Advertisement

JNU Financial crisis: वित्तीय संकट में कैंपस की संपत्ति बेचने का प्लान, छात्र संगठन ने किया विरोध

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने वित्तीय संकट से निपटने के लिए अपनी प्रॉपर्टी बेचने का फैसला लिया है. संस्थान के इस फैसले पर ABVP ने कहा कि अगर मेहमानों के गेस्ट हाउस को बेच दिया जाएगा तो उन्हें होटल में ठहराने का खर्चा भी उठाना पड़ेगा.

Jawaharlal Nehru University Jawaharlal Nehru University
अनमोल नाथ
  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) आर्थ‍िक संकट से जूझ कर रहा है. इस संकट से उबरने के लिए, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी दो बड़ी संपत्तियों को बेचने का फैसला किया है ताकि संस्थान की वित्तीय स्थिति को सुधारा जा सके. जेएनयू के इस फैसले का छात्र संगठन विरोध कर रहा है. उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो जेएनयू के मेहमानों को होटल में ठहराया जाएगा और फिर उसका बिल कौन भरेगा?

Advertisement

विश्वविद्यालय इन संपत्तियों को निजी संस्थाओं को री-डेवलप या पट्टे पर देने पर विचार कर रहा है. इन संपत्तियों में से एक है मंडी हाउस स्थित गेस्ट हाउस, जो राजधानी के टॉप लोकेशन में से एक पर स्थ‍ित है. जेएनयू के सूत्रों के अनुसार, यह गेस्ट हाउस काफी समय से विश्वविद्यालय के किसी विशेष कार्य के लिए उपयोग नहीं हो रहा है. इसके बावजूद, इस गेस्ट हाउस के रखरखाव में लगे कर्मचारियों की तनख्वाह अभी भी विश्वविद्यालय के बजट से दी जा रही है, जिससे जेएनयू पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है.

जेएनयू के फैसले का विरोध शुरू

जेएनयू प्रशासन की इस योजना को लेकर वामपंथी शासित जेएनयूएसयू और अन्य छात्र संगठन कड़ी आलोचना कर रहे हैं. आजतक से बात करते हुए, जेएनयूएसयू के अध्यक्ष धनंजय ने कहा, "यह कैंपस के लिए एक चिंताजनक स्थिति है, वे इसकी संपत्तियों को बेच रहे हैं. क्या वह कुलपति हैं या प्रॉपर्टी डीलर?" उन्होंने आगे कहा, "उनका काम हालात को बेहतर बनाना है, लेकिन वह इसे और बिगाड़ रही हैं."

Advertisement

शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करेगा जेएनयूएसयू

जेएनयूएसयू अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि विदेशी मेहमान इन गेस्ट हाउस में ठहरते हैं, अब वे कहां ठहरेंगे? होटलों में ठहरेंगे तो उनके बिल कौन भरेगा? इस मुद्दे पर जेएनयूएसयू शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने की योजना भी बना रहा है.

एबीवीपी भी इस मामले में कुलपति पर सवाल उठा रहे हैं. जेएनयू एबीवीपी की सचिव शिखा सावराज ने कहा, "अगर पैसे की कमी है, तो फिर उन्होंने कुलपति के घर की मरम्मत पर पैसे क्यों खर्च किए?" उन्होंने आगे कहा, "अगर उन्हें कुछ बेचना ही है तो सबसे पहले कुलपति का घर बेचना चाहिए". एबीवीपी नेता ने यह भी कहा कि कुलपति इस तरह के बयान सिर्फ मीडिया में सुर्खियों में बने रहने के लिए देती हैं. आजतक ने जेएनयू प्रशासन से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि जल्द ही वे इस पर प्रतिक्रिया देंगे.

(दिल्ली से अमरदीप की रिपोर्ट के साथ)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement