत को कोर्ट में मान्यता दी गई है. 

गौरतलब है कि आईपीसी में 511 धाराएं थीं, जबकि भारतीय न्याय संहिता में 356 धाराएं होंगी. कई सारी धाराओं को हटाया गया है,  वहीं, कइयों में बदलाव किया गया है और कई धाराएं नई जोड़ी गई हैं. कई कानून व‍ि‍शेषज्ञ मान रहे हैं कि भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बड़ा बदलाव हो जाएगा. कानूनी प्रक्र‍िया में लेट जस्ट‍िस के चलन को हटाने में भी इससे मदद मिलेगी. 

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