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20 साल की मधुरिमा ने कैंसर से जीती जंग, NEET में पाई सफलता, अब बनेगी डॉक्टर 

NEET Madhurima Success Story: त्रिपुरा की 20 साल की मधुरिमा ने कैंसर से जंग जीतकर NEET परीक्षा में सफलता पाई. उन्होंने स्टेज-3 कैंसर को हराकर डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया. मधुरिमा ने ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई की और 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में 96% अंक प्राप्त किए थे.

कैंसर से जंग जीत चुकी मधुरिमा ने मुश्किलों को पार करते हुए पहले ही प्रयास में NEET पास कर लिया कैंसर से जंग जीत चुकी मधुरिमा ने मुश्किलों को पार करते हुए पहले ही प्रयास में NEET पास कर लिया
aajtak.in
  • त्रिपुरा,
  • 29 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

NEET Success Story: मधुरिमा दत्ता की कहानी यह सिखाती है कि कठिन हालातों में भी अगर हिम्मत और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी मंजिल पाई जा सकती है.  कैंसर से जंग जीतकर NEET परीक्षा में सफलता पाने वाली 20 वर्षीय मधुरिमा दत्ता ने अपनी हिम्मत और जज्बे से एक मिसाल कायम की है. त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर की रहने वाली मधुरिमा दत्ता  ने स्टेज-3 कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराकर NEET परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने की ओर कदम बढ़ाया.

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कैंसर से शुरू हुई कठिन यात्रा

साल 2016 में, जब मधुरिमा सिर्फ 12 साल की थीं और छठी कक्षा में पढ़ती थीं, उन्हें "नॉन हॉजकिन्स लिंफोमा" नाम की कैंसर बीमारी का पता चला. उनका इलाज मुंबई के टाटा मेमोरियल और जसलोक अस्पताल में हुआ. उनकी मां, रत्ना दत्ता, हर कदम पर उनके साथ रहीं. उन्होंने बताया, “इलाज के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. हर बार इलाज के बाद भी छह महीने में बीमारी दोबारा लौट आती थी. डॉक्टरों ने हाई-डोज कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया. उनकी बड़ी बहन, हृतुरीमा का बोन मैरो मैच होने के कारण ट्रांसप्लांट संभव हो पाया. इसके बाद मधुरिमा दो महीने ICU में रहीं.”

खास इलाज और पढ़ाई का संघर्ष

इलाज के दौरान मधुरिमा को अमेरिका में बनी एक विशेष दवा दी गई, जो भारत में पहली बार किसी बच्चे को दी गई थी. उनके पिता, खोकन चंद्र बैद्य, और बड़ी बहन ने हर संभव सहयोग किया. पांच साल तक मुंबई में रहने के बावजूद, मधुरिमा ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. मधुरिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को दिया. स्कूल के शिक्षक उनके लिए किताबें मुंबई भेजते रहे. 

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मधुरिमा की मां रत्ना ने बताया, "मधुरिमा ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी घर से ही की और स्कूल नहीं गई. वह केवल परीक्षा देने के लिए स्कूल जाती थी, जिसके लिए उसके लिए एक अलग कमरे की व्यवस्था की गई थी. उसने उदयपुर के ब्रिलियंट स्टार स्कूल में अपनी शिक्षा पूरी की. स्कूल के शिक्षकों ने उसकी बहुत मदद की, यहां तक ​​कि उसके इलाज के दौरान मुंबई में किताबें भी भेजी. उनमें से कुछ तो उससे मिलने मुंबई भी आए. हम उसकी पढ़ाई को लेकर चिंतित थे, लेकिन वह डॉक्टर बनना चाहती थी. उसने उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए पढ़ाई जारी रखी और दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षा में 96% अंक हासिल किए. उसने ऑनलाइन कक्षाएं भी लीं और एलन करियर इंस्टीट्यूट के माध्यम से सेल्फ-स्टडी की. हम उसके परिणामों से बहुत खुश हैं, लेकिन उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं."

डॉक्टर बनने का सपना

मधुरिमा का सपना डॉक्टर बनने का था, और उन्होंने NEET परीक्षा में 279,066 ऑल इंडिया रैंक और राज्य में 295वीं रैंक हासिल की. उन्होंने कहा, “NEET की तैयारी करना हर छात्र के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन मेरे लिए यह शारीरिक और मानसिक संघर्ष दोनों था. मेरी कमज़ोर इम्युनिटी और बार-बार होने वाले संक्रमण के बावजूद मैंने हार नहीं मानी.”

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NEET की तैयारी करने वालों के लिए संदेश

मधुरिमा ने कहा, “NEET एक परीक्षा है जो आपकी धैर्य और मेहनत की परीक्षा लेती है. अपने परिश्रम पर भरोसा रखें, शांत रहें, और जो भी संसाधन आपके पास हैं, उनसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें.”

बहन हृतुरीमा भी बनी प्रेरणा

मधुरिमा की बहन हृतुरीमा भी NEET की टॉपर रही हैं. उन्होंने पहले ही प्रयास में 1,274वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी और अब दिल्ली के डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मेडिकल कॉलेज में MBBS के अंतिम वर्ष में हैं. हृतुरीमा ने कहा, “मधुरिमा की बीमारी के दौरान मैंने महसूस किया कि मुझे भी डॉक्टर बनकर समाज को कुछ लौटाना है.”

त्रिपुरा से तन्मय चक्रवर्ती की रिपोर्ट

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