
बचपन से ही माता-पिता बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने लगते हैं. बच्चा पैदा होने के 3-4 साल बाद ही उसका स्कूल में दाखिला करवा दिया जाता है. स्कूली शिक्षा शुरू होते ही होमवर्क, ट्यूशन, सिलेबस कंप्लीट कराना, अच्छे मार्क्स लाने आदि चैलेंज बच्चे के सामने आ जाता है. स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ माता-पिता छोटे बच्चों को घर पर भी पढ़ाते हैं. पढ़ाते वक्त माता-पिता या ट्यूशन टीचर बच्चों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं उसकी छाप बच्चे के मन पर हमेशा के लिए पड़ जाती है. सोशल मीडिया पर कई वायरल वीडियोज़ में देखा गया है कि मां-बांप का बच्चों को पढ़ाने का तरीका काफी डरा देने वाले है.
डांट-फटकार कम कर सकती है बच्चे का आत्मविश्ववास
अक्सर मां-बांप बच्चों को डांट फटकारकर होमवर्क कंप्लीट करवाते हैं. सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें महिला बच्चे को डांटे जा रही हैं और बच्चा आंखों में आंसू और हाथ में कलम लिए पढा़ई करता दिख रहा है साथ ही अपनी मां से कह रहा है कि आप डाटेंगी तो नहीं? इस व्यव्हार से बच्चा अपना होमवर्क तो पूरा कर लेगा लेकिन यह डांट उसके दिमाग और आत्मविश्वास पर बुरा असर डाल सकती है.
गिल्ट और डिप्रेशन में रह सकता है आपका बच्चा
भोपाल के जाने-माने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से हमनें इस बारे में बात की और उन्होंने बताया कि डांट की वजह से बच्चे पढ़ाई तो करते हैं लेकिन उनके मन में एक डर बैठ जाता है. घर में डांट खाने की वजह से वह स्कूल में टीचर द्वारा किए गए गलत व्यव्हार को भी सही समझ बैठते हैं. गलत ना होने पर भी बच्चे मानते हैं कि उनकी ही गलती होगी. ऐसा होने पर उनके मन में एक गिल्ट बैठ जाता है. अपना आत्मविश्वास खोने की वजह से बच्चे सही बात पर अपना स्टैंड लेने से कतराते हैं. बहुत अधिक डांटने या मारने पर उनका आत्मविश्वास और जिंदादिल सोच पर असर पड़ेगा. ऐसी हालत में वे अपनी हरकतों की वजह से डांट सुनने से बचने की कोशिश करेंगे और अपने मन की बातें नहीं बता सकेंगे. मान लीजिए अगर स्कूल या ट्यूशन में बच्चे के साथ कुछ गलत भी हो रहा होगा तो वो अपने घर पर कभी नहीं बता पाएंगे. इस वजह से कई बार छोटे बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं.
गलत बात पर बच्चे को डांट रहे हैं तो होगी 2 गुना प्यार देने की जरूरत
सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ राजीव मेहता का कहना है कि बच्चों को दर्दनाक और कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक पालन-पोषण की जरूरत होती है. पालन-पोषण बच्चे को महत्वपूर्ण, चुनौतीपूर्ण समस्याओं का सामना करने का आत्मविश्वास देता है. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो डांट-फटकार से बच्चा ट्रॉमा में जा सकता है. अगर आप बच्चे को डांट रहे हैं तो ध्यान दें कि आपको फिर उसे 2 गुना प्यार देना होगा. गलत बात पर बच्चे को डांटना सही है लेकिन बदले में बच्चे को रिवॉर्ड और लाड़ प्यार की जरूरत होती है, इससे बच्चा अपने दिमाग में चल रहे स्ट्रेस को मैनेज कर लेता है. अगर पढ़ाते वक्त आपका व्यवहार बच्चे के प्रति नाकारत्मक रहा वह भी यही भाषा सीख जाएगा. ऐसा ना हो कि आपका बच्चा अग्रेसिव हो जाए और गलत रास्ते पर चल पड़े. पढ़ाई में भी बच्चे को अपने माता-पिता की सपोर्ट की जरूरत होती है.
अगर आप अग्रेसिव हैं तो बच्चों को पढ़ाने से बचें
सबसे पहले तो यह समझिए कि अगर आप कोई टीचर नहीं है, आप किंडरगार्डन स्कूल में पढ़ाते नहीं है तो अपने बच्चे को पढ़ाने की कोशिश ना करें. खासकर तब जब आपकी मेंटल हेल्थ खराब हो या आप अग्रेसिव नेचर के हों, ऐसी स्थिति में आपको नहीं पता होगा कि बच्चे के साथ कैसे डील करना है. बच्चे का मन काफी कोमल होता है, छोटी उम्र में वह चीजें सीख रहे हैं. बच्चे को नहीं पता कि चीजें डांट से या प्यार से सीखी जाती है, यह उसके मन पर निर्भर करता है. अगर आपके पास किंडर गार्डन टीचर की ट्रेनिंग नहीं है तो अपने बच्चे को ना पढ़ाएं. आप टीचर का सहारा ले सकते हैं लेकिन टीचर के व्यव्हार पर भी नजर बनाएं रखें.
छोटा बच्चा भी नोटिस करता है आपका व्यवहार
चिल्लाने और डांटने के बाद अपने और बच्चे के बीच प्यार को बनाए रखने के लिए उसके साथ प्यार और सावधानी से बात करें. 3-4 साल की उम्र एक मुश्किल भरी उम्र होती है. बच्चा इस बात पर बहुत ध्यान देता है कि आपका उसके प्रति व्यवहार कैसा है. यही उम्र है, जब बच्चे अपने बड़ों से अपने लिए सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद रखते हैं. कोशिश करें कि समझदारी और शांति से बच्चे को पढ़ाई करवाई जाएं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को डांटना बिल्कुल गलत है, लेकिन इसकी एक लिमिट होनी चाहिए. आप अपना फ्रसटेशन बच्चे के ऊपर ना निकालें.
बच्चों के दोस्त बनने की कोशिश करें
माता-पिता को बच्चे का दोस्त होना चाहिए, यह तो आपने सुना ही होगा. तो आप भी अपने बच्चे के साथ ऐसा रिलेशन बनाए रखने की कोशिश करें. अगर आपको बच्चे को पढ़ाने के लिए हमेशा डांट-फटकार का सहारा लेना पड़ता है तो इससे आपका बच्चा जुनूनी, सनकी या ग्रस्त बन सकता है. आप पढ़ाई के लिए बच्चे की मदद करें लेकिन उसके ऊपर प्रेशर ना बनाएं.