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केरल की यूनिवर्सिटी में छात्राओं को मिलेगी पीरियड लीव, CM विजयन का ऐलान

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी यूनिवर्सिटी में गर्ल्स स्टूडेंट्स को पीरियड और मेटरनिटी लीव दी जाएगी. सीएम ने कहा कि एक बार फिर केरल ने देश के लिए एक मॉडल पेश किया है.

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो) केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • तिरुवनंतपुरम,
  • 20 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:23 AM IST

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ऐलान किया कि प्रदेश की यूनिवर्सिटी में छात्राओं को पीरियड और मैटरनिटी लीव दी जाएगी. सीएम विजयन ने कहा कि राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी संस्थानों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी.

सीएम विजयन ने इस फैसले की घोषणा सोशल मीडिया के जरिए की. उन्होंने कहा कि केरल सरकार का ये कदम देश में अपनी तरह का पहला कदम है. उनकी सरकार महिलाओं की समर्थक है. यह वामपंथी सरकार की समाज में लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का संकेत है.

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सीएम ने कहा कि एक बार फिर केरल ने देश के लिए एक मॉडल पेश किया है. हमारे उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी संस्थानों में पढ़ने वाली स्टूडेंट्स को पीरियड्स (मासिक धर्म) और मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) दिया जाएगा. यह कदम लैंगिक-न्यायपूर्ण समाज को साकार करने के लिए LDF सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है.

सीएम ने कहा कि वैसे तो पीरियड एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन यह महिलाओं को बहुत अधिक मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी पैदा करता है. इसलिए सरकार ने ये फैसला लिया है कि गर्ल्स स्टूडेंट्स की अनिवार्य उपस्थिति में 2 फीसदी की छूट दी जाएगी. 

विजयन ने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्राओं के लिए इस तरह का महिला हितैषी फैसला लिया है. इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी छात्राओं को अधिकतम 60 दिन का मातृत्व अवकाश देने का भी निर्णय लिया है.

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वहीं, उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने हाल ही में कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CUSAT) से अपनी गर्ल्स स्टूडेंट्स को लीव देने के संकेत दिए थे. साथ ही कहा था कि सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के दायरे में आने वाले सभी राज्य विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने का फैसला किया है.

वहीं, छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने 11 जनवरी को प्रत्येक सेमेस्टर में महिला छात्रों की उपस्थिति में कमी के लिए अतिरिक्त दो प्रतिशत की छूट दी थी.


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