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बचपन में दूध बेचकर किया था गुजारा, अब चलाते हैं खुद का बैंक!

अपनी मेहनत और हुनर से कोई भी दुनिया का सबसे बड़ा अमीर भी बन सकता है. यह कहना है बंधन बैंक के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रशेखर घोष, जिनकी सफलता की कहानी लोगों को प्रेरणा देती है.

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मोहित पारीक
  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2018,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

अपनी मेहनत और हुनर से कोई भी दुनिया का सबसे बड़ा अमीर भी बन सकता है. यह कहना है बंधन बैंक के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रशेखर घोष, जिनकी सफलता की कहानी लोगों को प्रेरणा देती है. हाल ही में बंधन बैंक ने औपचारिक तौर पर शेयर मार्केट में कदम रखा है, जिसकी काफी सराहना की जा रही है. बंधन बैंक की सफलता के पीछे हैं चंद्रशेखर, जिन्होंने बचपन में काफी मुश्किल से अपना गुजारा किया था.

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योर स्टोरी के अनुसार, चंद्रशेखर का जन्म साल 1960 में त्रिपुरा के एक गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने जीवन का लंबा वक्त बांग्लादेश और पूर्वी भारत के गरीबों के बीच बिताया. उनके पिता उन दिनो मामूली सी मिठाई की दुकान चलाते थे और वे दूध बेचते थे. साथ ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर कमाई करते थे.

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उन्होंने बांग्लादेश के ढाका विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में एमए किया उसी दौरान बांग्लादेश में महिला सशक्तीकरण के लिए काम कर रहे एक संगठन BRAC में काम किया. उस वक्त उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ उन्हें रोजगार देने की सोची और 2001 में अपने रिश्तेदारों से धन जुटा कर उन्होंने पश्चिम बंगाल से बंधन माइक्रोफाइसेंस बैंक की शुरुआत कर दी. उसके बाद उनका बंधन लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ता गया और उन्होंने गरीब महिलाओं को लोन देना शुरू किया.

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साल 2009 में उन्होंने बंधन को नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनी के रूप में रजिस्टर करा दिया. बंधन बैंक की इस सफलता को देखते हुए उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सन् 2014 में बैंकिंग लाइसेंस भी मिल गया. बाजार में लिस्ट होने के बाद बैंक का मार्केट कैप 58,837 करोड़ रुपये हो गया. इसके साथ ही बैंक अपने निवेशकों को 33 फीसदी तक का मुनाफा भी देने लगा. भारत में आज इस बैंक के कुल 430 एटीएम के साथ ही लगभग 887 शाखाएं खुल चुकी हैं. पूर्वोत्तर भारत में इस बैंक के 23 लाख ग्राहक हो चुके हैं.

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