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करनाल से कुरुक्षेत्र के लाडवा तक... CM सैनी की सीट क्यों बदली गई, क्यों चुनी कांग्रेस की जीती हुई सीट?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (54 साल) 2014 में मुख्य धारा की राजनीति में आए और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. सैनी ओबीसी नेता हैं. मार्च 2024 में मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे के बाद जब करनाल सीट खाली हुई तो सैनी ने यहां से उपचुनाव लड़ा और कांग्रेस के सरदार तरलोचन सिंह को 41 हजार 483 वोटों के अंतर से हराया था.

हर‍ियाणा के सीएम नायब स‍िंह सैनी. हर‍ियाणा के सीएम नायब स‍िंह सैनी.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं और बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करनाल की बजाय अब लाडवा सीट से चुनाव लड़ेंगे. यानी पार्टी ने सैनी को नई सीट से चुनाव लड़ाने का दांव खेला है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2024 में जब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ, तब करनाल से तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर विधायक थे. उन्होंने इस्तीफा दिया तो पार्टी ने सैनी को इस सीट से जून में उपचुनाव लड़ाया था. अब तीन महीने बाद सैनी नई सीट से चुनावी मैदान में दिखेंगे. हालांकि, ये इलाका सैनी के लिए नया नहीं है. वे मुख्यमंत्री बनने से पहले कुरुक्षेत्र से सांसद थे. लाडवा सीट भी कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में आती है.

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90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाने पर जोर लगा रही है. बुधवार को पार्टी ने पहली लिस्ट में 67 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. करनाल से इस बार जगमोहन आनंद को टिकट दिया गया है. संगठन ने 40 सीटों पर उम्मीदवार बदल दिए हैं. सूची में आठ मंत्रियों, 9 विधायकों और पांच पूर्व मंत्रियों के नाम हैं. जबकि तीन मंत्रियों, पांच विधायकों और चार पूर्व मंत्रियों के टिकट काटे गए हैं. जिन मंत्रियों के टिकट कटे हैं, उनमें रणजीत सिंह चौटाला का भी नाम है. 

नायब सिंह सैनी की सीट क्यों बदली गई?

नायब सिंह सैनी की जाटलैंड में मजबूत पकड़ मानी जाती है. वे ओबीसी नेता हैं. मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे के बाद करनाल सीट खाली हुई तो सैनी ने यहां से उपचुनाव लड़ा और कांग्रेस के सरदार तरलोचन सिंह को 41 हजार 483 वोटों के अंतर से हराया था. टिकट घोषणा से पहले सैनी खुद बार-बार करनाल सीट से चुनाव लड़ने की बात दोहरा रहे थे. इतना ही नहीं, उन्‍होंने 30 अगस्‍त को करनाल में बड़ा रोड शो भी किया था और करनाल की भूमि को नमन किया था. करनाल को खट्टर का गढ़ कहा जाता है. हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने हफ्तेभर पहले ही संकेत दे दिए थे कि वो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. जबकि सीएम सैनी इस बार लाडवा से मैदान में उतरेंगे. वहीं, सीएम सैनी का कहना था कि प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली को मुझसे ज्यादा जानकारी है, क्योंकि पार्लियामेंट बोर्ड के अंदर जिन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, उनके नाम केंद्रीय नेतृत्व को बताने का काम प्रदेश अध्यक्ष ने किया है. अब फैसला पार्लियामेंट्री बोर्ड को करना है. अब जो भी निर्णय लिया जाएगा, वो हमें स्वीकार होगा. मैं सभी से आग्रह करूंगा कि उम्मीदवार नहीं, सिर्फ कमल का निशान देखें.

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फिलहाल, सैनी की सीट बदलने के पीछे कई चर्चाएं हो रही हैं. बीजेपी ने करनाल से जगमोहन आनंद को टिकट दिया है, वे लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के मीडिया सलाहकार भी रहे हैं.

चूंकि, कुरुक्षेत्र को नायब सिंह सैनी का गृह क्षेत्र माना जाता है. यहां उनकी संगठन से लेकर इलाके में खासी पकड़ है. माना जा रहा है कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में एक तरह से सैनी की घरवापसी की है. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि बीजेपी सेफ खेल रही है. वो किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है. विपक्ष का तर्क है कि सैनी 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में नारायणगढ़ से चुनाव लड़े. 2009 में हार गए और 2014 में जीत हासिल की. बाद में खट्टर सरकार में मंत्री बनाए गए. जब 2019 का लोकसभा चुनाव आया तो पार्टी ने नायब को कुरुक्षेत्र से टिकट दिया. हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी नारायणगढ़ सीट से चुनाव हार गई थी. 

माना जा रहा है कि पार्टी ने सैनी को इस बार विधानसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र से उतारने के पीछे रणनीति के तहत निर्णय लिया है. कुरुक्षेत्र में सैनी का घर थानेसर इलाके में आता है. वो मूल रूप से अंबाला के रहने वाले हैं. सैनी के सामने नई चुनौतियां हैं. ना सिर्फ खुद जीत हासिल करना है, बल्कि बीजेपी सरकार की हैट्रिक के लिए ताकत झोंकनी है. सैनी को 2023 में पार्टी ने हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उसके बाद 12 मार्च, 2024 को पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर चौंका दिया.

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10 साल में चौथी अलग सीट से चुनाव मैदान में सैनी

दिलचस्प बात यह है कि 10 साल के अंतराल में सैनी लगातार चौथी बार अलग सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं. सैनी ने 2014 में अंबाला की नारायणगढ़ सीट से जीत हासिल की थी. उसके बाद 2019 में वो कुरुक्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़े और जीते. 2024 में सैनी करनाल सीट से विधानसभा उपचुनाव में उतरे और जीते. अब तीन महीने बाद वो फिर नई सीट लाडवा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.

2019 में कांग्रेस ने जीती थी लाडवा सीट

लाडवा सीट पर पिछले तीन चुनाव का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो यहां कांग्रेस-बीजेपी और इंडियन नेशनल लोकदल ने एक-एक बार जीत हासिल की है. 2019 में लाडवा सीट से कांग्रेस की मेवा सिंह ने जीत हासिल की थी. मेवा को 57,665 और बीजेपी के डॉ. पवन सैनी को 45,028 वोट मिले थे. 2014 में बीजेपी के डॉ. पवन सैनी ने जीत हासिल की थी. पवन को 42,445 वोट और इंडियन नेशनल लोक दल के बचन कौर बरशामी को 39,453 वोट मिले थे. 2009 में यहां इंडियन नेशनल लोकदल के शेर सिंह बरशामी जीते थे. लाडवा सीट पर बीजेपी को भितरघात का भी खतरा है. हालांकि, सीएम के मैदान में होने से संगठन में एकजुटता भी देखने को मिल सकती है.

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लाडवा सीट पर क्या हैं जमीनी समीकरण

लाडवा सीट पर सैनी समाज के अच्छी खासी संख्या में वोटर्स हैं. बीजेपी यहां दो बार सैनी समाज के डॉ. पवन पर दांव लगा चुकी है. एक बार पवन ने जीत हासिल की है. 2019 के चुनाव में वो करीब 12 हजार वोटों से हारे हैं. बीजेपी को लग रहा है कि नायब सिंह सैनी के चुनाव में आने से सैनी समाज का बीजेपी की तरफ झुकाव हो सकता है और इसका पार्टी को फायदा मिल सकता है. नायब सिंह सैनी सिटिंग मुख्यमंत्री हैं. आसपास की सीटों पर इसका अलग संदेश जाएगा और जीत हासिल करने में मदद मिल सकती है. कुरुक्षेत्र को किसान बेल्ट भी माना जाता है. यहां जाट वोटर्स भी बड़ी संख्या में हैं. पार्टी को आशंका यह है कि सैनी समुदाय का वोट भले अच्छी संख्या में है, लेकिन वोटों के बिखराव से इनकार नहीं किया जा सकता है. नायब सिंह सैनी के सामने यही चुनौती होगी कि वो वोटों के बिखराव को रोकें और बड़ी जीत हासिल करके आएं.

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