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उत्तराखंड में बन रहा 'लाइब्रेरी गांव', पुस्तक मंदिर में मिलेंगी ये सुविधाएं

उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में एक ऐसा गांव तैयार किया जा रहा है, जिसकी थीम पूरी तरह से पुस्तकालय पर निर्भर है. यानी यह भारत का पहला लाइब्रेरी गांव तैयार किया जा रहा है.

उत्तराखंड में बन रहा 'लाइब्रेरी गांव' उत्तराखंड में बन रहा 'लाइब्रेरी गांव'
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

किताबों की दुनिया खास होती है, यहां एंट्री मिल जाने से मन को शांति मिलने के साथ-साथ ज्ञान की प्राप्ति भी होती है. तमाम कोशिशों के बाद भी हर कोई इस दुनिया तक नहीं पहुंच पाता है, ऐसे में ज़रूरी है कि रास्ते बनाए जाएं ताकि भविष्य की पीढ़ी इनकी ओर बढ़ सके. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सुविधाएं मिलना मुश्किल है, ऐसे में यहां अब किताबों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक नया कदम उठाया जा रहा है. 

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उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में एक ऐसा गांव तैयार किया जा रहा है, जिसकी थीम पूरी तरह से पुस्तकालय पर निर्भर है. यानी यह भारत का पहला लाइब्रेरी गांव तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए एक फाउंडेशन काम कर रहा है. साथ ही इसी गांव से निकलकर बड़े शहरों में नौकरी करने वाले युवा ही वापस अपने गांव को एक नई पहचान देने में जुट गए हैं. 

किसी गांव में पुस्तालयों का निर्माण कोई नई बात नहीं है, लेकिन मणिगुह गांव में चीज़ों को एक कदम आगे बढ़ाया जा रहा है. ‘हमारा गांव घर फाउंडेशन’ के सहयोग से बन रही इस लाइब्रेरी में गांव के बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास और मुफ़्त कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था भी की जा रही है. गांव वालों के साथ मिलकर ही इसकी शुरुआत की गई, जहां अभी 4 हज़ार से ज्यादा किताबें उपलब्ध हैं. हालांकि, जनवरी 2023 में इसका आधिकारिक उद्घाटन किया जाएगा. 

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खास बात ये है कि गांव में अलग-अलग जगहों पर बनने वाले इन पुस्तकालयों को पुस्तक मंदिर का नाम दिया गया है. इन छोटे मंदिरों में पुस्तकें रखी जायेंगी और इन्हें रीडिंग स्पॉट की तरह उपयोग में लाया जायेगा. इस प्रकार पुस्तकालय गांव को एक पुस्तक तीर्थ की तरह विकसित किया जाएगा जो पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण होगा. 

बता दें कि मणिगुह गांव अपने प्राकृतिक संसाधनों के लिए भी जाना जाता है. यहां खुमानी, संतरे, अंजीर और अन्य फलों का बहुतायत होता है. इस पूरे प्रोजेक्ट को अमली-जामा पहनाने वाले ‘हमारा गांव घर फाउंडेशन’ के को-फाउंडर सुमन मिश्र बताते हैं कि उनका अनुभव इस से बिल्कुल अलग रहा. गांव के बच्चों में शिलान्यास के दिन पुस्तकालय में काफ़ी वक़्त बिताया साथ ही अगले दिन भी लाइब्रेरी बंद होने के बाद भी बच्चे स्कूल बंद होते ही लाइब्रेरी पहुंच गए थे. 
 
गांव की लाइब्रेरी में खास जोर उत्तराखंड की धरती से निकलने वाले लेखकों की किताबों पर भी किया गया है. ललित मोहन थपलियाल, भगवान सिंह, श्री शशिभूषण द्विवेदी, अनीसुर्रहमान, ख़ुर्शीद आलम जैसे वरिष्ट लेखकों के निजी संग्रह की चुनिदा किताबें यहां इस पुस्तकालय में उपलब्ध हैं, वहीं अविनाश मिश्र जैसे युवा कवियों के निजी संग्रह से भी इस पुस्तकालय में पुस्तकें उपलब्ध हैं. 

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