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इस राज्य के स्कूलों में जारी रहेगी 'No Detention Policy', फेल नहीं होंगे 8वीं कक्षा तक के बच्चे

तमिलनाडु परीक्षा में असफल 5वीं-8वीं के विद्यार्थियों को ‘अनुत्तीर्ण न करने की नीति’ का पालन करना जारी रखेगा. स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने सोमवार को यह जानकारी दी है.

No Detention Policy continues in Tamil Nadu (Image: Getty) No Detention Policy continues in Tamil Nadu (Image: Getty)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:33 AM IST

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक अहम फैसला लेते हुए 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत अब कक्षा 5 और 8 के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा में असफल होने पर अनुत्तीर्ण किया जाएगा. असफल छात्रों को दो महीने के अंदर पुनः परीक्षा देने का अवसर मिलेगा, लेकिन यदि वे पुनः असफल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में पदोन्नत नहीं किया जाएगा. हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया है और राज्य में 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने का निर्णय लिया है.

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तमिलनाडु के स्कूलों में जारी रहेगी पॉलिसी

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के इस फैसले के बाद तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री, अंबिल महेश पोय्यामोझी ने राज्य में 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने का ऐलान किया है. मंत्री ने सोमवार को कहा कि तमिलनाडु कक्षा 8 तक 'नो डिटेंशन नीति' को बनाए रखेगा. केंद्रीय सरकार के फैसले ने, जिसके तहत कक्षा 5 और 8 में परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को उसी कक्षा में रोकने की अनुमति दी गई है, गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी रुकावट पैदा कर दी है. यह स्थिति निंदनीय है.

मंत्री ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पालन नहीं करता और केंद्र सरकार का यह निर्णय केवल उन्हीं स्कूलों पर लागू होगा, जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में आते हैं. तमिलनाडु में यह नीति प्रभावित नहीं होगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में किसी प्रकार की भ्रांति की आवश्यकता नहीं है, और राज्य अपनी मौजूदा प्रणाली को जारी रखेगा.

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क्या था इस पॉलिसी में 

नो डिटेंशन पॉलिसी के अनुसार 6 से 14 साल तक अन‍िवार्य श‍िक्षा के तहत किसी भी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चे को आठवीं तक प्रारंभिक शिक्षा होने तक किसी भी कक्षा में दोबारा नहीं पढ़ाया जाएगा. अब इसे हटाते हुए फेल होने वाले बच्चों को दो माह के अंदर फिर से परीक्षा देकर अपने प्रदर्शन में सुधार करने का एक और मौका मिलेगा

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