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दिल्ली की राजनीति में हाथ आजमाने आए अजित पवार, इन पांच सीटों के लिए तय किए उम्मीदवार

अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है. बिना किसी गठबंधन के, पार्टी 25-30 उम्मीदवार उतारेगी. बुरारी, बादली और सिलमपुर जैसी सीटों पर उम्मीदवार तय किए गए हैं. एनसीपी की योजना दिल्ली की राजनीति में स्थान बनाने की है, जहां आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस का प्रभुत्व है.

अजित पवार (File photo) अजित पवार (File photo)
राहुल गौतम
  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने भी किस्मत आजमाने की योजना बनाई है. उनकी पार्टी किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी. राष्ट्रीय राजधानी की इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में कदम रखते हुए उन्होंने 25-30 उम्मीदवारों के नाम भी फाइनल कर लिए हैं, और पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार भी तय कर लिए हैं.

सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी लीडरशिप ने दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर मीटिंग की और बुरारी, बादली और सिलमपुर जैसी विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार तय किए, जहां बुरारी से रतन त्यागी, बादली से मुलायम सिंह, किरारी से संजय सिंह प्रजापति, संगम विहार से उमर अली इद्रीसी और सिलमपुर जैसी मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट से रूही सलीम को उम्मीदवार बनाया जा सकता है है.

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दिल्ली की राजनीति में पैठ बनाने की कोशिश

एनसीपी की योजना दिल्ली की राजनीति में अपना पैठ कायम करने की है, जहां अभी तीन प्रमुख पार्टियों आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस का प्रभुत्व है. कांग्रेस ने जहां दिल्ली में दशकों लंबा शासन किया है, पार्टी की तरफ से सिर्फ शीला दीक्षित ही तीन बार मुख्यमंत्री रही हैं.

इनके अलावा दस साल से ज्यादा समय से यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है और इस दरमियान अरविंद केजरीवाल तीन बार मुख्यमंत्री बने हैं. फिलहाल यहां की सीएम आतिशी हैं. वहीं बीजेपी पिछले 26 साल से दिल्ली में सत्ता में आने की जद्दोजहद कर रही है.

कांग्रेस की अपनी जमीन वापस हासिल करने की कोशिश

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इस बार के विधानसभा चुनाव में खासतौर पर मुकाबला आम आदमी पार्टी और बीजेपी के लिए माना जा सकता है, जहां कांग्रेस पार्टी भी अपनी खोई जमीन दोबारा हासिल करने की कोशिश में है. दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के पास एक भी सीट नहीं है. यहां विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 62 विधायक रहे हैं तो बीजेपी के आठ विधायक हैं.

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महाराष्ट्र में अजित पवार की राजनीति

बता दें कि अजित पवार की पार्टी महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी है, लेकिन दिल्ली चुनाव के लिए पार्टी ने गठबंधन नहीं किया है. उन्होंने शरद पवार की पार्टी के दर्जनों विधायकों को तोड़कर महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) की सरकार बनाने में मदद की थी. बाद में पार्टी और इसका चिन्ह भी अजित पवार को मिल गया और अभी पार्टी के अध्यक्ष हैं और महाराष्ट्र की सहयोगी सरकार में डिप्टी सीएम हैं.

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