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नरेंद्र मोदी या मनमोहन सिंह, 8 वर्षों में किसने बनवाए ज्‍यादा केंद्रीय विद्यालय? RTI से मिला ये जवाब

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में जहां हर वर्ष औसतन 20 केवी बने हैं, वहीं मनमोहन सरकार ने इसी दौरान हर वर्ष औसतन 25 केवी बने थे. अलग-अलग राज्‍यों को कितने केवी मिले हैं, इसकी पूरी लिस्‍ट यहां देखें.

Narendra Modi (Left) and Manmohan Singh (Right) [File Photo] Narendra Modi (Left) and Manmohan Singh (Right) [File Photo]
अशोक उपाध्याय/पीयूष अग्रवाल
  • नई दिल्‍ली,
  • 28 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST
  • 8 साल के कार्यकालों की ली गई जानकारी
  • RTI के माध्‍यम से मिला जवाब

शिक्षा और रोज़गार के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को कई बार घेरा जाता रहा है. विपक्ष शुरुआत से ही सरकार पर शिक्षा को लेकर उंगली उठाता रहा है. हालांकि, सरकार ने भी कई मौकों पर अपने आंकड़े गिनाए और बताया कि लगातार नए स्‍कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोले जा रहे हैं जिससे हर बच्‍चे तक शिक्षा की पहुंच हो. 

RTI से मांगी जानकारी
इन दावों और जवाबों की सच्‍चाई को आंकड़ों से समझने के लिए इंडिया टुडे ने RTI दायर कर सरकार से जानकारी मांगी. सवाल किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 8 वषों में कितने केंद्रीय विद्यालय (KV) खोले गए और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पहले 8 वर्ष के कार्यकाल में कितने केंद्रीय विद्यालय खोले गए थे. आरटीआई से मिले आंकड़े आप नीचे चेक कर सकते हैं.

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8 वर्षों में बने इतने केवी
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 8 वर्षों में, 159 केंद्रीय विद्यालय बनाए गए थे, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शुरुआती 8 वर्षों में 202 स्कूलों की शुरुआत हुई थी. केंद्रीय विद्यालय सब्सिडाइज़्ड क्‍वालिटी एजुकेशन और उत्‍कृष्‍ट एकेडमिक ट्रैक रिकॉर्ड के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं.

देश में हैं कुल इतने केंद्रीय विद्यालय
01 अप्रैल 2022 तक, काठमांडू, मॉस्को और तेहरान में विदेश में कार्यरत तीन केंद्रीय विद्यालयों सहित कुल 1249 केंद्रीय विद्यालय हैं. कुल 1,249 केंद्रीय विद्यालयों में लगभग 14,35,562 छात्र इनरोल हैं.

8 वर्षों के कार्यकाल में किसने बनवाए कितने केंद्रीय विद्यालय

राज्‍य

मोदी सरकार के 8 वर्ष 

मनमोहन सरकार के 8 वर्ष

आंध्र प्रदेश

7  

6  

अरुणाचल प्रदेश  

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5  

4  

असम

3  

6  

बिहार

4  

16  

छत्‍तीसगढ़

10  

6  

नई दिल्‍ली

3  

3  

गुजरात

1  

3  

हरियाणा

8  

1  

हिमाचल प्रदेश

2  

2  

जम्‍मू-कश्‍मीर

2  

3  

झारखंड 

9  

9  

कर्नाटक

13  

8  

केरल

3  

9  

मध्‍य प्रदेश

20  

20  

महाराष्‍ट्र 

3  

5  

मणिपुर

2  

2  

मिजोरम  

0  

2  

नागालैंड

1  

0  

ओडिशा

10  

24  

पांडिचेरी

0  

2  

पंजाब

2  

10  

राजस्‍थान

14  

11  

सिक्किम

0  

0  

तमिलनाडु

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4  

10  

तेलंगाना  

9  

6  

त्रिपुरा 

1  

4  

उत्‍तर प्रदेश  

17  

12  

उत्‍तराखंड  

2  

6  

पश्चिम बंगाल

4  

11  

अंतर्राष्‍ट्रीय 

0  

1  

कुल

159  

202  

2014-15 से 2021-22 के बीच, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल रहा है, 159 स्कूलों का निर्माण किया गया. इसका मतलब है कि प्रत्‍येक वर्ष औसतन 20 स्कूल शुरू हुए.

इसकी तुलना में 2004-05 से 2011-12 तक, जो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शुरुआती आठ साल थे, 202 स्कूल शुरू हुए. यूपीए सरकार में प्रतिवर्ष 25 से अधिक स्कूल शुरू हुए.

वर्तमान NDA सरकार में, मध्‍यप्रदेश में अधिकतम 20 स्कूल खोले गए. उत्तर प्रदेश को 17, राजस्थान को 14, कर्नाटक को 13, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को 10-10 स्‍कूल मिले हैं. वहीं UPA सरकार के शुरुआती 8 वर्षों के दौरान, ओडिशा को अधिकतम 24 केवी, मध्य प्रदेश को 20, बिहार को 16, यूपी को 12, राजस्थान और पश्चिम बंगाल को 11-11 और पंजाब और तमिलनाडु को 10-10 स्‍कूल मिले. 8 वर्षों की तुलना में, बिहार को मनमोहन सरकार के दौरान 16 केवी मिले, जबकि मोदी शासन में केवल 4 केवी मिले.

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एडमिशन में सांसद कोटा भी हुआ खत्‍म
केंद्र सरकार ने KV में एडमिशन के लिए सांसद कोटा खत्म कर दिया है. इस कोटे के माध्यम से प्रत्‍येक सांसद केंद्रीय विद्यालयों में एडमिशन के लिए 10 नामों की सिफारिश कर सकते थे. सांसदों को इस कोटे के तहत एडमिशन के लिए बहुत दबाव झेलना पड़ता था. मार्च 2022 में, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि 10 सीटों का कोटा बहुत कम है, ऐसे में सरकार से या तो इसे बढ़ाकर 50 करे या इसे पूरी तरह से खत्म कर दे. सरकार ने कोटे को खत्‍म करने का विकल्प चुना.

जानें केंद्रीय विद्यालय की स्‍थापना का इतिहास
भारत सरकार ने नवंबर 1962 में केंद्रीय विद्यालयों की योजना को मंजूरी दी ताकि केंद्र सरकार/ रक्षा कर्मचारियों के बच्चों के लिए शैक्षिक सुविधाएं प्रदान की जा सकें. शैक्षणिक वर्ष 1963-64 के दौरान, डिफेंस स्टेशनों में 20 रेजिमेंटल स्कूलों को केंद्रीय स्कूलों के रूप में लिया गया था. 15 दिसंबर 1965 को इसे एक सोसायटी के रूप में केंद्रीय विद्यालय संगठन के रूप में रजिस्‍टर किया गया और एक स्वायत्त संगठन बनाया गया. इसका मतलब यह है कि 56 साल पहले 1965 में KVS अपने वर्तमान आकार में आया था.

 

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