
IIT बॉम्बे में पिछले महीने एक छात्र की आत्महत्या मामले में जातिगत भेदभाव के एंगल को नकारा गया है. 12 सदस्यों की जांच कमेटी ने जातिगत भेदवाव के एंगल को खारिज किया है. कमेटी ने संकेत दिया है कि छात्र की खुदकुशी के पीछे शैक्षणिक प्रदर्शन ठीक न होना हो सकता है.
दरअसल, IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में 18 वर्षीय छात्र दर्शन सोलंकी ने पिछले महीने 16 फरवरी को आत्महत्या की थी. दर्शन सोलंकी ने होस्टल की सातवीं मंजिल से कूदकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी. हालांकि परिवार ने आरोप लगाया कि दर्शन सोलंकी को पवई आईआईटी के अन्य छात्रों ने परेशान किया क्योंकि वह एससी जाति से था. परिजनों का कहना है कि यह सुसाइड का नहीं सुनियोजित मर्डर का मामला है.
परिवार ने कहा- आत्महत्या नहीं, सुनियोजित हत्या
परिवार के सदस्यों का आरोप है कि दर्शन को जाति के आधार पर परेशान किया जा रहा था और यह आत्महत्या का मामला नहीं है, यह सुनियोजित हत्या है. मृतक दर्शन के परिवार ने न्याय और विस्तृत जांच की मांग की थी.मृतक दर्शन सोलंकी की बहन जाह्नवी ने कहा था, 'शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन एक बार जब उन्हें पता चला कि दर्शन एससी समुदाय से है तो उसका उत्पीड़न शुरू हो गया.'
जांच कमेटी ने नकारा जातिगत भेदभाव का एंगल
वहीं इस पूरे मामले की जांच के लिए आईआईटी बॉम्बे ने 12 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी जिसमें परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज कर दिया है. कमेटी ने दर्शन सोलंकी की आत्महत्या के पीछे जातिगत भेदभाव की बात को नकारा है.
बता दें कि दर्शन ने महज तीन महीने पहले ही IIT में एडमिशन लिया था. दर्शन वहां से केमिकल्स में बीटेक की पढ़ाई कर रहा था. परिवार ने कहा कि वह बहुत ही होनहार छात्र था. उसने दसवीं क्लास में 83% नंबर आए थे. परिजनों ने यह भी कहा कि दर्शन कभी भी आत्महत्या नहीं कर सकता, बल्कि वह उन लोगों को डांटता था जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते हैं.
(पीटीआई इनपुट के साथ)