
कॉन्फिडेंस का अगर मानवीयकरण हो तो उसका नाम 'पुष्पेंद्र भइया' रखा जा सकता है. अब तक UPSC समेत नौ राज्यों के सिविल सर्विसेज की 73 प्रीलिम्स परीक्षा पास करने वाले पुष्पेंद्र श्रीवास्तव की कहानी ऐसे तमाम एस्पिरेंट्स को प्रेरित करने वाली है जो पहले ही अटेंप्ट में 'गिव अप' कर देते हैं. सिर्फ प्रीलिम्स ही नहीं, पुष्पेंद्र ने अभी तक 42 मेंस एग्जाम भी दिए हैं और आठ बार उसमें सफल होकर इंटरव्यू भी दिए, अब बस फाइनल सेलेक्शन का इंतजार है.
दिल्ली के मुखर्जी नगर में नेहरू विहार की एक बिल्डिंग में खड़ी सीढ़ियां चढ़कर तीसरी मंजिल पर है पुष्पेंद्र भइया का कमरा. कमरे के एक तरफ पुरानी किताबों का ढेर है तो दूसरी तरफ मेज पर नई किताबें और नोट्स. पुष्पेंद्र भइया इन दिनों एमपी पीएससी के इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं. कोरोना के कारण उन्हें ये अटेंप्ट मिला है जिसे वो चूकना नहीं चाहते. इलाके में उनका नाम सुनकर उनसे संपर्क किया तो वो बिल्डिंग के नीचे ही लेने पहुंच गए.
'भइया' पुष्पेंद्र किसी काउंसलर या गाइड से कम नहीं हैं
दमकते चेहरे वाले पुष्पेंद्र गर्मजोशी से मिले. इलाके में नए एस्पिरेंट्स हों या तैयारी कर रहे यूपीएससी के पुराने महारथी, सभी के 'भइया' पुष्पेंद्र किसी काउंसलर या गाइड से कम नहीं हैं. उनके कमरे में किताबों की अलग-ही खुशबू भरी है. जीवन के करीब 27 साल सिविल सर्विसेज की तैयारियों को समर्पित कर चुके पुष्पेंद्र श्रीवास्तव को भले ही अभी तक सफलता नहीं मिल पाई, लेकिन उन्हें इसके लिए किसी से शिकायत नहीं है. चेहरे पर वही कॉन्फिडेंस और सफलता हासिल करने की लगन साफ झलकती है. नेहरू विहार में कई सालों से रह रहे पुष्पेंद्र को अब इलाके में एक अलग पहचान मिल चुकी है.
पुष्पेंद्र से जब उनकी अब तक की जर्नी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मैं एक के बाद एक प्रीलिम्स तो कभी मेंस देने में ही बिजी रहा. मुझे पता ही नहीं चला कि कब इतने साल बीत गए. मैंने अब तक क्या मिस किया, इसके बारे में कभी नहीं सोचा. मैंने अब कितना ज्ञान और सम्मान प्राप्त किया, वो ही मेरी पूंजी है.
विकास दिव्यकीर्ति जैसे नाम भी उनके साथ तैयारी कर रहे थे
पुष्पेंद्र श्रीवास्तव मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक छोटे से गांव बंभौरी से कई साल पहले यूपीएससी की तैयारी करने नेहरू विहार आए थे. इससे पहले वो इलाहाबाद में यूपी पीसीएस परीक्षा का प्रीलिम्स और मेंस निकालकर यहां पहुंचे थे. ये वो दौर था जब आज नामी शिक्षक बन चुके विकास दिव्यकीर्ति जैसे नाम भी मुखर्जीनगर में उनके साथ तैयारी में मशगूल थे.
ऐसे शुरू हुई तैयारी की यात्रा...
पुष्पेंद्र बताते हैं कि मेरे माता-पिता दोनों ही सरकारी शिक्षक थे, सिर्फ वही नहीं मेरे परिवार में और भी कई रिश्तेदार शिक्षक ही थे. मैं तब शिक्षक नहीं बनना चाहता था. मैंने गांव से दसवीं की पढ़ाई करने के बाद बाकी की पढ़ाई छतरपुर से की. इसके बाद सागर यूनिवर्सिटी से एमएससी किया. ये वो दौर था जब हमें बताया जाता था कि 17 तक पढ़ाई होती है. मैंने 17 तक यानी 12वीं और फिर BSc और MSc तक पढ़ाई कर ली. अब मुझे पता ही नहीं था कि क्या करना है. अब अक्सर मुझे लगता है कि स्कूलों में एक काउंसलर जरूर होना चाहिए जो यह गाइड कर सके कि कोई बच्चा आगे चलकर किस दिशा में अच्छा कर सकता है.
खैर, मेरे सामने बीएड करने का ऑप्शन रखा गया. लेकिन उसी दौरान मुझे किसी ने यूपी पीसीएस के बारे में बताया. मैंने भी सोचा, कि चलो ट्राई कर लूं. फॉर्म भरा और बिना किसी ज्यादा तैयारी के प्रीलिम्स दिया. पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स पास कर लिया. फिर क्या था मेरे भीतर कॉन्फिडेंस जन्म ले चुका था. मैं अब मेंस की तैयारी के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) पहुंच गया. वहां रह रहे एस्पिरेंट्स भी सोच रहे थे कि चलो प्रीलिम्स निकाल लिया, मेंस निकालना मुश्किाल होगा. लेकिन, मैं अपनी पढ़ाई में जुटा रहा. पुष्पेंद्र कहते हैं कि कोचिंग वाली जगहें चाहे वो इलाहाबाद हो या मुखर्जीनगर जब तक आप एग्जाम नहीं निकालते, आपको सीरियस स्टूडेंट नहीं समझा जाता. न ही आप पर पढ़ाई को लेकर ज्यादा भरोसा होता है. उस वक्त किस्मत ने साथ दिया और मैंने मेंस भी निकाल दिया. सभी का मुझ पर भरोसा पक्का हो गया था. पुष्पेंद्र बताते हैं कि इसी दौरान मैंने एमपी पीएससी का भी प्रीलिम्स और फिर मेन्स निकाल दिया. मगर, इंटरव्यू में सेलेक्ट नहीं हुआ.
आ गया मुखर्जीनगर
प्रीलिम्स और मेंस निकालने के बाद पुष्पेंद्र का आत्मविश्वास और बढ़ गया था. वो अब सीधे मुखर्जी नगर में तैयारी करने आ गए और नेहरू विहार में रहकर यूपीएससी की तैयारी में जुट गए. पुष्पेंद्र बताते हैं कि जिस दौर में मैं आया था, नेहरू विहार में दो मंजिला इमारतें हुआ करती थीं, मेरी तैयारी के दौर मे ही धीरे धीरे सब बदला. नेहरू विहार में छात्रों की आमद बढ़ने लगी. उस दौर में मेरे कमरे का किराया 700 रुपये था. वहीं, अब ये किराया 10 हजार से ऊपर ही है.
पुष्पेंद्र बताते हैं कि तैयारी के पहले ही चरण में मैंने यूपीएससी में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. पहली बार में यूपीएससी का प्रीलिम्स दिया तो उसमें भी सेलेक्शन हो गया. फिर एक के बाद एक ऐसे नौ राज्यों के पीसीएस और यूपीएससी की 73 प्रीलिम्स परीक्षाएं दीं. इनमें से किसी में भी मैं फेल नहीं हुआ. फिर पीसीएस और यूपीएससी के 42 मेंस लिखे, करीब 22 परीक्षाओं के मेंस छोड़ने पड़े क्योंकि डेट्स में क्लैश होता था. फिर कभी एक साल छोड़कर तो कभी दो साल में आठ बार मेंस भी क्लियर किए, लेकिन हर बार इंटरव्यू में नहीं हो पाया. हर बार मुझे यही उम्मीद रही कि मैं इस बार तो क्लियर कर ही दूंगा. लेकिन कभी किसी एक सब्जेक्ट में काफी ज्यादा तो एक में कम नंबर होने से रह गया.
कोई अफसोस नहीं
पुष्पेंद्र श्रीवास्तव भले ही अभी तक तीनों चरणों में कोई परीक्षा क्लियर नहीं कर सके, लेकिन उनके चेहरे पर इसका कोई ज्यादा मलाल नहीं दिखता. उनके पास अब ज्ञान और अनुभव इस कदर बढ़ चुका है कि कई कोचिंग सेंटर उन्हें टीचिंग का ऑफर दे चुके हैं. एक कोचिंग सेंटर में वो तैयारी से बचे समय में पढ़ा भी लेते हैं, लेकिन अभी भी उनका मुख्य ध्येय सिर्फ पीसीएस परीक्षा निकालना है.
नहीं बचे ज्यादा मौके
पुष्पेंद्र बताते हैं कि अब उनके पास ज्यादा अटेंप्ट नहीं बचे. कोरोना के कारण उन्हें एमपी, बिहार और उत्तराखंड से एक मौका मिल रहा है. उन्हें अभी भी पूरी उम्मीद है कि वो इन तीनों परीक्षाओं में से एक क्लियर करके स्टेट पीसीएस निकाल ही लेंगे.