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हरियाणा में किंगमेकर बनने की रेस में पार्टियां... देखिए दुष्यंत, मायावती, चंद्रशेखर, अभय, गोपाल कांडा और आम आदमी पार्टी में कौन-कौन?

हरियाणा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही अब तक सीधे लड़ाई होते आई है. दोनों पार्टियां मुख्य तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और जाट वोट बैंक को साधने के लिए जोर लगा रही है. वहीं, अनुसूचित जाति (एससी) भी इस बार चुनावों में निर्णायक फैक्टर हो सकती है.

हरियाणा चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों ने जोर लगा दिया है. हरियाणा चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों ने जोर लगा दिया है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST

हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं और इस बार पांच कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. मैदान में सत्तारूढ़ बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने हैं. आम आदमी पार्टी भी जोर लगा रही है. क्षेत्रीय दलों में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी भी सत्ता के समीकरण बनाने के लिए दांव पेच लगा रहे हैं. इनेलो ने इस बार गोपाल कांडा की हिलोपा और बसपा से अलायंस किया है. जेजेपी ने भी चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी-काशीराम से गठबंधन किया है. यानी दोनों प्रमुख क्षेत्रीय दल दलितों को साधने की कवायद कर रहे हैं. हरियाणा चुनाव को लेकर कहा जा रहा है कि यहां क्षेत्रीय पार्टियां किंग से ज्यादा किंगमेकर बनने की रेस लगा रही हैं.

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हरियाणा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही अब तक सीधे लड़ाई होते आई है. दोनों पार्टियां मुख्य तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और जाट वोट बैंक को साधने के लिए जोर लगा रही है. वहीं, अनुसूचित जाति (एससी) भी इस बार चुनावों में निर्णायक फैक्टर हो सकती है. 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में एससी की आबादी करीब 20 फीसदी है. चूंकि हरियाणा में 10 साल से बीजेपी की सरकार है. ऐसे में एंटी इनकंबेंसी के चलते हरियाणा में वोटिंग का अलग पैटर्न भी देखने को मिल सकता है. फिलहाल, विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी हैं और प्राथमिकता में रखे जा रहे हैं.

AAP का खुला ऐलान, किंगमेकर बनने जा रहे हैं... 

आम आदमी पार्टी ने तो खुलकर कह दिया है कि वो किंगमेकर बनने जा रही है. उसके समर्थन के बिना नई सरकार नहीं बनेगी. AAP ने पहली बार सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. 2019 के चुनाव में AAP ने 46 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और हार का सामना करना पड़ा था. हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी AAP, इंडिया ब्लॉक का हिस्सा थी और कांग्रेस के समर्थन से कुरुक्षेत्र सीट पर सुशील गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, वो बीजेपी के नवीन जिंदल से चुनाव हार गए थे. अब विधानसभा चुनाव में AAP अकेले मैदान में है. कांग्रेस से सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन सकी है. जेल से रिहा होकर आए AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल हरियाणा का छोरा बताकर खुद को जनता से कनेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. AAP का फोकस एनसीआर से सटे जिलों में ज्यादा देखा जा रहा है. पार्टी इस बार दिल्ली और पंजाब से सटे इलाकों में कुछ कमाल होने की उम्मीद जता रही है.

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दुष्यंत चौटाला और चंद्रशेखर...

2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेजेपी अलग-अलग चुनाव लड़े थे. जेजेपी ने डेब्यू में ही चमत्कार कर दिया और जाट वोट बैंक के दम पर 10 सीटों पर जीत हासिल की. बीजेपी सत्ता के जादुई आंकड़े से थोड़ा दूर ठहर गई. कुल 40 सीटें जीतीं. जेजेपी किंगमेकर बनी और बीजेपी से अलायंस कर नई सरकार बनाई. मनोहर लाल खट्टर दूसरी बार सीएम बने थे और दुष्यंत चौटाला पहली बार डिप्टी सीएम बनाए गए. हालांकि, इस साल आम चुनाव से ठीक पहले हरियाणा में उठापटक हुई और बीजेपी ने ना सिर्फ जेजेपी से अलायंस तोड़ दिया, बल्कि खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को नया मुख्यमंत्री बना दिया. इस दरम्यान बीजेपी और जेजेपी के बीच कई बार मतभेद देखने को मिला. जेजेपी ने कृषि कानून और अग्निपथ योजना का विरोध किया. पहलवान के मुद्दे पर भी अलग राय देखने को मिली थी. दुष्यंत चौटाला ने भी बीजेपी के साथ आगे अलायंस करने से इनकार कर दिया था.

इस चुनाव में जेजेपी अपने नए गठबंधन में 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और 20 सीटें आजाद समाज पार्टी के लिए छोड़ी हैं. जेजेपी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है और हरियाणा की राजनीति में खुद को पावर सेंटर के रूप में साबित करने की चुनौती है. इस साल की शुरुआत में बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद से जेजेपी को कई झटके लगे हैं. 10 में से 4 विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं और तीन से पार्टी से दूरी बना ली है. पार्टी में बचे तीन विधायकों में दुष्यंत चौटाला, उनकी मां नैना चौटाला और अमरजीत ढांडा शामिल हैं. इस गठबंधन की नजर जेजेपी के जाट समर्थन आधार और आजाद समाज पार्टी के जरिए दलितों को साधने पर टिकी है. दुष्यंत ने इनोलो से अलग होकर जेजेपी लॉन्च की थी.

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जेजेपी ने सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था और पूरे राज्य में 0.87% वोट हासिल किए थे. 

अभय चौटाला और मायावती... गोपाल कांडा

इनेलो के कर्ताधर्ता पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला हैं. इनेलो पहले ही मायावती की अगुवाई वाली बीएसपी के साथ गठबंधन कर चुकी है. गठबंधन के नेताओं ने अभय चौटाला (दुष्यंत के चाचा) को सीएम फेस घोषित किया है. अभय, इनेलो से एकमात्र निवर्तमान विधायक हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में इनेलो ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा था और कुल 1.84% वोट शेयर हासिल किया था. आगामी विधानसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक लिटमस टेस्ट है, जिनमें से प्रत्येक का नेतृत्व पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के परिवार के सदस्य कर रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि साल 2019 की तरह हरियाणा में निर्दलीय और छोटी पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है.

ऐसे किंगमेकर बनी थी JJP 

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. 5 साल पहले यानी 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 40 सीटें जीती थीं. बीजेपी ने 36.7 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था. लिहाजा, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जबकि कांग्रेस 31 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही. कांग्रेस का वोट शेयर 28.2 फीसदी था. तीसरे नंबर पर दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) रही. जेजेपी ने 14.9 फीसदी वोट शेयर के साथ 10 सीटें जीती थीं. हरियाणा लोकहित पार्टी ने एक फीसदी से भी कम वोट शेयर हासिल कर सिर्फ एक सीट जीती थीं. जबकि 7 निर्दलीय भी चुनाव जीते थे, लेकिन किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए 46 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं छुआ था. ऐसे में जेजेपी किंगमेकर बनी थी. बीजेपी ने जेजेपी, हरियाणा लोकहित पार्टी और निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बनाई थी. 

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पार्टियों ने बदली है चुनावी रणनीति

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों में कड़ी टक्कर रही. बीजेपी ने 10 में से पांच लोकसभा सीटें जीतीं और 46.1 प्रतिशत वोट हासिल किए. जबकि कांग्रेस ने शेष पांच सीटें जीतीं और उसे 43.7% वोट मिले. 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 58% था. हालांकि, इस बार 12% का नुकसान हुआ है. जबकि 2019 में कांग्रेस को 28.4% वोट मिले थे. इस बार कांग्रेस को 15.3% वोट शेयर का फायदा मिला है. इन रुझानों के बाद हरियाणा में राजनीतिक दल नई रणनीति के साथ मैदान में उतरे हैं. बीजेपी ने सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए कई मंत्रियों समेत मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं. 

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