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किसी के बेटे तो किसी की पत्नी को टिकट... जानें- हरियाणा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की लिस्ट में परिवारवाद की कितनी झलक

हरियाणा चुनाव में परिवारवाद हावी नजर आ रहा है. कारण, भाजपा ने राजनीति में दबदबा रखने वाले पांच परिवारों के सदस्यों को टिकट दिया है, जिनमें पार्टी नेताओं की दो बेटियां और तीन बेटे शामिल हैं. वहीं कांग्रेस ने पार्टी नेताओं के सात करीबी रिश्तेदारों को मैदान में उतारा है, जिनमें दो बेटे, एक पत्नी, एक दामाद, एक पूर्व सीएम का पोता और बीएस हुड्डा के समधी शामिल हैं.

कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य, सांसद वरुण चौधरी की पत्नी पूजा और भूपेंद्र हुड्डा के समधी करण दलाल कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य, सांसद वरुण चौधरी की पत्नी पूजा और भूपेंद्र हुड्डा के समधी करण दलाल
मनजीत सहगल
  • चंडीगढ़,
  • 13 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:05 PM IST

हरियाणा में इस बार विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने वाले दो कारक हैं- परिवारवाद और पीढ़ीगत बदलाव. कांग्रेस और भाजपा, दोनों ने ही इस चुनाव में जीत के लिए वरिष्ठ पार्टी नेताओं के करीबी रिश्तेदारों को मैदान में उतारा है. भाजपा ने राजनीति में दबदबा रखने वाले पांच परिवारों के सदस्यों को टिकट दिया है, जिनमें पार्टी नेताओं की दो बेटियां और तीन बेटे शामिल हैं. 

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इसको लेकर चंडीगढ़ के राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर गुरमीत सिंह बताते हैं, "परिवार के सदस्यों को टिकट देना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार पीढ़ीगत बदलाव देखने को मिल रहा है. कई वरिष्ठ नेता अगली पीढ़ी के लिए टिकट पाने में कामयाब रहे हैं. इससे यह भी पुष्टि होती है कि कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा ने खुद नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट दिए हैं."

उधर, कांग्रेस ने पार्टी नेताओं के सात करीबी रिश्तेदारों को मैदान में उतारा है, जिनमें दो बेटे, एक पत्नी, एक दामाद, एक पूर्व सीएम का पोता और बीएस हुड्डा के समधी शामिल हैं.

भाजपा ने आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को मैदान में उतारा है. पूर्व कैबिनेट मंत्री करतार सिंह भड़ाना के बेटे मनमोहन भड़ाना को समालखा से टिकट दिया गया है. केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव को अटेली से मैदान में उतारा गया है.

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इनके अलावा भाजपा ने किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी को तोशाम से टिकट दिया है. सतपाल सांगवान एक अन्य पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं, जिन्होंने अपने बेटे सुनील सांगवान के लिए चरखी दादरी से पार्टी का टिकट हासिल किया है. सुनील ने भाजपा में शामिल होने के लिए जेल अधीक्षक की अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी.

बीजेपी की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य और हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री अनिल विज ने बताया, "टिकट देने का एकमात्र मानदंड किसी खास नेता की अक्षमता है. परिवार और वंशवाद बाद में आते हैं. नेताओं के योगदान को भी ध्यान में रखा गया है." 

कांग्रेस ने परिवारों के सदस्यों को दिया टिकट

वहीं कांग्रेस की बात करें तो पार्टी ने हरियाणा के पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल के दामाद सोमबीर श्योराण को बधाड़ा विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है. इसके अलावा राज्यसभा सांसद और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला को कैथल से टिकट दिया गया है, जबकि पार्टी के हिसार सांसद जय प्रकाश के बेटे विकास सहारन कलायत से टिकट पाने में कामयाब रहे हैं. हरियाणा के पूर्व सीएम बंसीलाल के पोते अनिरुद्ध चौधरी को तोशाम से मैदान में उतारा गया है.

कांग्रेस के एक और खानदानी सदस्य जिन्हें पार्टी का टिकट मिला है, वे हैं पूर्व सीएम भजन लाल के सबसे बड़े बेटे चंद्र मोहन बिश्नोई, जिनके छोटे भाई कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. पार्टी के मुलाना से सांसद वरुण चौधरी भी अपनी पत्नी पूजा चौधरी के लिए मुलाना से पार्टी का टिकट पाने में कामयाब रहे. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने समधी करण सिंह दलाल को टिकट दिलवाया, जो उनकी भतीजी के ससुर हैं. दलाल ने टिकट की औपचारिक घोषणा न होने पर भी कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करके हंगामा खड़ा कर दिया था.

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INLD में भी परिवारवाद!

इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) भी परिवार के सदस्यों को टिकट देने में उदार है. पार्टी ने दिवंगत प्रताप सिंह चौटाला की बहू सुनैना चौटाला और आईएनएलडी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के भाई सहित परिवार के चार सदस्यों को टिकट दिया है. चौटाला परिवार से चुनाव लड़ने वाले अन्य लोगों में दिवंगत देवी लाल के पोते आदित्य चौटाला, अर्जुन चौटाला और ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अभय चौटाला शामिल हैं. 

जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने डबवाली से दिग्विजय चौटाला और उचाना से दुष्यंत चौटाला को मैदान में उतारा है. पार्टी ने दुष्यंत के चाचा रणजीत सिंह चौटाला को समर्थन दिया है, जो रानिया से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया.

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