
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्टूडेंट यूनियन की मांग के बाद प्रशासन ने कैंपस में जातिगत जनगणना करवाने का फैसला किया है. 16 दिनों तक कैंपस में हंगर स्ट्राइक हुई. इस दौरान स्टूडेंट्स ने मांग की थी कि कैंपस में कास्ट सेंसस करवाया जाए. इसके साथ ही छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई और मागें भी रखी थी. संस्थान ने स्टूडेंट्स की कुछ मांगो पर मंजूरी दे दी है और फैसला लिया है. स्वीकार की गई कई मांगों में एक 'जातिगत जनगणना' भी है, जो कई नजरिए से अहम है. अब सवाल उठता है कि कैंपस में जातिगत जनगणना के पीछे क्या वजह हो सकती है. हम जानने की कोशिश करेंगे कि छात्रों ने यह मांग क्यों उठाई और अगर ऐसा होता है, तो यह किस तरह से कैंपस के लिए फायदेमंद साबित होगा. इससे पहले जानते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की किन मांगों पर सहमति जताई है.
जेएनयू में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के दो हफ्ते बाद, प्रशासन ने सोमवार, 26 अगस्त को जातिगत जनगणना पर हामी भरी. JNUSU प्रेसिडेंट धनंजय ने aajtak.in के साथ बातचीत में बताया, 'कैंपस में अभी कई ऐसे पोस्ट हैं, जिसको एनएफएस (Not Found Suitable) कर दिया गया है. इसमें ज्यादातर ओबीसी, एससी, एसटी कैटेगरी की सीट्स हैं. इसके साथ ही, जो प्रमोशन हो रहे हैं, वो भी बहुत ही राजनीतिक ढंग से रोक दिए जा रहे हैं. हमारा सवाल है कि रिजर्वेशन फुलफिल हो रहा है या नहीं. इसके साथ ही जो डीन्स, वॉर्डेन बन रहे हैं, वो किस तरह के लोगों को दिया जा रहा है.'
उन्होंने आगे कहा कि समाज में जाति के आधार पर जो चल रहा है ऊंच-नीच, हमें आशंका है कि कहीं यूनिवर्सिटी कैंपस में भी तो वही नहीं चल रहा है. यह किसी विश्वविद्यालय के लिए बहुत जरूरी है. जातिगत जनगणना से पता चलेगा कि यूनिवर्सिटी में कितने प्रोफेसर्स ऊंची जातियों के हैं, कौन सा स्टाफ स्थायी है, कितने स्टाफ किस सोसायटी से आते हैं. हमारे इन सवालों में जातिगत जनगणना के पीछे के अहम मकसद हैं.
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स्टूडेंट्स का दावा है कि जातिगत जनगणना के बाद कैंपस में कम से कम डिस्क्रिमिनेश कम होगा. धनंजय कहते हैं, 'जब डेटा आता है, तो प्रशासन इस चीज से डरता है कि लोगों को पता है कि हमने गलत किया है. अगर डेटा रहेगा, तो सभी को पता चलेगा कि किसका हक मारा जा रहा है. हमारा सवाल सिर्फ ये नहीं है कि रिजर्वेशन फुलफिल हुआ या नहीं, अब सवाल ये भी है कि रिजर्व कैटेगरी के कितने लोग जनरल कैटेगरी में एडमिशन ले पाए हैं.'
JNU स्टूडेंट्स ने अपनी मांगों को लेकर 11 अगस्त को हंगर स्ट्राइक शुरू किया था. शुरू में 16 छात्रों ने भूख हड़ताल की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए इसमें दो लोग शामिल हुए- जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष धनंजय और पार्षद नीतीश कुमार. धनंजय का वजन कथित तौर पर पांच किलोग्राम से ज्यादा कम हो गया है और उन्हें पीलिया की भी शिकायत आई है. वहीं, नीतीश कुमार का वजन करीब सात किलोग्राम कम हो गया, उन्हें जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द की शिकायत बनी हुई है.