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'टीचर छेड़ता है...', स्कूल की 42 छात्राओं ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, हुआ ये एक्शन

जिला कलेक्टर ऑफिस को चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए शिकायत मिली कि सरकारी स्कूल का एक टीचर 9वीं और 10वीं क्लास की छात्राओं का यौन उत्पीड़न करता है. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच टीम बनाई गई और स्कूल भेजी गई.

सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.
प्रमोद माधव
  • चेन्नई,
  • 10 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 2:53 PM IST

एक सरकारी स्कूल के टीचर पर 42 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. मामला तमिलनाडु के एक सरकारी स्कूल का है, जहां मैथ्स पढ़ाने वाले टीचर पर गंभीर आरोप लगाया गया है. छात्राओं ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर जिला कलेक्टर ऑफिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी. सभी छात्राएं 9वीं और 10वीं क्लास की हैं.

दरअसल, जिला कलेक्टर ऑफिस को चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए शिकायत मिली कि सरकारी स्कूल का एक टीचर 9वीं और 10वीं क्लास की छात्राओं का यौन उत्पीड़न करता है. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच टीम बनाई गई और जांच के लिए स्कूल भेजी गई. स्कूल में भेजी गई एक टीम ने पाया कि 9वीं और 10वीं कक्षा की 42 छात्राओं ने टीचर मुथु कुमारन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और लिखित रूप में भी इसकी गिनती की.

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मुथु कुमारन पप्पनडु में एक सरकारी बालिका विद्यालय में गणित शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे. जांच टीम ने एक रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है. साथ ही आरोपी टीचर को स्कूल से निलंबित कर दिया गया. ऑल विमेन पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी टीचर से पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद टीचर को POCSO अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

क्या है POCSO अधिनियम?
POCSO का पूरा नाम Protection of Children from Sexual Offences Act है, यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012. यह बच्चों को यौन अपराधों से बचाने का एक महत्वपूर्ण कदम है. इसका मकसद बच्चों को यौन उत्पीड़न और अश्लीलता से जुड़े अपराधों से बचाना है. इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को बच्चा माना गया है और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. पॉक्सो कानून में पहले मौत की सजा नहीं थी, लेकिन 2019 में इसमें संशोधन कर मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया. इस कानून के तहत उम्रकैद की सजा मिली है तो दोषी को जीवन भर जेल में ही बिताने होंगे. इसका मतलब हुआ कि दोषी जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता.

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है.एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में पॉक्सो एक्ट के तहत देशभर में करीब 54 हजार मामले दर्ज किए गए थे. जबकि, इससे पहले 2020 में 47 हजार मामले दर्ज हुए थे. 2017 से 2021 के बीच पांच साल में पॉक्सो एक्ट के तहत 2.20 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं.

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