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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) की अब तक की प्रगति और उसके सफल कार्यान्वयन को आंकने के लिए 29-30 जुलाई को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में स्कूलों से लेकर टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट्स तक शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों की भागीदारी देखी जाएगी.
इस बैठक का उद्देश्य भारत में एक परिवर्तनकारी और मजबूत शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए नवीन दृष्टिकोणों को प्रदर्शित करना और उन्हें उद्योग से कैसे जोड़ा जा सकता है, इसका प्रदर्शन करना है. केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने पीटीआई से कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति इंडस्ट्री को अनुसंधान और इनोवेशन से जोड़ने पर जोर देती है.
इसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में सुधार करना और आवश्यक कौशल विकसित करना है जो दुनिया की बदलती मांगों के अनुरूप हो. बैठक में दर्शाया जाएगा कि विकास और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए हरित हाइड्रोजन के उपयोग और बिना ड्राइवर के कार जैसे इनोवेशन को इंडस्ट्री से कैसे जोड़ा जा सकता है.
इंडियन एजुकेशन का अंतर्राष्ट्रीयकरण
एनईपी के प्रमुख उद्देश्यों में से एक भारत की शिक्षा प्रणाली का इंटरनेशनलाइजेशन करना है. इसका लक्ष्य प्रत्येक छात्र की क्रिएटिव कैपेसिटी को निखारना और एक समावेशी शिक्षण वातावरण को बढ़ावा देना है.
केंद्रीय दिशानिर्देश, राज्य कार्यान्वयन
कुछ राज्य उच्च शिक्षा विभागों द्वारा लागू किए गए '4+1' फॉर्मूले (चार साल का ऑनर्स कोर्स और एक साल का स्नातकोत्तर कोर्स) के बारे में मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय नीति दिशानिर्देश प्रदान करती है, लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है.
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2047 तक भारत की 'ज्ञान राष्ट्र' बनने की आकांक्षा, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्पना की है, के लिए एनईपी 2020 के सफल कार्यान्वयन की आवश्यकता है. यह नीति भारत को तेजी से बदलती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए तैयार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है कि देश पीछे न रहे.
मातृभाषा शिक्षा पर जोर
एनईपी विशेषकर प्रारंभिक चरण और स्कूल स्तर तक मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने की वकालत करती है. परिचित भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित करने से, छात्र अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने और विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सक्षम होते हैं.
21 जुलाई को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 पर बात करते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनईपी को 29 जुलाई 2023 को तीन साल पूरे हो जाएंगे. 2021 जुलाई यानी दो साल पहले मुझे यह दायित्व मिला था. इसके बाद 'कोरोना काल' की वजह से इसे लागू करने में जो प्रोग्रेस होनी चाहिए थी, हो नहीं पाई. लेकिन मैं इसे तीन साल ही मानता हूं. मैं मानता हूं कि आजादी के बाद सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करते हुए यह देश की सर्वसम्मत मसौदा बन चुका है. एनईपी की सिफारिशों के आधार पर तीन बड़ी चीजें हुई हैं.
उन्होंने कहा 'शिक्षा इतना व्यापक विषय है कि इसमें कुछ समय लगेगा. हालांकि, पिछले दो वर्षों में, ईसीसी (प्रारंभिक बचपन देखभाल) पहलू में बड़े बदलाव हुए हैं, दूसरा एनईपी-अनुशंसित पाठ्यपुस्तकें भी विकसित की गई हैं और सीबीएसई ने शिक्षा व्यवस्था को बहुभाषी बनाने की ओर एक कदम बढ़ाया है. 12वीं तक के छात्रों को क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई करने का ऑप्शन दिया है. तीसरा हाल ही में, हमारी कैबिनेट ने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) को मंजूरी दी है. जब बुनियादी बेसिक साइंज रिसर्च की बात आती है तो भारत में एक आदर्श बदलाव होने जा रहा है. जब अनुसंधान की बात आती है तो आजादी के बाद से 75 वर्षों तक हम एक 'उपभोक्ता अर्थव्यवस्था' रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि हमें साइंस और टेक्नोलॉजी की समझ नहीं है.'
उन्होंने वैक्सीनेशन, फूड सेफ्टी और हाउसिंग खाद्य सुरक्षा और आवास में भारत की सफलता की ओर इशारा करते हुआ कहा कि शिक्षा पर हमारा खर्च जीडीपी का 4.64 प्रतिशत है जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती है, इस मुद्दे पर हमारा खर्च बढ़ेगा. अगले पांच वर्षों में, एनआरएफ के तहत, हम साइंस रिसर्च पर 50,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे.