
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एमबीबीएस छात्रों के लिए तीन विषयों की हिंदी पाठ्यपुस्तकों का विमोचन किया. ये राज्य सरकार द्वारा हिंदी में चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने की महत्वाकांक्षी पहल का हिस्सा है. भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के लिए फिजियोलॉजी, एनॉटमी और बायो केमिस्ट्री की तीन हिंदी पुस्तकों के अनावरण समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि जेईई, नीट और यूजीसी नेट परीक्षा भी आने वाले समय में भारतीय भाषाओं में होगी.
इसके साथ ही उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी दी कि जेईई, नीट और यूजीसी की परीक्षाएं भी अब भारतीय भाषाओं में भी कराई जाएंगी. इंजीनियरिंग तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, मराठी और बंगाली में भी पढ़ाई जा रही है.
उन्होंने यहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने 75 प्रतिशत हिंदी भाषी बच्चों को चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश लेने का मौका दिया है. एनईपी-2020 के अनुसार मेडिकल कोर्स अपनी मातृभाषा हिंदी में कराने की योजना है. उन सभी मेडिकल कॉलेज शिक्षकों को धन्यवाद जिनके अथक प्रयासों से यह कार्य संभव हुआ है.
पिछले 32 साल से हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए आंदोलन चला रहे इंदौर के डॉ मनोहर लाल भंडारी फिजियोलॉजिस्ट हैं, साथ ही मध्यप्रदेश की हिंदी अनुवाद के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी का हिस्सा हैं. aajtak.in से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई एक बड़ी जरूरत है. जब फर्स्ट ईयर में कोई स्टूडेंट आता है तो अंग्रेजी के कई टेक्निंकल शब्द उसे 12वीं की पढ़ाई से एकदम अलग मिलते हैं.
वो कई बार सबकुछ आते हुए भी हिंदी में सोचने के कारण अपनी वाक्य रचना का क्रम बदल देता है. इन छात्रों से स्पेलिंग मिस्टेक भी होती हैं. मैं जब उनका मूल्यांकन किया करता था तो सोचता था कि बच्चों को अगर इन टर्म को समझकर फिर हिंदी में लिखने को कहा जाए तो ये बेहतर तरीके से समझकर लिख सकते हैं.