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भारत में केवल 19 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा: UNESCO की रिपोर्ट

Internet Connectivity In Schools: UNESCO की स्टेट एजुकेशन रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत के स्कूलों में कंप्यूटिंग उपकरणों उपलब्धता केवल 22 प्रतिशत ही पाई गई है. शहरी और ग्रामीण स्कूलों के बीच अगर इसकी तुलना करें तो ये आंकड़ा 43 और 18 प्रतिशत है. वहीं पूरे भारत में केवल 19 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा है.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 7:06 PM IST
  • केवल 22 प्रतिशत स्कूलों में ही कंप्यूटिंग उपकरण
  • पिछले कुछ सालों में छात्र शिक्षक अनुपात में हुआ है सुधार
  • 65 प्रतिशत शिक्षक 44 साल से कम उम्र के

Internet Connectivity In Schools: भारत में केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्थाओं को बेहतर करने का लगातार दावा करती रही हैं. सरकारों का कहना है कि उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को वे सारी सुविधाएं मुहैया कराई हैं, जिनकी उन्हें सख्त जरूरत है. हालांकि इसपर सामने आई UNESCO की ताजा रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कहती नजर आ रही है.

केवल 19 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट की व्यवस्था

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पिछले कुछ सालों में भारत समेत पूरी दुनिया के शिक्षण व्यवस्थाओं में नई-नई टेक्नोलॉजी का उपयोग काफी तेजी से बढ़ा है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई में अब कंप्यूटिंग उपकरणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है. UNESCO की स्टेट एजुकेशन रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत के स्कूलों में कंप्यूटिंग उपकरणों की उपलब्धता केवल 22 प्रतिशत ही पाई गई है.  शहरी और ग्रामीण स्कूलों के बीच अगर इसकी तुलना करें तो ये आंकड़ा 43 और 18 प्रतिशत है. वहीं पूरे भारत में केवल 19 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की सुविधा मौजूद है. आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों के 42 प्रतिशत तो ग्रामीण इलाकों के मात्र 18 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट कनेक्टिविटी की व्यवस्था है.

छात्र शिक्षक अनुपात में हुआ है सुधार

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE+) के अनुसार वर्ष 2018-19 में भारत में 16 लाख स्कूलों में कुल 94 लाख शिक्षक कार्यरत थे. 2019-20 शिक्षकों का ये आंकड़ा बढ़कर 97 लाख पहुंच गया.ये आंकड़ें स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात में  काफी हद तक सुधार होने की तरफ इशारा करते हैं. जहां 2013-14 में देशभर में 89 लाख शिक्षक थे, वहीं ये संख्या 2018 -19 में बढ़कर 94 लाख हो गया . 

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UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार निजी स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की मांग में 10 प्रतिशत तो सरकारी स्कूलों में 6 प्रतिशत तक कमी आई है. वहीं पूरे देश में कुल 1,10,971 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक के सहारे बच्चों के भविष्य को तराशने का काम किया जा रहा है.

स्कूली शिक्षा की बागडोर ज्यादातर महिलाओं के ही हाथ में

देशभर के स्कूलों में कार्यरत 94 लाख शिक्षकों में आधी संख्या महिलाओं की है, यानी की भारत में स्कूली शिक्षा की बागडोर ज्यादातर महिलाओं के ही हाथ में है. हालांकि राज्यों के हिसाब से इन संख्याओं में अंतर नजर आता है. केंद्र शासित प्रदेशों में महिला शिक्षकों की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई. इनमें चंडीगढ़ में 82 फीसदी, दिल्ली में 74 फीसदी, पुडुचेरी में 78 प्रतिशत और गोवा में महिला शिक्षकों की संख्या संख्या 80 प्रतिशत पाई गई. वहीं केरल में 78 फीसदी, पंजाब में 75 फीसदी और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इनकी संख्या 75 फीसदी है. हालाकि बिहार, असम झारखंड, त्रिपुरा और राजस्थान में ये संख्या गिरकर 40 फीसदी से भी नीचे पहुंच जाती है.

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन के एक अन्य डेटा के अनुसार में देश में तकरीबन 65 प्रतिशत शिक्षकों की आयु 44 साल से भी कम है. आंकडो़ं के अनुसार कुल देशभर के कुल शिक्षकों का औसत आयु 38 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

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