
10 साल बाद जम्मू-कश्मीर की फिजाओं में एक सवाल गूंज रहा है- 'अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?' राजनीतिक दल और जनता एक दशक बाद अब विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हैं. लेकिन इतने साल में जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है. मतदाताओं का वोट देने का नजरिया अब क्या है, उनके मुद्दे क्या हैं और लोग आगामी सरकार से क्या उम्मीदें कर रहे हैं. यह जानने के लिए आजतक ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से बात की.
डल झील के शिकारा मालिकों ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से चीजें काफी बदल गई हैं और चुनी हुई सरकार से उन्हें बेहतरी की उम्मीदें हैं. शिकारा मालिक इमरान बताते हैं कि अब स्थिति में सुधार हुआ है और पर्यटक बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव बेहतर कश्मीर की उम्मीद लेकर आ रहे हैं और डल झील प्रदूषण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए. नाव पर मौजूद एक फूल विक्रेता का कहना है कि वह दशकों से डल झील पर फूल बेच रहा है और पिछले कुछ वर्षों में उसने बड़े बदलाव को देखा है.
खेती के लिए पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे किसान
शिकारा टी स्टॉल के मालिक ने कहा कि वह बेहतर बिक्री से खुश हैं. उत्तरी कश्मीर का पट्टन, जो कभी आतंक और अशांति का केंद्र था, आज शांतिपूर्ण है और आगामी चुनावों की तैयारी कर रहा है. बारामूला के वाघूरा में सेब के बगीचे के पारंपरिक किसान अब खेती की आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं.
पहली बार ये किसान खेती के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. बारामूला से बीजेपी जिला अध्यक्ष राजा वकार कहते हैं कि कश्मीर में लोग शांति और विकास के लिए प्रधानमंत्री के आभारी हैं और बीजेपी कश्मीर में सीमावर्ती गांवों का विकास करेगी.
सुरक्षित महसूस कर रहे कश्मीरी पंडित
नवनिर्मित पंडित कॉलोनी में वे कश्मीरी पंडित रहते हैं जो कभी विस्थापित हुए और फिर पलायन कर गए थे. अब उन्हें पूरे कश्मीर में विभिन्न स्थानों पर नई कॉलोनियों में पुनर्वासित किया जा रहा है. वे आगामी चुनावों को लेकर उत्साहित हैं और उन्हें डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान करने का अवसर दिया गया है. कश्मीरी पंडितों का कहा है कि वे कश्मीर में सुरक्षित महसूस करते हैं और अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहना चाहते हैं.
तीन चरण में होंगे चुनाव
जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव होंगे. पहले चरण में 24 सीटों पर 18 सितंबर, दूसरे चरण में 26 सीटों पर 25 सितंबर और तीसरे चरण में 40 सीटों पर 1 अक्टूबर को वोटिंग होगी. चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे.
2014 में क्या रहे थे नतीजे?
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे. यहां की 87 सीटों में से पीडीपी ने 28, बीजेपी ने 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं. बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने.
जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया. करीब चार महीने तक राज्यपाल शासन लागू रहा. बाद में उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन ये गठबंधन ज्यादा नहीं चला. 19 जून 2018 को बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया. राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. अभी वहां राष्ट्रपति शासन लागू है.
पिछले साल आर्टिकल-370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया है.