
विदेश में इंडियन एजुकेशन सिस्टम की ब्रांड वेल्यू क्या है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि आईआईटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को भविष्य में ग्लोबल लेवल की कंपनियों का सीईओ माना जाता है. केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक किस्से शेयर करते हुए यह बात कही है. उनका कहना है कि भारत को नंबर 1 इकोनॉमी बनने के लिए नॉलेज एजुकेशन सिस्टम की शुरुआत कर दी है. आईआईटी मद्रास और आईआईटी दिल्ली समेत अन्य इंडियन इंस्टीट्यूशन का बाहर जाना इसका पहला कदम है.
दरअसल, 21 जुलाई को नई दिल्ली में इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2023 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और इंडिया टुडे ग्रुप के संपादकीय निदेशक (प्रकाशन) राज चेंगप्पा के बीच कई मुद्दों पर बातचीत हुई. उनकी बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन से लेकर इंडियन एजुकेशन मॉडल शामिल हैं.
21वीं सदी में नॉलेज बेस इकोनॉमी अभियान की अगुवाई करेगा भारत
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इंडिया टुडे ग्रुप के संपादकीय निदेशक राज चेंगप्पा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आईआईटीज का विदेश में जाने के पीछे की वजह पूछी थी. इसका जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे देश में जो नॉलेज की जर्नी है वो 10 हजार साल पुरानी है. हालांकि यह अलग बात है कि इसकी प्रजेंटेशन, पैकेजिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स... ये शायद हम वेस्टर्न मॉडल में कर नहीं पाए. हालांकि मैं वो दिन दूर नहीं देखता कि 21वीं सदी में नॉलेज बेस इकोनॉमी अभियान की अगुवाई भारत करेगा.
उन्होंने कहा कि हम आने वाले दिनों में दुनिया में 5 से नंबर 3 और फिर नंबर 1 की इकोनॉमी बनेंगे. हमारा इकोनॉमी मॉडल इसी नॉलेज इको सिस्टम से डेवलेप होकर आएगा. आईआईटी और अन्य इंस्टीट्यूशन का बाहर जाना इसी की शुरुआत है.
बता दें कि हाल ही में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के अनुरूप, म्युच्युअल प्रोस्पेरिटी और ग्लोबल प्रोग्रेस को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मजबूत दोस्ती के रूप में आईआईटी-दिल्ली का अबू धाबी में कैंपस स्थापित किया गया है. इससे पहले आईआईटी मद्रास का तंजानिया के जंजीबार में कैंपस बनाया गया था.
भारतीय शिक्षण संस्थानों की ब्रांडिंग समझिए
एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि यूएई के कुछ स्टूडेंट्स बूट कैंप में आईआईटी दिल्ली आए थे. उनके साथ वहां के एक मंत्री भी आए थे. वो अपने स्टूडेंट्स वो समझाते हुए बोल रहे थे कि तुम कहां हो, तुम आईआईटी दिल्ली में हो, इसका मतलब समझते हो, इसका मतलब है कि आप सभी भविष्य में मल्टी नेशनल कंपनियों के सीईओ हो. आईआईटी दिल्ली में आओगे तो आने वाले दिनों ग्लोबल कंपनियों के सीईओ बनोगे. शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये आईआईटी, डीयू और अन्य भारतीय शिक्षण संस्थानों की ब्रांडिंग है.
छात्र सुसाइड कर रहे हैं, इन हालातों को कैसे हैंडल करेंगे?
कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्री से बात करते हुए पूछा गया कि हायर एजुकेशन के बारे में अगर बात की जाएगी जिसमें आईआईटीज को भी मिला लीजिए, छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, 35 छात्रों ने सुसाइड किया है. इस तरह हालातों को कैसे हैंडल करेंगे. इसपर उन्होंने अपने जवाब कहा कि वो छात्र नासमझ है, जो ऐसे कदम उठा लेता है लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसकी है? सबसे पहले जिम्मेदारी मेरी है, मैं इसे स्वीकार करता हूं. शिक्षा विभाग का इंचार्ज होने के नाते सबसे ज्यादा जिम्मदारी मेरी है, मेरे संस्थानों की है, फिर सोसाइटी की है, कॉलेज की जिम्मेदारी है कि छात्र ऐसे कदम न उठाए.
उन्होंने आगे बताया कि मैंने आईआईटी के कुछ मित्रों को बुलाकर पूछा भी कि ऐसा क्यों हो रहा है. तब मुझे बताया कि आईआईटी के स्टूडेंट-टीचर का रेशो है 1:10 है यानी एक टीचर के नीचे 10 बच्चे हैं. अगर अगर टीचर या प्रोफेसर के अंडर 10 बच्चे हैं तो वो 24x7 उनकी खबर रख सकते हैं. हालांकि उनकी खबर रखने की कई व्यवस्थाएं भी हैं, काउंसलिंग है, इसके बावजूद भी ऐसी घटनाए होती हैं. छात्रों के लिए सोसाइटी, संस्थानों और एजुकेशन एडमिनिस्ट्रेशन को उनकी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी और छात्रों को टेंशन फ्री रखने की कोशिश करनी होगी.
दो साल बाद एनईपी 2020 को लागू करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची?
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एनईपी को 29 जुलाई 2023 को तीन साल पूरे हो जाएंगे. 2021 जुलाई यानी दो साल पहले मुझे यह दायित्व मिला था. इसके बाद 'कोरोना काल' की वजह से इसे लागू करने में जो प्रोग्रेस होनी चाहिए थी, हो नहीं पाई. लेकिन मैं इसे तीन साल ही मानता हूं. मैं मानता हूं कि आजादी के बाद सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करते हुए यह देश की सर्वसम्मत मसौदा बन चुका है. एनईपी की सिफारिशों के आधार पर तीन बड़ी चीजें हुई हैं.
उन्होंने कहा 'शिक्षा इतना व्यापक विषय है कि इसमें कुछ समय लगेगा. हालांकि, पिछले दो वर्षों में, ईसीसी (प्रारंभिक बचपन देखभाल) पहलू में बड़े बदलाव हुए हैं, दूसरा एनईपी-अनुशंसित पाठ्यपुस्तकें भी विकसित की गई हैं और सीबीएसई ने शिक्षा व्यवस्था को बहुभाषी बनाने की ओर एक कदम बढ़ाया है. 12वीं तक के छात्रों को क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई करने का ऑप्शन दिया है. तीसरा हाल ही में, हमारी कैबिनेट ने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) को मंजूरी दी है. जब बुनियादी बेसिक साइंज रिसर्च की बात आती है तो भारत में एक आदर्श बदलाव होने जा रहा है. जब अनुसंधान की बात आती है तो आजादी के बाद से 75 वर्षों तक हम एक 'उपभोक्ता अर्थव्यवस्था' रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि हमें साइंस और टेक्नोलॉजी की समझ नहीं है.'
उन्होंने वैक्सीनेशन, फूड सेफ्टी और हाउसिंग खाद्य सुरक्षा और आवास में भारत की सफलता की ओर इशारा किया. शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा पर हमारा खर्च जीडीपी का 4.64 प्रतिशत है जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती है, इस मुद्दे पर हमारा खर्च बढ़ेगा. अगले पांच वर्षों में, एनआरएफ के तहत, हम साइंस रिसर्च पर 50,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे.