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लोकसभा में हारे लेकिन विधानसभा में दो सीटों पर लहराया जीत का परचम, उमर अब्दुल्ला ने चंद महीनों में यूं पलटा गेम

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद हुए विधानसभा चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने 49 सीटें जीतीं. बीजेपी ने सबसे ज्यादा वोट पाए, और जम्मू क्षेत्र की 29 सीटें जीतीं. चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की मजबूत वापसी देखी गई, जबकि पीडीपी को निराशा हाथ लगी. अब माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ही होंगे और इसका ऐलान खुद उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने किया है.

अपने पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ उमर अब्दुल्ला (Photo: India Today) अपने पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ उमर अब्दुल्ला (Photo: India Today)
आजतक ब्यूरो
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने 49 सीटों पर जीत दर्ज की है. इसमें सबसे ज्यादा नेशनल कॉन्फ्रेंस को 42 सीटें मिलीं. यहां सरकार बनाने के लिए 46 सीटों की जरूरत है. राज्य के अगले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला होंगे, लेकिन सीटों की बात न करें तो बीजेपी ने फिर भी सबसे ज्यादा वोट हासिल किए हैं.

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जम्मू कश्मीर विधानसभा नतीजों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को घेरा और उसे परजीवी बताते हुए कहा कि वो अपने सहयोगी दलों की ही नैया डुबो देती है. उन्हें निगल जाती है. उन्होंने कहा कि सहयोगियों ने कहा कि कांग्रेस की वजह से प्रदर्शन खराब हो रहा है.

कांग्रेस की वजह से हार हो रही है. जम्मू कश्मीर में भी यही हो रहा है. जहां सहयोगियों ने भरोसा किया तो उनकी ही नैय्या डूबी. कांग्रेस ऐसी परजीवी पार्टी है, जो अपने ही सहयोगियों को ही निगल जाती है. प्रधानमंत्री मोदी ने उमर अब्दुल्ला को भी जीत की बधाई दी.

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जून में हारे, अक्टूबर में जीते उमर

उमर अब्दुल्ला जून में लोकसभा चुनाव 2 लाख से ज्यादा वोट से हार गए थे, लेकिन चंद ही महीनों में उन्होंने न सिर्फ दो-दो विधानसभा सीट से चुनाव जीता, बल्कि 42 सीटों के साथ जीतकर नेशनल कॉन्फ्रेंस को जीत दिला दी.

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उमर अब्दुल्ला की वापसी के साथ ही अब उनका एक पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है, जिसे उन्होंने 24 दिसंबर 2014 को पोस्ट किया था. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, "शांति बनाए रखें, मैं वापस जरूर आऊंगा." ये वो दौर था जब उमर अब्दुल्ला को विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफा देना पड़ा था.

इसके बाद चुनाव के ठीक बाद PDP-BJP का गठबंधन हुआ, लेकिन वो नहीं चला और फिर साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटा दी गई. उसके 5 साल बाद हुए चुनावों में उमर अब्दुल्ला ने जोरदार वापसी करते हुए अपनी कही बात सच साबित कर दी. उमर अब्दुल्ला ने अगस्त की शुरुआत में कहा था कि वो जम्मू कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल होने तक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन बाद में उन्होंने अपना इरादा बदला.

उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे और उनके पिता फारुक अब्दुल्ला ने कहा है कि वो जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली का वादा करते हैं.

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गांदरबल और बड़गाम में लहराया NC का परचम

उमर अब्दुल्ला के लिए गांदरबल और बड़गाम, दोनों सीटें ही चुनौतीपूर्ण थीं, क्योंकि बारामूला लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनकी प्रतिष्ठा दांव पर थी. बड़गाम विधानसभा क्षेत्र बारामूला संसदीय सीट के अंतर्गत आता है, जहां उमर अब्दुल्ला इंजीनियर अब्दुल राशिद शेख से 204,142 वोटों से हार गए थे. हांलाकि ये नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रहा है. इस तरह दोबारा यहां से जीत उमर के लिए निजी कामयाबी मानी जा सकती है.

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जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजों से ये साफ है कि उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जबरदस्त वापसी की है और जनता का भरोसा जीता है. वहीं महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को जनता ने नकार दिया है. दूसरी तरफ तमाम कोशिशों के बावजूद, बीजेपी अपनी पहुंच को जम्मू क्षेत्र से आगे बढ़ाने में नाकाम रही है.

बीजेपी ने भी किया अपना दर्द कम

जम्मू कश्मीर के इस बार के विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक रहे. पहले देश दुनिया ने जम्मू-कश्मीर में तीनों चरणों के दौरान औसतन 63 फीसदी से ज्यादा मतदान होते देखा और अब जीत के जश्न से वहां लोकतंत्र में बढ़ते विश्वास को देखा जा सकता है.

चुनाव नतीजों का ये संकेत भी है कि जम्मू के हिंदू बहुल इलाकों में बीजेपी को बढ़त है, जबकि कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल इलाकों में नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को बढ़त है.

बीजेपी भले ही 30 से 35 सीटों के अपने लक्ष्य को पूरी तरह हासिल न कर पाई हो लेकिन सबसे ज्यादा वोट हासिल करने में कामयाब हो गई. वहीं वैष्णो देवी सीट को जीतकर पार्टी ने अयोध्या और बद्रीनाथ में हार के दर्द को कुछ कम किया.

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J-K में किसको, क्या मिला?

आज जम्मू कश्मीर में फारुक अब्दुल्ला की नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन चुनावों में जीत गया है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन को बहुमत मिल गया, और उसने जम्मू-कश्मीर की 90 में से 49 सीटें जीत लीं. बीजेपी 29 सीटों के साथ जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई.

बीजेपी ने जम्मू रीजन की 43 में से 29 सीटें जीतीं और इस रीजन की सबसे बड़ी पार्टी बन गई, और कश्मीर घाटी में एनसी-कांग्रेस गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं और यहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुला. कांग्रेस भले ही जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की खुशी मना रही हो लेकिन हकीकत ये है कि कांग्रेस ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ी और सिर्फ 6 सीटों पर चुनाव जीत सकी.

इनमें भी कांग्रेस जम्मू रीजन में सिर्फ 1 सीट ही जीत सकी और समय बड़ा बलवान होता है, जो उमर अब्दुल्ला लोकसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार राशिद इंजीनियर से हार गए थे. आज वो दो विधानसभा सीटों पर चुनाव जीत गए और अब वो जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री भी होंगे.

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