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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने वैशाली एस हिवासे को सड़क निर्माण कंपनी (आरसीसी) की पहली महिला कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) के रूप में भारत-चीन सीमा के साथ आगे कनेक्टिविटी प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है. बुधवार को बीआरओ के अधिकारियों ने ये जानकारी दी.
ये जिम्मेदारी वैशाली एस हिवासे के अब तक के कार्यकाल को देखते हुए सौंपी गई है. वैशाली के पास एम टेक की डिग्री है और मूलत: वो महाराष्ट्र के वर्धा से हैं. अधिकारियों ने कहा कि वैशाली करगिल क्षेत्र में सफल कार्यकाल के बाद सीओ के रूप में नया कार्यभार संभाल रही हैं.
एक अधिकारिक ट्वीट में कहा गया कि ये बीआरओ की ओर से की गई एक बेहद अच्छी शुरुआत है जो नए युग के सशक्तिकरण के लिए आगे बढ़ेगी, जो महिला अधिकारियों को सबसे कठिन कामों में आगे आने के लिए प्रेरित करेगा. बता दें कि वैशाली एक कार्यकारी इंजीनियर का पद रखती हैं.
वैशाली एक चुनौतीपूर्ण वातावरण में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं. बीआरओ ने ट्विटर पर कहा कि दो-हजार फीट और उससे अधिक की दूरी पर हवा के साथ अलग-अलग जगहों पर सड़क का संरेखण कुछ दुर्जेय दर्रों और कठोर चट्टानों के साथ कठिन इलाकों से होकर गुजरता है.
बता दें कि पिछले साल, लद्दाख सेक्टर में भारत और चीन के बीच कोविड -19 महामारी और सीमा गतिरोध के बीच चीन की सीमा के साथ बीआरओ ने प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सड़कों और सुरंगों का निर्माण किया था.
बीआरओ लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में रणनीतिक सड़कों का निर्माण कर रहा है. दिसंबर 2022 तक चीन की सीमा के साथ सौंपी गई सभी 61 रणनीतिक सड़कों को पूरा करने की योजना बना रहा है ताकि आगे के क्षेत्रों में रास्ता आसान किया जा सके.