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11 की उम्र में बाल विवाह, पढ़ने के लिए घर से भागा, अब डॉक्टर बनेगा एक बेटी का पिता रामलाल

NEET Topper Ramlal: पिता नहीं चाहते थे कि 10वीं के बाद बेटा पढ़ाई करे लेकिन बेटे की जिद थी कि आगे पढ़ाई करनी है. लोगों के बहकावे में आकर एक बार तो पिता ने रामलाल को पीटा और पढ़ाई नहीं करने की बात कही, लेकिन रामलाल के संकल्प का स्तर अलग ही था. उसने पढ़ाई जारी रखी.

NEET Topper Ramlal NEET Topper Ramlal
चेतन गुर्जर
  • चित्तौडगढ़,
  • 21 जून 2023,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

Success Story: बाल विवाह समाज के लिए चुनौती है जो अक्‍सर बच्चों के भविष्‍य सपने तोड़ देती है, लेकिन यहां इरादों की मजबूती की अलग ही मिसाल पेश की है. राजस्थान के चित्तौडगढ़ जिले के घोसुंदा निवासी एलन स्टूडेंट रामलाल भोई ने डॉक्टर बनने की ऐसी जिद पकड़ी कि किसी भी परिस्थिति के आगे न झुका न रुका. रामलाल ने NEET UG परीक्षा 632 नंबरों के साथ क्रैक की है. उन्‍हें कैटेगरी रैंक 5137 तथा ऑल इंडिया रैंक 12901 मिली है.

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रामलाल भोई ने एलन कोटा में पढ़कर नीट क्रैक किया है और अब वह परिवार के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं. चुनौतियों की बात करें तो शुरुआत बचपन से ही हो गई थी. 11 वर्ष की अबोध उम्र में ही रामलाल का बाल विवाह हो गया था, तब वह कक्षा 6 में ही था. बाल विवाह के बाद भी उसने पढ़ना नहीं छोड़ा. समाज की पिछड़ी सोच के चलते पढ़ाई करना भी आसान नहीं था. 

पिता नहीं चाहते थे कि 10वीं के बाद बेटा पढ़ाई करे लेकिन बेटे की जिद थी कि आगे पढ़ाई करनी है. लोगों के बहकावे में आकर एक बार तो पिता ने रामलाल को पीटा और पढ़ाई नहीं करने की बात कही, लेकिन रामलाल के संकल्प का स्तर अलग ही था. उसने पढ़ाई जारी रखी. दोस्त के पिता ने आकर समझाया तो रामलाल के पिता ने आगे की पढ़ाई में सहयोग किया. पढ़ाई के लिए परिवार माना तो कर्जा लेकर पढ़ाया. जुनूनी बेटे ने भी खूब मेहनत की और आखिरकार 5वें प्रयास में NEET क्रैक कर दिखाया.

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पत्नी ने खुद की पढ़ाई छोड़ी
अपनी सफलता पर रामलाल ने कहा, 'मेरी शादी आज की उम्र में होती तो विरोध भी करता, लेकिन तब मुझे क्या पता था, क्या हो रहा है? मुझे तो मजा आ रहा था. लोग नाच रहे थे, मेहमान आ-जा रहे थे, मेरी शादी हो गई. उम्र 11 साल थी और कक्षा 6 में पढ़ता था. मेरी पत्नी भी हम उम्र है. करीब छह साल पहले पत्नी ने ससुराल में आकर रहना शुरू कर दिया. वो खुद 10वीं तक पढ़ी हुई है. हमारे समाज में शिक्षा को इतना महत्व नहीं दिया जाता और ऐसे में कोई लड़की 10वीं तक पढ़ ले तो बहुत बड़ी बात मानी जाती है. वो भी 10वीं के बाद पढ़ना चाहती थी लेकिन मेरी पढ़ाई के लिए उसने खुद का त्याग किया और ससुराल की जिम्मेदारियां संभाली. मैं लगातार नीट की तैयारी में लगा हुआ था और सलेक्शन हो नहीं रहा था. इस वजह से हमारे बीच काफी झगड़े होते थे, लेकिन मेरा जुनून देखकर उसने मेरा साथ दिया. NEET UG 2023 परीक्षा से 6 माह पूर्व ही उसने बेटी को जन्म दिया है.

नीट के बारे में पता नहीं था
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी. गांव के ही सरकारी स्कूल से 10वीं कक्षा 74 प्रतिशत नंबरों से पास की थी. इसके बाद 11वीं में मेरा दोस्त एग्रीकल्चर सब्जेक्ट ले रहा था तो मैं भी उसके साथ उदयपुर चला गया. एग्रीकल्चर विषय में एडमिशन लेने के लिए उदयपुर गया, लेकिन वहां जाने के बाद शिक्षकों ने बॉयोलॉजी विषय और नीट परीक्षा के बारे में जानकारी दी. मुझे तब तक नहीं पता था कि नीट जैसा कोई एग्जाम देने के बाद डॉक्टर बनते हैं. फिर मैंने बॉयोलॉजी विषय के साथ 11वीं और 12वीं कक्षा पास की. इस दौरान मैं समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित अम्बेडकर छात्रावास में रहता था, जो कि निशुल्क था.

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पढ़ाई के लिए घर से भागा
नीट की तैयारी के लिए कोटा आने लगा तो लोगों ने कहा कि 'क्या करेगा पढ़कर?' माता-पिता दोनों निरक्षर हैं. 10वीं कक्षा के बाद पिता पढ़ाना नहीं चाहते थे. इसके लिए उन्होनें मुझे मारा तक लेकिन, मैं घर से भागकर उदयपुर गया और वहां एडमिशन लिया. बाद में दोस्त के पिता ने उन्हें समझाया तो वे माने. मैंने वर्ष 2019 में 12वीं कक्षा 81 प्रतिशत नंबरों से पास की थी. 

आर्थिक स्थिति काफी कमजोर 
राजस्थान के चित्तौड़गढ जिले के घोसुंदा में भेड़च नदी किनारे हमारा कच्चा घर बना हुआ है. छत पर केलुवे डले हुए हैं. बिजली कनेक्शन है लेकिन आधे समय बिजली गुल रहती है. गांव के सरकारी नल से पानी भरकर लाते हैं. पिता गणेश भोई दूसरों के खेत जोतते हैं तो मां कमला देवी खेत से मिलने वाले चारे को रोजाना चित्तौड़गढ़ ले जाकर बेचती हैं. मम्मी-पापा दोनों का मजदूर कार्ड भी बना हुआ है. कभी-कभार काम आ जाता है तो मजदूरी करने चले जाते हैं. माता-पिता के अलावा हम पांच भाई-बहिन हैं. दो बहिनों की शादी हो चुकी है.

एलन की शिक्षा और सहयोग 
मैंने NEET का पहला अटेम्प्ट 12वीं कक्षा के साथ ही वर्ष 2019 में दिया था. सेल्फ स्टडी से 350 मार्क्स हासिल किए. दूसरे अटेम्प्ट में 320 मार्क्स आए. दूसरी बार मार्क्स पहली बार से भी कम आए लेकिन जुनून था कि बनना तो डॉक्टर ही है. तीसरे प्रयास में 362 मार्क्स आए. स्कूल के शिक्षकों ने एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा में एडमिशन लेने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि मैं NEET क्रैक कर सकता हूं. पापा की स्थिति नहीं थी कि मुझे कोटा भेज सकें. एलन में आने के बाद मेरी परफॅार्मेन्स में इम्प्रूवमेंट आया और नीट 2022 में 490 मार्क्स आए. मैंने एक बार आखिरी मौका खुद को दिया और नीट 2023 की तैयारी में जुटा. इस बार एलन ने भी पूरा साथ दिया और मुझे फीस में 70 प्रतिशत की रियायत दी. मैं कोटा में किराए का कमरा लेकर रहता था. पांचवे प्रयास में मुझे कामयाबी मिली.

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बेटे ने आंखें खोली 
पिता गणेश भोई ने बताया, 'हमारे समाज में पढ़ाई को इतना महत्व नहीं देते और बेटियों को पढ़ाने के लिए तो समाज सख्त खिलाफ है. बेटे ने हमें पढ़ाई का महत्व बताया. आज वो डॉक्टर बन रहा है तो हमारी खुशी की सीमा नहीं है. अब समाज और गांव वाले कहते हैं कि रामलाल की जिद पूरी हो गई, वो डॉक्टर बन रहा है. पांच बच्चे हैं, अभी छोटी बेटियां पढ़ रही हैं. दो बेटियों की शादी हो चुकी है. बेटियों की अच्छी पढ़ाई का प्रयास करेंगे.

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ.नवीन माहेश्वरी ने कहा, 'रामलाल दृढ़ इच्छाशक्ति की मजबूत मिसाल है. बाल विवाह, परिवार के विरोध बावजूद लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हुए आगे बढ़ते रहना, अंततः अपने लक्ष्य को हासिल करना. अच्छी बात है कि हम रामलाल की सफलता में सहभागी बन सके. रामलाल पूरे समाज के लिए उदाहरण बनेगा.'

 

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