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'अच्छी शिक्षिका थीं, लेकिन सामाजिक नहीं' ट्रांसजेंडर टीचर को स्कूल से निकाला, SC ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता जेन कौशिक ने अपनी याचिका में बताया कि कैसे उन्हें यूपी में अपॉइंटमेंट लेटर दिया गया और वहां उन्होंने 6 दिनों तक पढ़ाया और फिर गुजरात में उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया और उनकी लैंगिक पहचान जानने के बाद स्कूल में एंट्री नहीं दी.

Supreme Court Supreme Court
कनु सारदा
  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश और गुजरात राज्य से नौकरी से हटाई गई एक ट्रांसजेंडर शिक्षक की याचिका पर जवाब मांगा है. जेंडर का खुलासा करने के बाद ट्रांसजेंडर शिक्षक को पद से हटा दिया था, जिसके बाद शिक्षक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उत्तर प्रदेश और गुजरात के अलग-अलग निजी स्कूलों ने शिक्षक की लैंगिक पहचान पता चलने के बाद सेवा समाप्त कर दी थी.

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सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा, "शिक्षक लिए कुछ करना होगा, जैसे ही वह नौकरी पर आती है, उसे नौकरी से हटा दिया जाता है, केवल एक ट्रांसजेंडर होने की वजह से उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया है और उसे एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए कहा गया है. हम इसे अंतिम निपटान के लिए अगले सोमवार सुनवाई करेंगे." इससे पहले शीर्ष अदालत ने गुजरात के जामनगर में स्कूल के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के खीरी स्थित एक अन्य निजी स्कूल के अध्यक्ष से जवाब मांगा था.

बेंच ने यूपी और गुजरात राज्य को इस बीच दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया. ट्रांसजेंडर शिक्षक की ओर से वकील ने बेंच को बताया कि जब उन्हें पता चला कि मैं एक ट्रांसजेंडर हूं तो उन्होंने मुझे स्कूल में घुसने से रोक दिया. उन्होंने उसे एक लेटर दिया जिसमें कहा गया कि आप अंग्रेजी की बहुत अच्छी शिक्षिका थीं, लेकिन सामाजिक शिक्षिका नहीं थीं. लेटर में आगे यह भी कहा गया कि जब महिला छात्रावास को पता चलता है कि वह एक ट्रांसजेंडर है तो वे सहज नहीं होते हैं. हालांकि, गुजरात सरकार की ओर से पेश वकील ने बेंच को बताया कि स्कूल ने उसे नौकरी की पेशकश की थी, लेकिन उसने इसे ठुकरा दिया.

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याचिकाकर्ता जेन कौशिक ने अपनी याचिका में बताया कि कैसे उन्हें यूपी में अपॉइंटमेंट लेटर दिया गया और वहां उन्होंने 6 दिनों तक पढ़ाया और फिर गुजरात में उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया और उनकी लैंगिक पहचान जानने के बाद स्कूल में आने से रोक दिया गया. याचिकाकर्ता ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी है और अपनी लैंगिक पहचान के कारण होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न की ओर इशारा किया है. याचिका में केंद्र सरकार से उचित दिशानिर्देश की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी अन्य ट्रांसजेंडर को उन कठिनाइयों का सामना न करना पड़े जिनसे वह गुजर रही है.

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