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पापड़ बेचते थे आनंद कुमार, किया ये कारनामा, अब बनेगी फिल्म

आईआईटी के एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करवाने वाले सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार को राष्ट्रीय कल्याण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पुरस्कार प्रदान किया.

फाइल फोटो फाइल फोटो
मोहित पारीक
  • नई दिल्ली,
  • 15 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST

आईआईटी के एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करवाने वाले सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार को राष्ट्रीय कल्याण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पुरस्कार प्रदान किया. बता दें कि भारत सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार के अंतर्गत एक लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. आनंद कुमार पिछले कई सालों से 30 बच्चों को फ्री में शिक्षा देकर उन्हें आईआईटी में सफलता दिलाते रहे हैं..

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आनंद कुमार को राष्ट्रीय कल्याण पुरस्कार के साथ कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है और अब उनपर एक फिल्म भी बनाई जा रही है, जिसमें अभिनेता रितिक रोशन उनकी भूमिका में नजर आएंगे. हालांकि उनकी इस सफलता के पीछे संघर्ष भी लंबा है. यह साधारण आदमी कई गरीब बच्चों का मसीहा बना है. महान गुरू के सुपर-30 बनने के पीछे की कहानी भी बहुत रोचक है.

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आनंद कुमार का जन्म पटना में हुआ था. स्कूल के दिनों से ही उन्हें मैथ से काफी लगाव रहा है. 1994 में उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला. लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनके हाथों से यह अवसर निकल गया. पैसों की तंगी के चलते आनंद कुमार ने अपनी मां के साथ शाम में पापड़ बेचना शुरू कर दिया. ताकि वह थोड़ा एक्स्ट्रा पैसा कमा सके.

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क्या है सुपर-30?

विदेशी पत्रिकाओं के लिए वह हर हफ्ते पटना से बनारस जाया करते थे. इन पत्रिकाओं की वजह से वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जाते थे. आनंद कुमार ने रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमैटिक्स शुरू किया था. जहां वह साधारण फीस पर बच्चों को एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयार करते थे. कम फीस होने के बावजूद कुछ बच्चे यहां एडमिशन नहीं ले पाते थे. जिसके बाद आनंद कुमार ने सुपर-30 की स्थापनी की.

सुपर-30 एक एजुकेशनल प्रोग्राम है, जहां 30 गरीब और होनहार बच्चों को मुफ्त में आईआईटी के लिए कोचिंग दी जाती है. इन सुपर-30 बच्चों को फ्री कोचिंग के अलावा, उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी होती है. बच्चों के लिए आनंद कुमार की मां जयंती देवी खाना बनाती हैं.

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