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Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली (Delhi) में चुनावी माहौल अपने शबाब पर है. विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के पोस्टरों-वायदों से सड़क और गलियां पटी पड़ी हैं. पिछले तीन विधानसभा चुनावों में दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी को ही सत्ता सौंपती आ रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी ही बाजी मारेगी या दिल्ली में बदलाव की बयार बहेगी.
दिल्ली के मिज़ाज को जानने और वोटर्स के मूड को भांपने के लिए अपनी स्पेशल सीरीज़ 'दिल्ली बोली' के तहत हम पहुंचे दिल्ली के बदरपुर विधानसभा इलाके में.
बदरपुर विधानसभा के लोगों से बात करें तो पता चलता है कि इलाक़े की सबसे बड़ी समस्या सड़कों की ख़स्ता-हालत है. ऑटो चालक उमेश कहते हैं कि हमारी बदरपुर विधानसभा की खड्डा कॉलोनी की रोड की हालत बहुत ख़राब है. यहां बीजेपी के विधायक हैं, उन्होंने रोड बनवानी शुरू की थी लेकिन चुनाव जीतने के बाद वो यहां से चले गए. बदरपुर के ही निवासी धर्मेंद्र कहते हैं कि हमारे क्षेत्र की रोड बनवा दी जाए, बाक़ी हमें कुछ नहीं चाहिए. रोड पर बहुत बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं.
मतदाताओं के गिले-शिकवे
इलाक़े के अलग-अलग लोगों से बात करें तो पता चलता है कि बदरपुर विधानसभा सीट के वोटर्स कई मायनों में AAP सरकार के कामकाज से ख़ुश है, तो लोगों को केजरीवाल सरकार से कुछ गिले-शिकवे भी हैंं. कुछ लोग कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार के अच्छे कामों की याद दिलाते हैं, तो कुछ का यक़ीन है कि बीजेपी ही क्षेत्र में विकास करवा सकती है.
बदरपुर के निवासी साहिल आजतक से बातचीत में कहते हैं, "फ्री में मिलने वाली हर चीज़ इंसान को अच्छी लगती है लेकिन लोग उसकी क़द्र नहीं करते हैं. हमारे घरों की बिजली का बिल आज भी उतना ही आ रहा है, जितना पहले आता था."
ऑटो चलाकर ज़िंदगी गुज़ारने वाले शख़्स उमेश कहते हैं, "दिल्ली की जनता केजरीवाल को इसलिए वोट कर रही है क्योंकि जनता ग़रीब है. ये ग़रीब जनता के हित में काम कर रहे हैं, इसीलिए लोग उनको वोट कर रहे हैं. कांग्रेस की सरकार में 26 जनवरी के वक़्त चालान कटने से हम लोगों की आधी ऑटो खड़ी हो जाती थी लेकिन मौजूदा वक़्त में पांच-पांच सवारी लेकर हम लोग चल रहे हैं और कोई ट्रैफ़िक पुलिस वाले नहीं रोक रहे हैं." वहीं, एक दूसरे ऑटो ड्राइवर जगदीश कहते हैं कि हम काम के मुद्दे पर वोट करेंगे. हमारे काम ठप पड़े हैं, हमें काम चाहिए.
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यमुना प्रदूषण पर नाराज़गी
दिल्ली में क़रीब 22 किलोमीटर दूरी तय करने वाली यमुना नदी का पानी ज़हर की मानिंद हो चुका है. यह दिल्ली के बड़े मुद्दों में से एक है. बदरपुर में रहने वाले उमेश कहते हैं, "दिल्ली में आजतक जो भी सरकार रही है, यमुना के लिए सब ने जुमलेबाज़ी की है, किसी की मजाल नहीं है कि साफ़ करवा दे. दिल्ली की नालियों का पानी, कंपनियों का केमिकल यमुना में ही जा रहे हैं."
धर्मेंद्र कहते हैं, "मीठापुर चौक पर नहर में मानव-मल के क़रीब 50 टैंकर ख़ाली होते हैं और यह यमुना नदी में जाकर मिलते है. ये रोका जाना चाहिए. हमने बदरपुर के मतदाताओं से यह जानने की भी कोशिश की कि क्या लोगों की पहुंच उनके विधायक तक है. इस सवाल पर मिला-जुला जवाब मिला है.
क्षेत्र के साहिल कहते हैं, "हम लोग अपने काम में बिज़ी रहते हैं, तो हमने कभी विधायक को बुलाने या फिर उनसे संपर्क करने की कोशिश नहीं की."
बदरपुर के निवासी उमेश कहते हैं, "यहां के विधायक सिर्फ चुनाव के वक़्त ही आते हैं, इसके अलावा उनका कोई काउंसलर भी यहां नहीं आता है. विधायक से अभी तक हमारी कोई मुलाक़ात नहीं है. वे सिर्फ़ चुनाव के टाइम ही आते हैं. वहीं, बदरपुर के निवासी दिनेश कहते हैं कि विधायक राम सिंह बिधूड़ी बुलाने पर आते हैं, जब हमें ज़रूरत पड़ती है तो हम बुला लेते हैं."
'दिल्ली में क्राइम बड़ी समस्या'
विधानसभा क्षेत्र में क्राइम की घटनाओं पर लोगों में सरकार के प्रति नाराज़गी है. दिनेश कहते हैं कि एक महीने में तीन-तीन मर्डर हुए, चाकू-छुरे चले हैं. यहां पर खूब क्राइम है, लोग दिन-दहाड़े मार देते हैं. कई मामले सामने आ चुके हैं. आए दिन बात-बात में चाकू-छूरी हो जाती है.
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शीला दीक्षित को याद कर रहे वोटर्स
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी और AAP की तुलना में कांग्रेस पार्टी बहुत पीछे है. कांग्रेस के बैकफुट पर जाने के पीछे की वजह पूछे जाने पर इलाक़े के ज़्यादातर लोगों ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व से नाराज़गी जाहिर की, तो वहीं कुछ लोग शीला दीक्षित सरकार के काम भी याद करते हैं.
दिनेश कहते हैं कि कांग्रेस ने काम नहीं किया था. बिजली, सड़क, नाली कांग्रेस के वक़्त कुछ नहीं बना था. सारे रोड ख़राब थे, राख उड़ा करती थी. दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ होने की वजहों पर बात करते हुए धर्मेंद्र कहते हैं, "कांग्रेस के वक़्त भी बहुत काम हुए हैं लेकिन वे लोग ग़रीबों पर ध्यान नहीं दे रहे थे. "
वहीं, मोहन कहते हैं, "कांग्रेस के वक़्त जितना काम हुआ, उतना बीजेपी और आम आदमी पार्टी नहीं कर पाई. कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार के वक़्त दिल्ली में खूब काम हुआ, उसके बाद कोई काम करने वाला नहीं मिला."