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'हां मैंने 15 लाख दिए थे!' पटवारी परीक्षा की टॉपर ने वीडियो जारी कर कहीं ये बातें, फिर दी ये सफाई

मध्य प्रदेश में हुई पटवारी परीक्षा में हुई धांधली की खबरों के बीच छठी रैंक टॉपर के वीड‍ियो ने तूफान-सा खड़ा कर दिया है. कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी इस वीड‍ियो में टॉपर ने खुद माना है कि उन्होंने और उनके परिवार ने 15 लाख रुपये की देकर इस परीक्षा में सेलेक्शन पाया है. साथ ही उन्होंंने लोगों से एक भावुक अपील भी की है.

टॉपर मधुलता ने जारी किया वीडियो टॉपर मधुलता ने जारी किया वीडियो
हेमेंद्र शर्मा
  • भोपाल ,
  • 17 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 11:28 AM IST

मध्यप्रदेश में हुई पटवारी परीक्षा में धांधली के आरोपों के बीच इस परीक्षा में छठी रैंक की टॉपर मधुलता गड़वाल के वीडियो ने आग में घी का काम किया है. मधुलता गड़वाल ने एक वीड‍ियो जारी करके कहा है कि उन्होंने और उनके प‍रिवार ने 15 लाख रुपये देकर सेलेक्शन लिया है. यह वीडियो कांग्रेस पार्टी के हवाले से जारी किया गया है.  

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aajtak.in को मिले इस वायरल हो रहे वीडियो में मधुलता नाम की युवती ने दावा किया है उनका नाम मधुलता गड़वाल है. मेरे पिता  का नाम लालपति राम है. उन्होंने आगे कहा कि मेरे बारे में जो चर्चा चल रही है कि मैंने 15 लाख दिए तो  उस पर मैं कहना चाहती हूं. हां मैंने 15 लाख दिए. 

अगर कोई आपको ऐसे ऑफर दे तो आप नहीं मानेंगे. 

मैंने इसके लिए माना, मेरे पापा ने भी माना. उन्होंने आगे कहा कि इसका ये मतलब नहीं है कि मैंने पढ़ाई नहीं की. मैंने भी तैयारी की. साथ ही माना कि अभी तक जो भी हुआ इसमें मेरी भी गलती है. उन्होंने सरकार से निवेदन किया कि मुझे पोस्ट मत दीजिए. हम लोगों को निकाल दीजिए लेकिन हम लोगों की वजह से बाकी को कुछ न हो. साथ ही लोगों से अपील की है कि हमलोगों को इतन गलत न समझें, अगर आपको कोई ऑफर करता तो आप भी यही करते. 

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क्या है पूरा मामला

गुरुवार को पटवारी परीक्षा के परिणाम की घोषणा के बाद आरोप लगाया गया कि ज्यादातर टॉपर वो हैं, जिन्होंने ग्वालियर के एक एग्जाम सेंटर में परीक्षा दी थी. इस पर शक तब और गहराया जब मंडल की तरफ से टॉपर्स की लिस्ट ही जारी नहीं की गई. छात्रों ने मांग की कि टॉपर लिस्ट जारी हो और किसने कहां पेपर दिया है ये भी बताया जाए. 10 जून को टॉपर लिस्ट जारी की गई. तब पता चला कि टॉप 10 में से 7 उम्मीदवारों ने ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज एग्जाम सेंटर में परीक्षा दी थी. इसी के बाद परीक्षा पर सवाल उठने लगे. इस मामले में 13 जुलाई को प्रदेश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किया.

(यह वीडियो कांग्रेस पार्टी के हवाले से प्राप्त हुआ है)

बता दें कि विपक्ष इस भर्ती घोटाले के तार बीजेपी विधायक संजीव कुमार कुशवाह से जोड़ रहा है. दरअसल, पटवारी भर्ती परीक्षा में टॉप करने वाले 10 छात्रों में से 7 ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से हैं, जिसके मालिक भिंड के विधायक संजीव कुशवाह हैं.  परीक्षा में अब घोटाले के आरोप लग रहे हैं. ये परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने आयोजित की थी.

भर्ती घोटाले के आरोप के बाद वार-पलटवार का सिलसिला जारी है. मामला सामने आने के बाद कांग्रेस की तरफ से बीजेपी सरकार को घेरा जा रहा है. राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ ने इसपर कहा कि प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. कई टॉपर एक ही सेंटर पर परीक्षा देकर सफल हुए. कमलनाथ ने आगे कहा कि व्यापम, नर्सिंग, आरक्षक भर्ती, कृषि विस्तार अधिकारी और ऐसी कितनी ही भर्ती परीक्षाओं ने अंत में घोटाले का रूप लिया है.

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कमलनाथ ने आगे कहा कि शिवराज सरकार से तो जांच की मांग करना भी बेकार है क्योंकि हमेशा बड़ी मछलियों को बचा लिया जाता है. इस मामले पर बीजेपी विधायक संजीव कुशवाह की सफाई भी आई है. उन्होंने कहा, 'परीक्षा करवाने में कॉलेज का कोई रोल नहीं होता है. कॉलेज तो सिर्फ अपनी बिल्डिंग और कंप्यूटर उस एजेंसी को ठेके पर देते हैं जो एजेंसी परीक्षा करवाती है.'

वहीं MP के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को घेरा है. वह बोले कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस ने परीक्षा में गड़बड़ी का मामला उठाना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरीके से कांग्रेस की साजिश है.

नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश में 8000 से अधिक पटवारी परीक्षा में चयनित होकर आए हैं. 13 जिलों में सेंटर बनाए गए और 35 दिन परीक्षाएं चलीं. 70 से अधिक प्रश्न पत्र आए. वह बोले कि कांग्रेस की तरफ से लगाए गए गड़बड़ी के सभी आरोप झूठे हैं, जिस सेंटर पर आरोप लगा रहे हैं वहां से 114 लोग कुल सेलेक्ट हुए हैं.

अपडेट: इस खबर के पब्लिश होने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने दावा किया है कि हमने यह वीडियो नहीं बनाया था. हमने कहा था कि लड़की ने यह दावा किया है. लेकिन अब यह लड़की कह रही है कि उसने यह वीडियो हंसी-मजाक के लहजे से बनाया था, जिसका मतलब है कि लड़की ने वीडियो बनाया था. हमने सिर्फ यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से मामले की जांच करने को कहा था.

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वहीं, खुद को पहले मधुलता बताने वाली लड़की ने भी वीडियो जारी कर कहा है कि उसने अपने दोस्तों के साथ मस्ती-मजाक में यह वीडियो बनाया था. लड़की ने कहा कि उसका नाम मधुलता नहीं है और उसकी उम्र बहुत कम है. लड़की ने वायरल हुए अपने उस वीडियो को वायरल नहीं करने का भी अनुरोध किया.

     

     

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