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'अरे मांग लेता तो सब दे देती, पार्टी छीनने की...', अजित पवार की बगावत पर बोलीं सुप्रिया सुले

महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के फूट का मुद्दा कोई ठंडा होने वाला मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसकी गूंज सुनने को मिलेगी. मसलन, एनसीपी में फूट डालने के बाद अजित पवार ने बीजेपी जॉइन कर लिया था. सुप्रिया सुले ने कहा, 'अगर मांग लेता तो सब दे देती.'

NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:21 PM IST

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की गूंज के बीच मुंबई में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव चल रहा है, जिसमें एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने भी शिरकत की और फिर बाद में सुप्रिया सुले भी पहुंचीं. चूंकि एनसीपी दो हिस्सों में बंट चुकी है और राज्य में असली-नकली के सवाल उठ रहे हैं - एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा, 'अरे मांग लेता तो सब दे देती, पार्टी छीनने की जरूरत नहीं थी.'

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सुप्रिया सुले ने कहा कि एनसीपी अजीत पवार को पार्टी में रखना चाहती थी लेकिन उन्होंने "हमारे जीवन को अस्त-व्यस्त करके छोड़ जाने का फैसला किया." सुप्रिया सुले ने अपने चचेरे भाई अजीत पवार के मामले पर पूछे गए सवालों के बेबाकी से जवाब दिए, जिन्होंने पार्टी में फूट डालकर कई विधायकों के साथ बीजेपी गठबंधन जॉइन कर लिया था.

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'मांग लेता तो सब दे देती', बोलीं सुप्रिया सुले

अजीत पवार के किनारा कर लेने बाद यह सवाल भी उठने लगे थे कि सुप्रिया सुले एनसीपी की कमान चाहती थीं, लेकिन उन्होंने इसका खंडन किया और कहा कि वह पार्टी की कमान अजीत पवार को सौंपकर खुश थीं. उन्होंने कहा, "मैंने कभी भी इसकी (एनसीपी लीडरशिप) की मांग नहीं की. वह इसे पाने के लिए सबकुछ कर रहे थे." उन्होंने कहा, "अरे मांग लेता न तो सब दे देती. पार्टी छीनने की जरूरत नहीं थी."

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अजीत पवार ने तोड़े थे एनसीपी के विधायक

शराद पवार के भतीजे अजीत पवार ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ एनसीपी से किनारा कर लिया था, और बाद में वाद-विवाद के बाद पार्टी की कमान अजीत पवार को मिल गई, जो अभी महायुती गठबंधन का हिस्सा हैं. वह एकनाथ शिंदे सरकार में डिप्टी सीएम हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ सीट बंटवारे में खींचतान में उलझे हुए हैं.

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इस सवाल पर कि लोग कहते हैं कि सुप्रिया सुले राष्ट्रीय राजनीति के लिए बनी हैं, और वह गांव की राजनीति में फिट नहीं बैठतीं, जबकि गांव की राजनीति में अजीत पवार ज्यादा फिट बैठते हैं, उन्होंने (सुप्रिया सुले ने) कहा कि यह बात तो सिर्फ समय बताएगा और मुझे लगता है कि रिस्पॉन्सिबिलिटी हम सभी पर आती है और यह हम पर निर्भर करता है कि कौन सही रिजल्ट दे रहा है.

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