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EWS कोटे के छात्रों को दाखिला नहीं देने पर दिल्ली सरकार का बड़ा एक्शन

दिल्ली के प्राइवेट स्कूल ने 2022-23 एकेडमिक ईयर में EWS कैटेगरी के छात्रों को दाखिला देने से इनकार दिया था. शिक्षा निदेशालय ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत छात्रों को दाखिला देने से इनकार करने वाले प्राइवेट स्कूल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. जब कोई जवाब नहीं मिला तो मान्यता रद्द कर दी गई.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 1:13 PM IST

दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत दाखिला देने से इनकार करने वाले प्राइवेट स्कूल से मान्यता वापस ले ली है. इन प्राइवेट स्कूल ने गरीब परिवारों (ईडब्ल्यूएस कैटेगरी वाले) के छात्रों को दाखिला देने से इनकार करने का साथ-साथ उन छात्रों को फ्री स्टेशनरी, किताबें और वर्दी देने से भी मना कर दिया था जो पहले से उनके स्कूल में पढ़ रहे थे.

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दिल्ली सरकार ने राजेंद्र नगर के जेडी टाइटलर प्राइवेट स्कूल की आधिकारिक मान्यता वापस ली है. अधिकारियों ने बुधवार को जानकारी दी कि जेडी टाइटलर स्कूल को 2022-23 एकेडमिक ईयर के लिए किसी भी छात्र को दाखिला नहीं देने और स्कूल के संचालन तक कर्मचारियों के वेतन और बकाया का भुगतान करने के लिए कहा गया है. अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला लिया गया है. शिक्षा निदेशालय (डीओई) का यह आदेश एक अप्रैल, 2022 से प्रभावी हो गया है.

अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष विशेष रवि ने कहा, 'यह पाया गया कि स्कूल ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत कुछ छात्रों को दाखिल नहीं दिया था और छात्रों को मुफ्त स्टेशनरी भी प्रदान नहीं की थी. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई है.' हालांकि, इससे पहले शिक्षा निदेशालय ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत छात्रों को दाखिला देने से इनकार करने वाले प्राइवेट स्कूल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. स्कूल के अधिकारियों से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. 

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बता दें कि दिल्ली सरकार ने राज्य के सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी माता-पिता को महंगी स्टेशनरी और यूनिफॉर्म किसी भी स्पेसिफिक वेंडर से खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कम-से-कम तीन साल तक ड्रेस का रंग, डिजाइन या यूनिफॉर्म को न बदलें.

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और राज्य शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि इस आदेश से उन अभिभावकों को राहत मिलेगी जो प्राइवेट स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म के लिए भारी भरकम भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा था कि, 'दो साल पहले कोविड-19 महामारी के बाद से कई परिवारों ने अपनी आय का स्रोत खो दिया है, जिससे उनके लिए विशिष्ट दुकानों से महंगी किताबें और ड्रेस खरीदना मुश्किल हो गया है, जो मनमाने ढंग से चार्ज करते हैं.'

दूसरी ओर, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने हाल ही में दिल्ली के मुख्य सचिव को लेटर लिखकर 2020-21, 2021-22 और 2022-23 शैक्षणिक वर्ष के लिए प्राइवेट स्कूलों में EWS Admission की डिटेल्स मांगी थी. एनसीपीसीआर का कहना था कि निर्देशों के बावजूद, दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत कुछ बच्चों को शैक्षणिक वर्ष 2021-22 में एडमिशन नहीं दिया गया है. 'पीटीआई' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के लिए दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस, डीजी श्रेणी के छात्रों के लिए वर्ष-वार खाली सीटें, खाली वैकेंसी के लिए कितनी सीटें अलॉट की गई, अलॉट सीटों पर कुल कितने बच्चों को दाखिला दिया गया, इसकी डिटेल्स मांगी गई हैं.

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